प्रतियोगिता #08- गीतांजली वार्ष्णेय “सूर्यान्जली’
मेहँदी पिया के नाम की
मैंने लगा ली है आज सखी,
मेहंदी पिया के नाम की।
ऐसा रंग मेहंदी का दीजे,
लगूँ दुल्हनियां मैं श्याम की।।
नाम पिया का लिख दे सखी,
छूटे न उम्रभर मोहर पिया के नाम की।।
आज लगा दे सखी
मेहँदी पिया के नाम की।।
मैं मैं न रहूं,वो वो न रहें
मिल मेहंदी के रंगों में,
एक हो जाये,
मैं अर्धागिनी श्याम की।।
तू ही मेरी पहचान पिया,
आऊँ तेरे द्वार,
ओढ़ चुनरियाँ तेरे नाम की।।
आज बनूँ दुल्हनियाँ,
लगा दे मेहंदी आज सखी,
पिया के नाम की।।
गीतांजली वार्ष्णेय "सूर्यान्जली'
बरेली उ.प्रदेश
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