प्रतियोगिता #08: अनामिका वैश्य आईना

लगाई मैंने मेहँदी


मेरे मनभावन मेरे नाथ श्याम की

लगाई मैंने मेहँदी पिया के नाम की..


ये सावन का मौसम और बारिशें

अनगिनत ही जगाती हैं ख्वाहिशें

बूंद बारिश की और बूटे मेहंदी के

साजन से करें बहुत सी सिफारिशें

फरमाइशें थी बस प्रीत के ज़ाम की

लगाई मैंने मेहँदी पिया के नाम की..


प्यार का रंग खूब गहरा चढ़ा

हिना की लाली पे पहरा चढ़ा

ढूँढों नाम अपना मेरे हाथों पे

हथेली पे तेरा ही चेहरा चढ़ा

मन में उठती कसक प्रेम की

हिना में राहें देखूँ प्रिय धाम की

लगाई है मेहँदी पिया के नाम की..


मन मोह लेती हिना की महक

देह से रुह भी तो उठती चहक

एहसासों से सजती है आत्मा

अरमान दिल के जाते हैं दहक

समाँ बोल उठता ये मुझसे सखे

भावनायें प्रबल हैं प्रिय काम की

लगाई है मेहँदी पिया के नाम की..


अनामिका वैश्य आईना

लखनऊ

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