प्रतियोगिता #08: मेहंदी पिया के नाम की
दिनांक -26 जुलाई 20
दिन --रविवार
विषय- मेहंदी पिया के नाम की
मेंहदी पिया के नाम की
आज सजन मोहे अंग लगा लो,
अंग लगा के मनतरंग जगा लो!
आया सावन तीज का त्योहार,
मितवा आओ गायें गीत मल्हार!
रुनझुन बाजै मोरी पायलिया,
कूके बाग में काली कोयलिया !
हरे-भरे उपवन चमन हरियाली,
बहके मन, बहे पवन मतवाली !
मेंहदी पिया के नाम की रचाई,
अनुरागी सजना के मन भायी!
सोलह सिंगार सजा रुप अनूप,
साजन का मन डोले रम्य मधुप!
दिपदिप दमके कंगना झुमके,
नाचे मन मोरनी लगाये ठुमके!
रुप नशीला लोंग मारे लश्कारे,
मेरी बिंदिया के भीने-भीने इशारे !
आओ चले आओ मन प्राण हमारे ,
मेंहदी रचाई है नाम की तुम्हारे !
पावन उत्सव मीठी-मीठी फुहारें,
घेवर गुंजिया पीहर सेआये सिंदारे,
झूलें सखियाँ रिमझिम पड़े फुहारें !
बरसों-बरस बरसे खुशियाँ ठहाके,
हिलमिल सखियों संग झूला झूले!
खिलखिलायें घर अंगना बहारें,
तीजोत्सव की धूम हुये तुम हमारे!!
सीमा गर्ग मंजरी
मेरठ
मेहंदी पिया के नाम की
विधा - काव्य
लाल रंग की मेहंदी में दुल्हन
कितनी सुन्दर लगती है
उसके हाथों की मेंहदी
ना जाने कितने ख्वाब बुनती है
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
मेहंदी में उसके छिपा होता है
अपने साजन का नाम कहीं
लाल गहरा रंग मेहंदी का उसके
दर्शाता है अटूट प्रेम पिया का
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
जितना गाढ़ा रंग है मेहंदी का
उतना गाढ़ा तेरा और मेरा
रिश्ता उम्र भर रहे पिया
मेहंदी तो छोड़ देती है अपना रंग
तुम्हारे प्रेम का रंग ना छूटे पिया
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
तुम्हारे होने से ही खिल जाती है मेहंदी
बाबुल के घर को मैं छोड़ आती हूं
मेहंदी का लाल रंग बाबुल के आंगन में
मेरी याद बन कर रह जाता है पिया
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
कुमकुम लगे पैरों से मैने
मेहंदी रचे हाथों से मैने
गृह प्रवेश किया है पिया
सबके दिलों में मेहंदी की तरह
अपनी प्रेम की छाप छोड़ दूंगी पिया
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
जया वैष्णव
जोधपुर राजस्थान
मेहंदी पिया के नाम की
मेहँदी तेरे नाम की
मैं लगा सुहागन हो जाऊं
तुम बसंत बन जाओ मेरा
मैं तुम्हारा सावन हो जाऊं।
जीवन रस की फुहार बहे
मेरी रगो में तुम्हारा प्यार बहे
तुम सागर बन कर पुकारो मुझे
मैं नदिया बन तुम में मिल जाऊं
तुम मेरे जीवन का गीत बनो
मैं हर पल तुम को ही गाऊं।
मैं तुम्हारे अधरों पे शुशोभित रहूँ
तुम्हारे लब पर हसू और मुस्काउं।
मेहँदी पिया के नाम की
मैं लगा सुहागन हो जाऊं
मैं बंटू तुम्हारे हसी और गम
हर पग पर तुम्हारे साथ चलूं
तुम बन जाओ मेरा हर एक पल
मैं तुम्हारी सुबह और शाम बनु।
मै देखूं तुम में दुनिया अपनी
मैं तुम्हारा दो जहान बनूँ ।
तुम बन जाओ मेरे सातो स्वर
मैं जीवन गीत का सार बनु।
तुम बन जाओ मेरे प्रेम राग
और मैं पिया तेरा अनुराग बन जाऊं।
जिम्मेदारी की डोर को हम
दोनो मिल के थमेंगे
तुम चलना मेहनत की रहो पर
मैं हम सफर तुम्हारी बन जाऊं
मेहँदी पिया के नाम की
मैं लगा सुहागन बन जाऊं।
सोनिया प्रतिभा तानी
जालंधर पंजाब
सावन
मौसम की अंगड़ाई ने ,
दिल को भाव विभोर किया ।
