प्रतिध्वनि प्रतियोगिता #10: हे कृष्ण कहो, कब आओगे?
प्रतिध्वनि साहित्य समूह प्रतियोगिता # 10
दिनांक - 09 अगस्त 2020
दिन - रविवार
विषय - हे कृष्ण कहो,कब आओगे ?
विधा - मुक्त
1. हे कृष्ण कहो , कब आओगे ?
मोरमुकुट मुरलीवाले ,
माखन - मिश्री खानेवाले ,
यमुना तट रास रचानेवाले ,
प्रेमानंद बरसाने वाले ।
फिर से इस भारत भूमि पर ,
हे कृष्ण कहो , कब आओगे........?
अघा बका शकटासुर मारे ,
पूतना कुब्जा को भी तारे ,
गोवर्धन गिरिराज को धारे ,
ग्वाल बाल जनता के प्यारे ।
आज भी करते इंतजार हैं ,
हे कृष्ण कहो , कब आओगे........?
मामा कंस को मारनेवाले ,
जरासंध से भागने वाले ,
कष्टों से नित जूझने वाले ,
द्वारिकापुरी बसाने वाले ।
मित्र सुदामा से मिलने को ,
हे कृष्ण कहो , कब आओगे........?
अर्जुन का रथ हाँकने वाले ,
पांचजन्य शंख फूँकने वाले ,
गीता ज्ञान सुनाने वाले ,
सुदर्शन चक्र चलाने वाले ।
सबके तारणहार प्रभुजी ,
हे कृष्ण कहो , कब आओगे........?
धर्म न्याय बिक रहा देश में ,
साधु सज्जन धेनु क्लेश मे ,
घूमते दुश्मन छद्म वेष मे ,
पाप का अंत करो निमेष मे ।
कोरोना से हमे बचाने ,
हे कृष्ण कहो , कब आओगे........?
लीलाधर कुम्हार
( मौलिक एवं स्वरचित )
बलौदा बाजार
छत्तीसगढ़
2. ओ मनमोहन
कृष्ण कन्हैया, मुरली बजैया,
ओ गोपियन के रास रसैया,
ओ मनमोहन, कान्हा प्यारे,
पीड़ बड़ी हरो कष्ट हमारे।
युग बीते पर तुम न आये,
गीता में थे वचन सुनाए।
मैं आऊं जब पाप बढ़ेगा,
दानवता का ताप चढ़ेगा।
मानवता संताप करेगी,
विपदा जब भक्तो पर पड़ेगी।
क्या अब भी कुछ कमी है बोलो,
रोती सृष्टि आंखें खोलो।
कब से आंखें तरस रहीं हैं,
प्राणों की ज्योति सिमट रही है।
आ भी जाओ दर्श दिखाओ,
पाप हरो हमे सत्य दिखाओ।
बहुत बढ़े प्रभु पाप हमारे,
पीड़ बड़ी हरो कष्ट हमारे।
पीड़ बड़ी हरो कष्ट हमारे।
नीलू
दिल्ली
3. हे कृष्ण, कहो कब आओगे
सूनी है कुंज की गालियां, सूने गली चौबारे हैं,
हम सब तेरी राह तके, हे कृष्ण कहो कब आओगे।
राधा रानी पूछे तुमसे, कब मुरली मधुर बजाओगे,
दीवाने बँसी के पूछे, हे कृष्ण कहो कब आओगे।
द्रौपदी की लाज बचायी, आज संकट में नारी है।
नारी का सम्मान बचाने, हे कृष्ण कहो कब आओगे।
पाप ने अपने पैर पसारे, अधर्म ने डाला डेरा,
गीता का उपदेश सुनाने हे कृष्ण कहो, कब आओगे।
अंधकार जग में फैला है, कोई राह ना दिखती है,
जग में उजियारा करने को, हे कृष्ण कहो कब आओगे।
पथ देख के थक गई गोकुल की सारी गोपियाँ ,
जमुना तट पे रास रचाने, ये कृष्ण कहो कब आओगे।
त्राहि- त्राहि मची है जग में, संकट है चहुँ ओर,
सारथी बन पार लगाने, हे कृष्ण कहो कब आओगे।
सतयुग में हिरणायक्ष को मारा,त्रेता में रावण को तारा
द्वापर में कंस उद्धारा, हे कृष्ण कहो कलयुग में कब आओगे।
अर्चना श्रीवास्तव
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
4. हे कृष्ण कहो न कि कब आओगे।
