प्रतियोगिता #08- जया वैष्णव
मेहंदी पिया के नाम की
विधा - काव्य
लाल रंग की मेहंदी में दुल्हन
कितनी सुन्दर लगती है
उसके हाथों की मेंहदी
ना जाने कितने ख्वाब बुनती है
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
मेहंदी में उसके छिपा होता है
अपने साजन का नाम कहीं
लाल गहरा रंग मेहंदी का उसके
दर्शाता है अटूट प्रेम पिया का
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
जितना गाढ़ा रंग है मेहंदी का
उतना गाढ़ा तेरा और मेरा
रिश्ता उम्र भर रहे पिया
मेहंदी तो छोड़ देती है अपना रंग
तुम्हारे प्रेम का रंग ना छूटे पिया
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
तुम्हारे होने से ही खिल जाती है मेहंदी
बाबुल के घर को मैं छोड़ आती हूं
मेहंदी का लाल रंग बाबुल के आंगन में
मेरी याद बन कर रह जाता है पिया
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
कुमकुम लगे पैरों से मैने
मेहंदी रचे हाथों से मैने
गृह प्रवेश किया है पिया
सबके दिलों में मेहंदी की तरह
अपनी प्रेम की छाप छोड़ दूंगी पिया
मेहंदी रचाई है पिया के नाम की
जया वैष्णव
जोधपुर राजस्थान
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