सावन की रिंमझिम बूँदों ने ,
अंग अंग झकझोर दिया ॥
मेंहदी पिया के नाम की ,
मन में अलख जगाती हैं ।
सावन की पुरवाई भी ,
तन में अगन लगाती हैं ॥
विरह वेदना में विरहन को ,
दिखते हैं चहुँ ओर पिया ।
मौसम की अंगड़ाई ने ,
दिल को भाव विभोर किया ।
सावन की रिंमझिम बूँदों ने ,
अंग अंग झकझोर दिया ॥
तन मन बरसे ,
प्रीत रंग के ।
व्याकुल मन तरसे ,
पिया संग के ॥
मेघों की इस अंगड़ाई में ,
लगते है चितचोर पिया ।
मौसम की अंगड़ाई ने ,
दिल को भाव विभोर किया ।
सावन की रिंमझिम बूँदों ने ,
अंग अंग झकझोर दिया ॥
विशाल चतुर्वेदी " उमेश "
जबलपुर मध्यप्रदेश
हरियाली तीज
हरे काँच की चूड़ियाँ मोरी करे कलाई शोर
बरसे मेघा झूम के तू कहाँ रहा रे चितचोर
धानी रंग चुनरी मोरी संग करे मोरे अठखेल
कजरारे नैना मोरे झुक गयो दर्पण देख
हाथ रची मेंहदी है यों ज्यों उगता सूरज भोर
अब तो आओ साजन मोरे हो गई मैं चकोर
बीते माघ,फागुन भी बीते और बीते चैत्र,बैशाख
जेठ ,आषाढ़ में आस लगाये देखूँ मैं तोर बाट
बागन में झूले भी पर गयो आयो श्रावण मास
सब सखी मिल कजरी गाये करे जिया मोरे हिलोर
सोलह श्रृंगार किये चलूँ पूजन हरियाली तीज
फूल,दूब,बेलपत्र ,प्रसाद और हाथ लियो सिंदूर
करूँ आराधना गौरीशंकर की अर्धनारीश्वर रूप
हथ जोड़कर शीश झुकाऊँ अमर सुहाग होय मोर
जो तू आये साजन मोरे पूर्ण होय सब आस
धानी धरा सी मैं रंग जाऊँ है रंग प्रीत का खास
संग मिल दोनों ध्यान लगावें होय जन्मों के साथ
तीज कियो मैं हिया न हारूँ तू आजा साजन मोर
हरे काँच की चूड़ियाँ मोरी करे कलाई शोर
बरसे मेघा झूम के तू कहाँ रहा रे चितचोर।।
कल्याणी झा
गुवाहाटी ,असम
मेहंदी पिया के नाम की
विधा - हाइकू
1.
मेहंदी रची
पिया तेरे नाम की
चटक रंग
2.
मांथे की बिंदी
ये लाल हरी चूड़ी
तेरी निशानी
3.
सजी दुल्हन
पिया नाम मेहंदी
हुई पराई
4.
मेहंदी बिन
श्रृंगार है अधूरा
करते पूरा
5.
मेहंदी बोले
पिया रंग में रंगे
प्रेम प्रतीक ।
भावना गौड़
ग्रेटर नोएडा(उत्तर प्रदेश)
मेरे पिया
जब से मेरे इन हाथों में मेंहदी सजी है
तब से मुझे तेरी ही लगन लगी है
बरसों से जिसे मैंने ख्वाबों में बसाया था
तुमसे मिलकर मैनें वही सब पाया था
हर पल तुम्हारे खयालों में खोई हुई हूँ
खबर नहीं मुझे कि, मैं जागी या सोई हुई हूँ
पानी में मुझे तुम्हारा अक्स नजर आता है
आसमान में भी चांद नही मुझे तू दिखता है
हवा का झोका तुम्हारे स्पर्श का एहसास देता है
उपवन के फूलों में तेरा चेहरा नजर आता है
मेरे इन हाथों पे मेंहदी आज खूब चढ़ी है
पिया से ज्यादा प्यार मिलेगा ये सखी ने कही है
जब से मेरे इन हाथों में..........
तब से मुझे सिर्फ़ तेरी ही.........
मेरे माथे पर बिंदिया तेरे लिए सजी है
मेरी मांग मे सिंदूर तेरे नाम की भरी है
मेरे हाथों में चूड़ियां तेरे लिए चढ़ी हैं
मेरे पैरों में पायल मैनें तेरे लिए पहनी है
गले में मंगलसूत्र तेरे प्यार की निशानी है
मैंने तेरे नाम की, ये सारी जिन्दगानी है
तेरी आंखों से, मैं अब ये दुनियां देखूंगी
तेरे प्यार में मैं अब सब कुछ भुला दूंगी
तेरा साथ पाकर ये जाना दुनियां कितनी हसीं है
ये सुबह, ये शाम, ये रात कितनी रंगीन है
जब से मेरे इन हाथों में..........
तब से मुझे सिर्फ़ तेरी ही.........
अनिल कुमार मिश्रा
कोरबा, छत्तीसगढ़
?????
