दर्द किसान का: दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
19 जुलाई 2020 को आयोजित प्रतियोगिता में श्रेष्ठ चुनी गई रचना
चीर कर घरती का सीना
बोता है जो अपना पसीना
और पैदा करता है नगीना
खुद रह कर के भूखा जो
दूसरे का पेट भरता है
वह किसान कहलाता है
कभी सूखा तो कभी बाढ़
इस तरह प्रकृति की मार
कभी नीलगाय तो कभी
बंदरों के अत्याचार सहता है
फिर भी उफ नहीं कहता है
वह साहसी किसान कहलाता है
सर्दी गर्मी या हो बरसात
करता रहता काम दिनरात
हो अगर कड़कड़ाती ठंड
या चिलचिलाती धूप प्रचंड
मिलता नहीं उसे कभी आराम
वह इंसान किसान कहलाता है
बीवी के तन पर कोई वस्त्र नहीं
लड़ने के लिए अस्त्र-शस्त्र नहीं
माँ के लिए कोई दवा-दारू नहीं
बाप के लिए टूटा चश्मा भी नहीं
ऐसे हो जिसके हालात यहाँ पर
वह बेचारा किसान कहलाता है
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
कलकत्ता
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