प्रतियोगिता #08: सना

पिया मिलन


आज कर लूं मैं सोलह श्रृंगार,

उनको रिझा लूं ,फिर एक बार,

बिंदी, चूडी, टीका,गले का हार,

सब चीजें कर लूँ तैयार।

सखी बागों से फूल तोड़ लाना,

फिर सुंदर सा गजरा बनाना,

साथ मे रचनी मेंहदी भी लाना,

पी का नाम हथेली पे लिख जाना।

उनके नाम से जुड़ा है मेरा नाम,

मैं सीता बनूँ, वो बने मेरे राम,

सिर्फ मेंहदी मे नहीं, मेरे मन मे,

दिल मे हमेशा रहे उनका नाम।

सिर्फ मैं ही नहीं,वो भी समझे मुझे,

प्यार से अपने वश मे कर लें मुझे,

मान सम्मान दोनों का ही बना रहे,

हमारे प्रेम का वृक्ष सदा घना रहे।


सना

(दिल्ली)

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