टूटकर बिखरती मेहंदी,
फिर भी नहीं मिटती है।
छोड़ती मन छाप अपनी,
नाम पिया जब रचती है।
संस्कृति में रची-बसी,
सुहागिन हाथ में महके मेहंदी।
मेहंदी बिन त्यौहार अधूरे,
सावन की हर रीत में मेहंदी।
बहनों के प्रेम में रचती,
भाई की उम्र की दुआ मेहंदी।
पिया नाम रची जब हाथों ,
दुल्हन का सुहाग है मेहंदी।
नारी का स्नेह है मेहंदी,
प्रीत भरी इक आस है मेहंदी।
मेहंदी बिन श्रृंगार अधूरा,
खुशियाँ देती महके मेहंदी।
उत्सव की शान बढ़ाकर,
मेहंदी देती है संदेश यह गहरे।
अपने रंग में रंग लो सबको ,
हटा दो नयनों से घृणा के पहरे।
अनुराधा चौहान'सुधी'
मेंहदी-सजी है बख़ूबी।
कर उपवन न्यारी ,सी सजी है बख़ूबी।
अब पिय हिय प्यारी,ये लगी हैं बख़ूबी।
कर्ण प्रिय धुन मीठी, सी बजी हैं बख़ूबी ।
सज तन चक्षु रातें, ये जगीं हैं बख़ूबी।(१)
पिय मिलन निशा सी,ये थमी हैं बख़ूबी।
रग रग रस डूबी, सो नमी है बख़ूबी।
पिय सूर्य तप की भी,तो कमी है बख़ूबी।
चिपक लिपट धूनी, ये रमी हैं बख़ूबी।(२)
सच्चिदानन्द मौर्य
कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
???
मैं जिस दिन मेहंदी लगाउंगी
पिया तेरे नाम की
उस दिन तेरी हो जाउंगी
पिया तेरे नाम की
उस दिन -------
भाग्य मेरा जुड़ जायेगा तेरे नाम से
सौभाग्यवती कहलाउंगी तेरे नाम से
उस ----------
मैं जिस दिन बिंदिया लगाउंगी
उस दिन तुझको अपना बनाउंगी
उस -----------------
जिस दिन मंगल माला सजाऊंगी
उस दिन बंधन मे तेरे बंध जाउंगी
उस ----------------
मैं जिस दिन चूड़ी सजाऊंगी
उस दिन प्रेम रंग मे तेरे रंग जाउंगी
उस -------------
मैं जिस दिन बिछिया सजाऊंगी
उस दिन तुझको समर्पित हो जाउंगी
उस --------------
मैं जिस दिन गर्भ सजाऊंगी
उस दिन दूसरी दुनिया बनाउंगी
उस ---------
कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "
उत्तरप्रदेश
मेहँदी पिया के नाम की
मैंने लगा ली है आज सखी,
मेहंदी पिया के नाम की।
ऐसा रंग मेहंदी का दीजे,
लगूँ दुल्हनियां मैं श्याम की।।
नाम पिया का लिख दे सखी,
छूटे न उम्रभर मोहर पिया के नाम की।।
आज लगा दे सखी
मेहँदी पिया के नाम की।।
मैं मैं न रहूं,वो वो न रहें
मिल मेहंदी के रंगों में,
एक हो जाये,
मैं अर्धागिनी श्याम की।।
तू ही मेरी पहचान पिया,
आऊँ तेरे द्वार,
ओढ़ चुनरियाँ तेरे नाम की।।
आज बनूँ दुल्हनियाँ,
लगा दे मेहंदी आज सखी,
पिया के नाम की।।
गीतांजली वार्ष्णेय "सूर्यान्जली'
बरेली उ.प्रदेश
सजना है
मेरे साजन आने वाला है
मुझे सजना के लिए सजना है
चूड़ी कंगना पहनना है
माथ में बिंदिया लगाना है
पिया के नाम की मेहंदी
हाथों में अब तो लगाना है ।
अब तो पायल खन खानी है
चूड़ियाँ अबतो बजानीहै
सजना को सज के दिखानी है
मेहंदी की लाली बतानी है
पिया के नाम की मेहंदी
हाथों मे अब तो लगानी है।
बहुत दिन हो गए तुम्हें गए
अब तुआने वाला है
मेरे लिए साड़ी लहंगा
गहना लाने वाला है
मुझे पिया के लिए सजना सवरना है
पिया के नाम की मेहंदी
हाथों में अब तो लगानीहै ।
जब हम तुम मिलेंगे
बीते दिनों को याद करेंगे
ओ नदी का किनारा
ओ बागों में घूमना
सावन के झूला झूलना
पिया को याद दिलाना है
पिया के नाम की मेहंदी
हाथों में अब तो लगानी है।
महेत्तर लाल देवांगन
बिलाईगढ़ छत्तीसगढ़
बनी दुल्हन मैं कुछ न बोली
बनी दुल्हन मैं कुछ न बोली
चुनरी ओढ़ाई
काजल लाली
कंगन बिंदी बाली
मंद मंद मुस्काई
*पिया नाम* से मेहंदी वाली
हथेलियां सजाई
साखियों की ठिठोली..
बनी दुल्हन मैं कुछ न बोली...
रस्मों के घेरे
सात वचन
सात फेरे
परिवार नाते रिश्तेदार
कुछ तेरे कुछ मेरे
बजती धीमी शहनाई
उठने लगी डोली
*बनी दुल्हन मैं कुछ न बोली…
फूल बिखराती
खिल बताशे लुटाती
बचपन बिसराती
तुलसी निहारती
देहरी पर लगा
छाप मेंहदी वाली
मात-पिता की लाडली..
