प्रतियोगिता #08: मीना सिंह “मीन”

सुन पिया देशभक्त



जब-जब रचाती हूँ मेहंदी से मैं दोनों हाथ अपने,

सुन पिया तुझसे मेरी ये मोहब्बत बढ़ती जाती है|


जब सूखती है मेहंदी लगने के बाद मेरे हाथों में,

सुन पिया तेरी उल्फत देख “मीन” मुस्कुराती है|


जब चढ़ता है सुर्ख रंग मेरी मेहंदी का मेरे हाथों में,

सुन पिया तेरी चाहत धड़कनों पर चढ़ती जाती है|


मेरी सखियाँ छेड़ती हैं मुझे रंग देख मेरी मेहंदी का,

सुन पिया उनकी छेड़खानी मेरे दिल को गुदगुदाती हैं|


बैठ फिर तन्हाई में, मैं देखती हूँ रंग अपनी मेहंदी का,

सुन पिया तेरे प्रेम की हद भी ये मेहंदी मुझे बताती है|


अपने हथेली में लिखती हूँ हर बार नाम तेरा मेहंदी से,

सुन पिया हथेलियों को अपने चेहरे पर जब लगाती हूँ|


उसकी खुशबू में भूल जाती हूँ अक्सर इस दुनिया को,

सुन पिया संग न होकर भी तुझे मैं संग अपने पाती हूँ|


सरहद पर तुम खड़े हो, देश की सेवा के लिए बेशक,

सुन पिया मैं करवा चौथ रख तुझे चाँद में देख पाती हूँ|


करती हूँ रोज मन वचन से यही प्रार्थना अपने ईश्वर से,

सुन पिया तेरी लम्बी उम्र की दुआ मैं हर रोज मनाती हूँ|


बड़ा मुश्किल है ये जीवन देशभक्त का ये समझती हूँ मैं,

सुन पिया तेरी देशभक्ति व प्रेम को नित शीश झुकाती हूँ|


मीना सिंह “मीन”

नई दिल्ली

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