प्रतिध्वनि साप्ताहिक प्रतियोगिता# 11: आजादी के असली मायने
साप्ताहिक प्रतियोगिता# 11 दिनांक -16/8/ 2020 विषय- आजादी के असली मायने विधा - लेख 1. ???? बेशक देश आजाद हुआ ।अनेकों जांबाज़ इस आजादी की खातिर शहीद हुए। अनेकों वीरांगनाओं ने स्वतंत्रता के यज्ञ में अपनी आहुति दी ।लेकिन देश उनके सपनों के भारत को जीवित नहीं रख पाया। "आजाद हुए उन फिरंगीयों से , मकसद अपना भूल गए , गांधी ,नेहरू ,बोस के , सपनों का भारत भूल गए।' हमने अंग्रेजों से तो आजादी पा ली ,लेकिन हम राम- रहीम के मसलों में उलझ गए ।आज भी रोज अखबारों में किसी बहू- बेटी के साथ घिनौने काम का समाचार आम हैं ।फिर हाथ में मोमबत्ती लेकर निकलती पूरी आवाम है। आज भी हमारे देश के सैनिकों को मरणोपरांत मिलता सम्मान है। तो फिर कैसे कह दूं कि हम आजाद हैं ।हम आजाद तब कहलाएंगे जब देश अपने दुर्विचारों से आजाद होगा। देश की बेटी सुरक्षित होगी। धर्म-जाति का मसला ना होगा व देश के रक्षकों का जीते जी सम्मान होगा। स्वाति मानधना 'सुहासिनी' बालोतरा 2. बचपन वाला 15 अगस्त एक बार फिर 15 अगस्त मनाया वैसे ही हर्ष और उल्लास के साथ जैसे हर साल मनाते हैं पर कोई कसक सी लगी क्योंक...