भाई के काँधे रख सर, ज़रा सा रो ली..
*दुल्हन बन चली मैं कुछ न बोली..*
चली आई पिया मैं घर तेरे
संजो लाई कुछ यादें
कुछ सपनें अधूरे..
दिल में धक धक
नयनों में चमक
ससुराल की दहलीज़
पर देखी अरमानों की रंगोली
*रचा लाई पिया मेहंदी तेरे नाम की*
*सात जन्मों के लिए बस तेरी हो ली..*
*दुल्हन बनी मैं कुछ न बोली..*
नरेश चावला ‘स्नेहदिल’
जोधपुर- राजस्थान
मेहंदी पिया के नाम की !
मेहंदी पिया के नाम की !
रचना रचली श्याम की !
नदिया पनघट उपवन
वह गोरी उस गाम की !
सर्वस्व लुटा देख लिया
बिकी गोरी बिन दाम की !
प्रिय संग प्रेम लगा जब से
हो गई वृंदावन धाम की !
सुमन सुरभि श्रंगार दर्पण
बिना श्याम किस काम की !
राह निहारे निशदिन कान्हा
तनिक फुर्सत नहीं विश्राम की !
रात घनेरी छा गई मनमोहन
प्रतिक्षा शेष उस दिनमान की !
रमेश चंद्र शर्मा
16 कृष्णा नगर इंदौर
सुन पिया देशभक्त
जब-जब रचाती हूँ मेहंदी से मैं दोनों हाथ अपने,
सुन पिया तुझसे मेरी ये मोहब्बत बढ़ती जाती है|
जब सूखती है मेहंदी लगने के बाद मेरे हाथों में,
सुन पिया तेरी उल्फत देख “मीन” मुस्कुराती है|
जब चढ़ता है सुर्ख रंग मेरी मेहंदी का मेरे हाथों में,
सुन पिया तेरी चाहत धड़कनों पर चढ़ती जाती है|
मेरी सखियाँ छेड़ती हैं मुझे रंग देख मेरी मेहंदी का,
सुन पिया उनकी छेड़खानी मेरे दिल को गुदगुदाती हैं|
बैठ फिर तन्हाई में, मैं देखती हूँ रंग अपनी मेहंदी का,
सुन पिया तेरे प्रेम की हद भी ये मेहंदी मुझे बताती है|
अपने हथेली में लिखती हूँ हर बार नाम तेरा मेहंदी से,
सुन पिया हथेलियों को अपने चेहरे पर जब लगाती हूँ|
उसकी खुशबू में भूल जाती हूँ अक्सर इस दुनिया को,
सुन पिया संग न होकर भी तुझे मैं संग अपने पाती हूँ|
सरहद पर तुम खड़े हो, देश की सेवा के लिए बेशक,
सुन पिया मैं करवा चौथ रख तुझे चाँद में देख पाती हूँ|
करती हूँ रोज मन वचन से यही प्रार्थना अपने ईश्वर से,
सुन पिया तेरी लम्बी उम्र की दुआ मैं हर रोज मनाती हूँ|
बड़ा मुश्किल है ये जीवन देशभक्त का ये समझती हूँ मैं,
सुन पिया तेरी देशभक्ति व प्रेम को नित शीश झुकाती हूँ|
मीना सिंह “मीन”
नई दिल्ली
????
मेरे मनभावन मेरे नाथ श्याम की
लगाई मैंने मेहँदी पिया के नाम की..
ये सावन का मौसम और बारिशें
अनगिनत ही जगाती हैं ख्वाहिशें
बूंद बारिश की और बूटे मेहंदी के
साजन से करें बहुत सी सिफारिशें
फरमाइशें थी बस प्रीत के ज़ाम की
लगाई मैंने मेहँदी पिया के नाम की..
प्यार का रंग खूब गहरा चढ़ा
हिना की लाली पे पहरा चढ़ा
ढूँढों नाम अपना मेरे हाथों पे
हथेली पे तेरा ही चेहरा चढ़ा
मन में उठती कसक प्रेम की
हिना में राहें देखूँ प्रिय धाम की
लगाई है मेहँदी पिया के नाम की..
मन मोह लेती हिना की महक
देह से रुह भी तो उठती चहक
एहसासों से सजती है आत्मा
अरमान दिल के जाते हैं दहक
समाँ बोल उठता ये मुझसे सखे
भावनायें प्रबल हैं प्रिय काम की
लगाई है मेहँदी पिया के नाम की..
