19 जुलाई 2020 को आयोजित प्रतियोगिता में उत्तम चुनी गई रचना आसमान से ओले आते देख आंख भर आयी । बने विधाता वाम कृषक ने कैसी किस्मत पायी ।। कर परिश्रम्य असीम खेत में बीज कृषक ने बोया । चाम हो गया श्याम घाम से रात नींद अति सोया ।। जमा बीज जब देख देखकर हुआ हृदय हरषायी ।।-.--.--.--.--.--.-१ नीद गुडाई करी कुटुम्ब संग ,सींच सींच श्रम भारी । किया कलेऊ बैठ कदम्ब तर ,जल भर लायी नारी।। किया हास परिहास विगत श्रम , हाथ कुदाल उठायी ।।-.--.--.--.--.--.-२ लगा के बारी कर रखवारी बीत विभावरी जाती । रोज रोज और नील गाय के कारन नींद न आती ।। मेङन मेङन करत रतजगा , गावत फाग दिवायी ।।-.--.--.--.--.--.--.-३ खेत लहलहा देख कृषक तब मन में है हरषाता । बरष जाहि में ब्याह बिटू को लगता करत विधाता ।। कंगन कर्ज में रखे कबैके , अबके लेहु उठायी ।।-.--.--.--.--.--.--.--.--.-४ घटा घिरी घनघोर चहु दिश गया हृदय घबरायी । सोचा क्या क्या आज प्रभू जी कैसी विपदा आयी ।। दौङा दौङा गया खेत पर गिरा भूमि भररायी ।।-.--.--.--.--.--.--५ आसमान से ओले आते देख आंख भर आयी । फसल नष्ट सी देख दुर्दशा हारा हिम्मत भायी ।। चढ़ बब...
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