प्रतियोगिता #08- शिल्पी शहडोली

जग तज के आयी हूँ


तेरे नाम की मेहंदी,

रचा के आयी हूँ!

पिया तेरे ही लिये,

जग तज के आयी हूँ!!

दुनिया के रस्मों को,

निभा के आयी हूँ!

तेरे नाम का कुमकुम,

सजा के आयी हूँ!!

कुछ ख़्वाब आँखों में,

मैं भर के आयी हूँ!

कुछ आस तुझसे भी,

लगा के आयी हूँ!

पिया घूंघट जो सर पे,

मैं ले के आयी हूँ!

मान तेरा मैं,

बढ़ाने आयी हूँ!

सम्मान मैं तेरा,

जो बनके आयी हूँ!

दायित्व कंधे पर,

संग ले के आयी हूँ!!

तेरे नाम के संग,

जो नाम जोड़ा है!

उस नाम के सदके,

डोली चढ़ के आयी हूँ!!


शिल्पी शहडोली

शहडोल, मध्यप्रदेश।

Comments

Popular posts from this blog

प्रतियोगिता #08: गजेंद्र कुमार घोगरे

प्रतियोगिता #08- गीतांजली वार्ष्णेय “सूर्यान्जली’

प्रतिध्वनि समूह प्रतियोगिता #9: अनमोल पाती भाई/ बहन के नाम