अनामिका वैश्य आईना
लखनऊ
मेहँदी
मेहँदी प्रेम-प्रतीक परिणय की,
अपना गहरा रंग बिखराने वाली
अपनीं हथेली पर बाबुल-डाल की,
मेहँदी की लाली से ससुराल सजानेवाली।
अपनें योग्यता और ज्ञान के दर्पण से,
पीहर को भी है मान दिलवानेवाली।
उस बेटी-वधु के सुन्दर हाँथों की शोभा,
गहरी लाल 'मेहँदी है पिया के नाम की'रचनेवाली
अपनें पीहर की वो लाड़ली बिटिया,
दोंनों कुल का होती मान बढ़ाने वाली।
बाबुल की बगिया की पुष्प है बेटी,
ससुराल को होती स्वर्ग बनाने वाली।
सुन्दर गुण-ज्ञान से सुसज्जित बिटिया,
तेरे हांथों की मेहँदी में है गहरी लाली।
तेरे सुन्दर आचरण के गहरे रंगों से सजी,
तेरे हाथों में "मेहंदी है पिया के नाम की रचनेवाली।
जिसनें संस्कार और सच्चें -प्रेम की,
गले में अनमोल सी माला डाली ।
उसकी बेटी के हाँथों में मेहँदी के,
लाल रंग जीवन में गहरी उतरने वाली।
तेरे जीवन में बिखरेंगी खुशियाँ ,
परिवार में होगी तेरे खुशहाली।
तेरा मान-सम्मान भी कायम होगा,
आँखों में चमकेगी चमक सितारोंवाली।
माँ की आँखों में खुशी के आँसू होंगें,
बस विदाई और बिछड़ने वाली।
नयें सुख का सृजन करना तुम ।
रंग गहरा होगा आएगी हाँथों में लाली,
तुम तो अपनें जीवन की बगिया को,
सुन्दर फुलों से सजानेवाली माली।
सबकों अपने रंग में रंग लेना तुम
तेरे हाँथों में,"मेहंदी है,
पिया के नाम की रचनेवाली"।
शशिलता पाण्डेय
मेंहदी पिया के नाम की
नारी भी भावनाएं , मन के भाव से बताने का प्रयास
दिल में जागे अरमा
मेंहदी रचाऊं
अपने हाथाे में
उनके नाम की
जाे मेरी हर धडकन में
बसे है मेरे सजना ।।
प्रिया से मिलने की अगन
जगाती अलग ही एहसास
मेंहदी की सजावट में
नजर आते वे ही वे
चुमती मैं भी
मेरे हाथाे काे बार बार ।।
उनकी हर अदा मतवाली
मिलते जब
भर देते खुशीयाें से मेरी झाेली
नयनाे से बात करते
बडे अदब से वे
हाे जाती जब मैं उन पर
वारी - वारी
यही साेचकर
इनकी बात ही न्यारी ।।
रची हुईं मेंहदी के हाथाे से
जब भी ढकती मैं मेरा मुखडा
वाे मुस्कराते हुए
चुमते मेरे हाथाे काे
जब मेंहदी का असर
हुआ उन पर
यह लगता मुझे जरा - जरा ।।
मेंहदी ताे एक बहाना
सजना ने बना लिया
मेरे दिल के मंदिर में
एक विशाल ठिकाना
मेंहदी रचे या न रचे
सजना के बांहाे के
झुले में ही
पाते हम
प्यार ही प्यार से भरे
खुशियों का खजाना ।।
सतीश लाखाेटिया
नागपुर ( महाराष्ट्र)
मेहंदी
मेहंदी पिया के नाम की
जब मैंने लगाई।
प्रेम रंग में रंग गई मैं
फिर सो न पाई।
रंग मेहंदी का देख के
मैं फूली न समाई
ईश्वर धन्य तेरा है
मेहंदी पक्की खूब लगाई।
लोग कहें मेहंदी को तककर
तू प्रियतम की प्यारी
लाज से मैं लाल हो गई
देख हथेली न्यारी।
अब यह रंग जाने न दूँगी
मन में ठान लिया है
सबसे सुंदर सबसे न्यारा
मेरा प्यारा पिया है।
गजेंद्र कुमार घोगरे
वाशिम (महा)
मेहन्दी मुख्य शृंगार"
मैं ही भारत की नारी हूँ,
भारत की रीत निभाती हूँ।
मैं ही संस्कृति की धारा हूँ,
मैं राष्ट्र गौरव बढ़ाती हूँ।
मैं जीवन सकल सत्कार हूँ,
मैं मर्यादा का संस्कार हूँ।
मैं श्रेष्ठ नखशिख शृंगार हूँ,
मैं दाम्पत्य सुख आधार हूँ।
फूलों से सजवाती वैणी,
प्रेम रूप शृंगार त्रिवेणी।
मांग में है मंगल सिंदूर ,
प्रिया का प्रेम बढ़ाएँ नूर।
बिंदिया मस्तिष्क की शोभा,
नयनों को संवारे सूरमा।
नाक की नथनी नाथ भाएँ,
अधर लाली साजन लुभाएँ।
कण्ठ मंगलसूत्र हृदय हार,
प्रिया तुम संग जीवन बहार।
करधनी कटि रजत आभूषण,
हाथ कंगन प्रेम धुन प्रतिक्षण।
प्रिया नाम मेहन्दी प्यारी,
अनुरागी चितवन है न्यारी।
पैर में पायल प्रीति प्रगाढ़,
विश्व उमंग विवाह वर्ष गाँठ।
मेहन्दी निज शृंगार प्रमुख,
प्रियतम से पाएँ हम सब सुख
प्रेम डोर बन्धी प्रिया संग,
हाथ में आएँ गहरा रंग।
सावन हर्ष मेरा अंग अंग,
गगन में उड़ती प्रेम पतंग।
किशनलाल जांगिड़़
जोधपुर राजस्थान
जग तज के आयी हूँ
तेरे नाम की मेहंदी,
रचा के आयी हूँ!
