प्रतियोगिता #08: गजेंद्र कुमार घोगरे
मेहंदी
मेहंदी पिया के नाम की
जब मैंने लगाई।
प्रेम रंग में रंग गई मैं
फिर सो न पाई।
रंग मेहंदी का देख के
मैं फूली न समाई
ईश्वर धन्य तेरा है
मेहंदी पक्की खूब लगाई।
लोग कहें मेहंदी को तककर
तू प्रियतम की प्यारी
लाज से मैं लाल हो गई
देख हथेली न्यारी।
अब यह रंग जाने न दूँगी
मन में ठान लिया है
सबसे सुंदर सबसे न्यारा
मेरा प्यारा पिया है।
गजेंद्र कुमार घोगरे
वाशिम (महा)
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