वो किसान है: सुनील गुप्ता 'श्वेत'
19 जुलाई 2020 को आयोजित प्रतियोगिता में उत्तम चुनी गई रचना
"नहीं हम बीज, अपना खूं-पसीना डाल देते हैं.
धरा को सींचकर, उससे फसल निकाल देते हैं.
नहीं कीमत हमें मिलती है उतनी जितनी की मेहनत,
मगर फिर भी हम लाखों का पेट पाल देते हैं."
जिसका पसीना करता माटी का सम्मान है,
वो किसान है...
अन्नदाता होने का जिसको वरदान है,
वो किसान है...
कभी समाज, कभी प्रकृति की मार झेलता है.
फिर भी खेतों में अपनी किस्मत से खेलता है.
न थकता, न हार मानता, कैसा इन्सान है,
ये जो किसान है...
मेहनत की हर पराकाष्ठा को पार कर जाते हैं,
उचित मूल्य अपनी फसलों का फिर भी न पाते हैं.
अपनी फसल के असली मूल्य से जो अन्जान हैं,
ये जो किसान है...
संग अपनी फसलों के ये कर्ज भी बोते हैं,
कर्ज न चुका पाते तो ये फंदों पर भी होते हैं.
कभी कभी ये टूट जाते हैं, पर बलवान हैं.
ये जो किसान हैं...
इनके व्यथा की कथा सुना रहा हूँ ताकि तुम समझो,
अपने जैसे ही हैं, उनको तुम अपना समझो.
वो भी मेरे तुम्हारे जैसे ही इन्सान हैं...
ये जो किसान हैं...
सुनील गुप्ता 'श्वेत'
मोहाली, पंजाब
जन्मस्थान - आयोध्या जी
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