पिया तेरे ही लिये,
जग तज के आयी हूँ!!
दुनिया के रस्मों को,
निभा के आयी हूँ!
तेरे नाम का कुमकुम,
सजा के आयी हूँ!!
कुछ ख़्वाब आँखों में,
मैं भर के आयी हूँ!
कुछ आस तुझसे भी,
लगा के आयी हूँ!
पिया घूंघट जो सर पे,
मैं ले के आयी हूँ!
मान तेरा मैं,
बढ़ाने आयी हूँ!
सम्मान मैं तेरा,
जो बनके आयी हूँ!
दायित्व कंधे पर,
संग ले के आयी हूँ!!
तेरे नाम के संग,
जो नाम जोड़ा है!
उस नाम के सदके,
डोली चढ़ के आयी हूँ!!
शिल्पी शहडोली
शहडोल, मध्यप्रदेश।
मेंहदी पिया के नाम की
जीवन है सब तुम्हारा, और मैं मेरे यार की !
सदियों तलक रहेगी याद, मेंहदी तेरे प्यार की !
1- अंखियो में कजरा सारा, और भरी है मांग प्यार की !
सैंया गए सेना में और याद आये यार की ! माथे पै बिंदिया लाल है, शोभा मेरे भरतार की !
सदियों तलक रहेगी याद, मेंहदी तेरे प्यार की !
2- सूआ सी नाक चांद सी, सूरत भी आपके लिए ! रुनझुन की धुन भी कर रही, पायलिया आपके लिए !
इन्तजार में मेंहदी मेरी, पागल है आपके लिए !
गर साथ तुम्हारा रहे, मेंहदी चिरायु प्यार की !
सदियों तलक रहेगी याद, मेंहदी तेरे प्यार की !
3- आंखों का तारा होने से, आखें भी चार हो गई !
आंखें बिछा दी ( आंखों में) रात काटूँ, ऐसी बात हो गई !
उदास देखे पिया आंख , मेरी आज भर गयीं !
पूजा है मेरी पिया की, सातों ही वार की !
सदियों तलक रहेगी याद, मेंहदी तेरे प्यार की !
4- मेंहदी कंगन रोली कोई, श्रंगार नहीं है !
रक्षाबंधन और दूज भी, त्यौहार नहीं है !
वो सूने घर जहाँ बेटी, अवतार नहीं है !
मेंहदी मेरी सैंया को है सोने के हार की !
सदियों तलक रहेगी याद, मेंहदी तेरे प्यार की !!
जगदीश "बेजान"
भरतपुर
डिजाईनर मेहंदी
-"अरे प्रियांशी, क्या कर रही हो?"
-"कुछ नहीं, वर्क फ्रॉम होम...फाइल-वर्क ही निपटा रही हूँ । कुछ काम था क्या?"
-"अरे,आज तो करवा-चौथ है ना ! सारी तैयारी हो गयी?"
-"हाँ मीनल, साड़ी, चूडियाँ, मिठाई, पूजा का सामान...ये सब तो खरीद लिया मगर मेहंदी का क्या करूँ, कुछ समझ नहीं आ रहा ! मुझे तो मेहंदी लगाने आती नहीं और मॉल में भी मेहंदी लगाने वाले के पास एडवांस बुकिंग फुल हो गयी है, कोरोना के चलते वो ज्यादा अपॉइमेंट भी नहीं ले रहे !!
"आस-पड़ौस में कोई नहीं है क्या तुम्हारे, जो मेहंदी लगा दे?"- मीनल ने पूछा।
-" नहीं यार, अभी तो शिफ्ट हुए हैं इस फ्लैट में, कोई जानकार भी नहीं है जिसको बोल सकूं।"
-" कोई बात नहीं प्रियांशी, इस बार खुद ही लगाने का ट्राई करना, इसी बहाने तुम भी सीख जाओगी।"
-हाँ..चलो यार, देखती हूँ, क्या सीन रहता है, मेहंदी को लेकर । ओके बाय..."
आज करवा-चौथ था । प्रियांशी ने व्रत का खाना बनाया, चांद निकलने पर प्रतीक के साथ पूजा की, बचा हुआ काम निपटाया और आख़िर में मेहंदी लगाने बैठी, पहले ही लगा लेती तो घर के सारे काम कैसे होते?
प्रतीक को तो खाना बनाना आता नहीं था, कोरोना के चलते बाहर खाना भी अवॉइड कर रखा था उन्होंने ।
सारे काम-काज से फ्री होकर फिर तसल्ली से बैठकर प्रियांशी ने "क्या बनाऊं??" सोचते हुए नेट से बहुत सारी मेहंदी डिजाइन देखी और उनमें से एक को पसंद कर कोन चलाना शुरू किया मगर यह क्या !
फूल पत्ती की डिज़ाइन पता नहीं किस देश के आड़े-टेढ़े नक़्शे में तब्दील हो गयी थी उससे !!
आखिर में कुछ सोचते हुए उसने अपनी हथेली पर एक करवा और बिंदी बनायी, नीचे प्रतीक का नाम लिखा, फोटो ली और उसे "मेहंदी पिया के नाम की" केप्शन के साथ प्रतीक के मोबाइल पर सेंड कर दी।
उधर से प्रतीक ने स्माइली के साथ हार्ट वाली इमोजी और 'लॉट्स आॅफ लव स्वीटहार्ट' का मैसेज भेजा।
फिर मुस्कुराते हुए बेडरूम से बाहर आया और प्रियांशी को अपने आगोश में ले लिया।
प्रियांशी के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी ।
उसका सुहाग हमेशा सलामत रहे, मेहंदी तो मेहंदी ही होती है, पिया के नाम की...चाहे कैसी भी लगाई हो, डिजाइनर मेहंदी अगले करवा-चौथ पर लगवा लेगी वो !"- सोचती हुई प्रियांशी प्रतीक की आँखों में देखती हुई संतुष्ट भाव से मुस्कुरा दी।
सुषमा सिंह चुण्डावत
उदयपुर, राजस्थान
मेहंदी पिया के नाम की
मेहंदी पिया के नाम की
सुन री सखी
मैंने रची है आज
मेहंदी पिया के नाम की
आएंगे लेने पिया
सावन के बहार में
डोली चढ़ जाऊंगी
पिया के घर द्वार में
सुंदरता का प्रतीक है ये
सुहाग की है निशानी
बात सुनी है ये हमने
हर औरतों की जुबानी
मेहंदी में बसा है प्यार हमारा
सावन का त्यौवहार है प्यारा
मेहंदी की रस्म अनोखी
लगते सब एक दूजे के देखी
अंग-अंग महके
पिया के इंतजार में
कितना मजा है
प्यार के इस त्यौवहार में
मेहंदी जैसे हाथ में
रमती है गोरी के साथ में
मैं पिया संग रम जाऊँगी
हर त्यौवहार में पिया के
नाम की मेहंदी सजाऊँगी
प्यार हमारा बढ़ता रहेगा
ज्यों-ज्यों बढ़ती
मेहंदी की लाली
पिया को रिझाऊँगी
झुमका कंगन बाली से
स्वागत करूँगी उनका
अपने होठों की लाली से
हर बरस पिया के नाम से
मेहंदी मैं सजाऊँगी
मेहंदी पिया के नाम की
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
कलकत्ता
मेहँदी पिया के नाम की
नाम पिया का हाँथो में सजाऊँ,
मेहँदी मैं तेरे नाम की लगाऊँ।
कहूँ न कुछ भी मैं लफ़्ज़ों से,
सारी बातें आँखों से बताऊँ।।
हरी चूड़ियाँ सावन के झूले,
हाँथों में रंग मेहंदी का फूले।
सखियाँ भी देखो मुझको छेड़ें,
छिपा नाम तेरा मेहँदी में ढूंढे।।
पिया के नाम की मैं मेहँदी लगाऊँ,
तीज,करवा, सब तेरे संग मनाऊँ।
आ तुझ पर मैं जीवन निसार दूँ,
हाँथों में हाँथ हो और तुझे प्यार दूँ।।
शहनाज़ बानो
चित्रकूट उ०प्र०
पिया मिलन
आज कर लूं मैं सोलह श्रृंगार,
उनको रिझा लूं ,फिर एक बार,
बिंदी, चूडी, टीका,गले का हार,
सब चीजें कर लूँ तैयार।
सखी बागों से फूल तोड़ लाना,
फिर सुंदर सा गजरा बनाना,
साथ मे रचनी मेंहदी भी लाना,
पी का नाम हथेली पे लिख जाना।
उनके नाम से जुड़ा है मेरा नाम,
मैं सीता बनूँ, वो बने मेरे राम,
सिर्फ मेंहदी मे नहीं, मेरे मन मे,
दिल मे हमेशा रहे उनका नाम।
सिर्फ मैं ही नहीं,वो भी समझे मुझे,
प्यार से अपने वश मे कर लें मुझे,
मान सम्मान दोनों का ही बना रहे,
हमारे प्रेम का वृक्ष सदा घना रहे।
सना
(दिल्ली)
मेंहदी तेरे नाम की
मेरे हाथों में सजी यह मेंहदी
बालमा लिखा इसमें नाम तेरा है
भिगी - भिगी पलके मेरी
तू आजा जल्दी पैगाम मेरा है।
किसको सुनाऊँ दिल की बात
तेरे बिन सिसकियों में शाम - सवेरा है।
मेरे हाथों में सजी यह मेंहदी,
बालमा लिखा इसमें नाम तेरा है।
देख रही हर घड़ी तेरी तस्वीर
तुझसे दूर मेरा अंजान बसेरा है।
मेरे हाथों में सजी यह मेंहदी
बालमा लिखा इसमें नाम तेरा है।
चाँद संग बिलखती हूँ, तारों संग इठलाती,
किस ठौर चलु, तेरे बिन यहाँ अंधेरा है।
मेरे हाथों में सजी यह मेंहदी
बालमा लिखा इसमें नाम तेरा है।
सूख रही यह पल - पल मेंहदी
मेरे लब्जों ने गीत राधा - श्याम उकेरा है।
मेरे हाथों में सजी यह मेंहदी
बालमा लिखा इसमें नाम तेरा है।
श्री कमल कालु दहिया
जोधपुर, राजस्थान
kaludahiya082001@gmail.com
मैं बावरी
आज बाद मुद्दत के ये घड़ी आयी
वो पिया मेरे मैं उनकी होने को आई।
सुन सखी आज मेहँदी उनके नाम की
मेरे हाथों मे रचने को आई
मैं बावरी सी हो रही,
कभी ख़यालो में खो कर उसके,
बेखयाली मे खो रही।
नाम लिखूं मेहँदी से हाथों मे उनका,
या कैद उनको इस दिल मे करूँ।
आज नही दिल अब बस मे मेरा।
सखी आ ,अब मेहँदी इन हाथों में लगा।
अर्चना पन्त(आर्ची)
लखनऊ उत्तर प्रदेश।
मेरे पिया
लाली है सुबह की
,सिंदूरी है शाम की
मेरे हाथो मे लगी है
मेंहदी पिया के नाम की
सांसो मे प्रेम घुला है
स्नेह दौडता धडकन मे
जिनकी मनभावन छवि है
मेरे मन के दरपन मे
जैसे चित्र बसा हुआ हो
राधा मे घनश्याम की
मेरे हाथो मे लगी है
मेंहदी पिया के नाम की
उसके बिना सूना सूना
मेरा ये जीवन है
आग बरसाता जैसे
रिमझिम सावन है
साजन के सिवाय इस जग मे
नही कोई मेरे काम की
मेरे हाथो में लगी है
मेंहदी पिया के नाम की
श्रीमती सुनीता साहू
विकासखंड बिलाईगढ़
जिला बलौदा बाजार
राज्य छत्तीसगढ़
मेहंदी रचे हाथ, सजन के साथ
'मेंहदी से रचे हाथ उन्हें इस कदर भाते हैं
शायद ये पहले स्पर्श की याद दिलाते हैं'
मेंहदी से रची इन सुर्ख हथेलियों से ही
हाँं!.......इन्हीं से तो शुरू की थी
तुम्हारे साथ एक नई जिंदगी
सबसे पहले शगुन की मेंहदी जो
तुम्हारे ही नाम की रचाई थी मैंने
और उस दिन से मेंहदी की रात तक
एक एक दिन तुम्हारे नाम के सहारे
मन ही मन मुस्कुराते हुए हैं गुज़ारे!
मेंहदी की लाली याद दिलाती रहती
कि तुम अब साथ हो मेरे हर पल
मेरी सांसों में है अब तुम्हारे ही
नाम की खुशबू वो, हर घड़ी,पल-पल!
विवाह सूत्र बंधन में भी तो तुम्हारे
हाथों ने थामे सबसे पहले यही
मेंहदी से रचे सुर्ख लाल हाथ
और हम हो गए हमेशा-हमेशा के लिए
एक-दूसरे के,थामे हाथों में हाथ!
विदाई के वक्त इन्हीं मेंहदी वाले हाथों से मेंहदी की थाप द्वार पर लगा अपनी निशानी के रूप में,...छोड़कर दहलीज मायके की,
अपना पहला कदम रखा मैंने तुम्हारे घर की दहलीज मे........तुम्हारे साथ,
मेंहदी वाले इन्हीं हाथों में लिए तुम्हारा हाथ !
कुलदेवपूजन हो या चरणस्पर्श
या कंगने-अंगूठी की रस्म परंपरा
मेंहदी की रंगत लिए हाथों ने
इस जीवन में इंद्रधनुषी रंग भरा!
सौभाग्य रात्रि में प्रथम मिलन की
मधुर बेला में भी तो साक्षी रही
इन हाथों की सुर्ख मेहंदी यही,
सुहागसेज पर सिंदूरी आभा बिखेरती
मेंहदी से रची ये हथेलियां मेरी!
और फिर बढ़कर जो थामा हाथ तुमने वो
मेंहदी की लाली अचानक गालों पर आ गई
उस प्रणय निशा पर ज्यों सुर्खी सी छा गई
हथेलियों से सीधे उतर आई मेरी जिंदगी में
वो मेंहदी की महक मेरा जीवन महका गई!
बदल गई यूं जिंदगी हो गई सिन्दूरी सुबह जैसे
तुम्हारे नाम की मेंहदी मेरे तन-मन में समा गई...........!!

बहुत सुंदर संकलन
ReplyDeleteअच्छा संकलन
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