जिस दौर से समूचा देश गुज़र रहा है न वह आने वाली नस्लों के लिए बेहद भयावह और चिंताजनक है। वयस्क महिलाएँ तो क्या अब मासूम बच्चियों में भी ज़िस्म की चाहतों को पूरा करने वाले दरिंदों का दिन-प्रतिदिन हौसले बुलंद हो रहे हैं। बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के बाबत देश की सरकार ने नियम तो कड़े किये परन्तु क्या ये नियम काफ़ी या प्रभावी हैं जो हमारी बहन और बेटी को खुले आसमान और रात के अंधेरे में भी बिना किसी डर या आतंक के घूमने या कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता प्रदान करता हो? क्या हमारे देश के क़ानून में वो ताक़त है जो उन्हें उनकी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त कर सके? क्या हमारे समाज में वो माहौल है जहाँ किसी बेटी को ये न कहना पड़े कि हे कृष्ण! कहो, कब आओगे? ज़वाब आप भी जानते हैं और मैं भी पर इसका समाधान न जाने किसके पास है? बस यही तो विडंबना है क्योंकि जो दूसरों के भरोसे बैठे होते हैं, उनकी मदद ख़ुदा भी नहीं करना। मेरे अनुसार हमें आगे आना होगा। बदलाव ख़ुद से शुरू होकर समाज तक करना होगा। सामने कोई अश्लील फब्तियाँ कसे तो उसको उसकी भाषा में ज़वाब देना होगा पर अफ़सोस तो यही है हमें क्या करना है। चलते हैं बेवज़ह किसी पचड़े में क्यों फंसे? ख़ुद बदलेंगे तो न ज़माना बदलेगा पर हमारी ये सोच कि हमें नहीं पड़ना दूसरों के पचड़े में तो कृपा करके किसी बेटी के प्रति संवेदना व्यक्त करना बंद कर दीजिए क्योंकि इसे मात्र दिखावा कहते हैं। ये दरिंदे कहीं दूसरी दुनिया से नहीं आते ये हमारे आपके घरों के ही होते हैं। फ़ैसला हमारा और आपका है कि हम आने वाली पीढ़ी को और समाज को एक सामाजिक इंसान होने के नाते क्या देकर जाते हैं वर्ना रोते रहिये हे कृष्ण! कहो, कब आओगे?
जितेन्द्र विजयश्री पाण्डेय "जीत"
मिर्ज़ापुर-प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
5. इक प्रीत का गीत सुना जाना
कान्हा अधरों पर रख बंसी
एक प्रीत का राग सुना जाना
मोहन तुमको यह प्रेम निमंत्रण
आंखों को दर्श करा जाना
मनमोहन मेरे गिरधारी
तनमन जाऊं तेरी बलिहारी
कान्हा बंसी वट पर आना
एक प्रीत का गीत सुना जाना
सखियों संग सुनने को बंसी
आईं है देखो राधा प्यारी
मनमोहन मेरे गिरधारी
तेरी बंसी की धुन मोहन
सुनता गोकुल औ बरसाना
हम अभी आए हैं सुनने को
एक प्रीत का गीत सुना जाना
- गौरव तन्हा
6. हे कृष्ण कहो कब आओगे
मोर मुकुट पीताम्बर पहने
मधुर मुरली की तान सुनाने
गोपियों संग रास रचाने
हृदय में सबके प्रेम जगाने
गीता का उपदेश सुनाने
कर्म का सबको मार्ग दिखाने
हे कृष्ण कहो, कब आओगे
मृगतृष्णा सबकी दूर करने
अभिमान सबका चूर करने
क्रोध, मोह का नाश करने
कष्टों का निवारण करने
दानवों का संहार करने
हे कृष्ण कहो, कब आओगे
अधर्म का नाश करने
धर्म का उत्थान करने
दीनों पर उपकार करने
दुःख और संताप हरने
भक्तों का उद्धार करने
हे कृष्ण कहो, कब आओगे
अज्ञानता को दूर करने
हृदय में प्रकाश भरने
जगत का कल्याण करने
धरा से अत्याचार मिटाने
भवसागर से पार लगाने
एक नया अवतार लेकर
हे कृष्ण कहो, कब आओगे।।
प्रेमलता चौधरी
फालना, पाली (राजस्थान)
7. दर्शन दो हे श्याम
कब दर्शन दोगे श्याम कृष्ण बनवारी,
दर्शन पाने को भक्तों की नजर है प्यासी।
कब आओगे श्याम हे गोपाला गिरधारी,
दर्शन पाने को भक्तों की नजर है प्यासी।
संकट में है संसार आज ये,
चहुं ओर है त्राहि- त्राहि।
आजाओ हे श्याम, हे कृष्ण मुरारी,
द्वापर में जब छाया था हर ओर अंधेरा,
कंस के डर से ऋषि मुनियों ने भी
छोड़ा था भजन तेरा।
कंस के डर का डंका बज रहा था चारों ओर,
कारागार में वासुदेव देवकी भी याद कर रहे थे पल पल तुझको।
ज़ब आए तुम बनके भास्कर
मथुरा के नभमण्डल पर।
छटे दुख के घन काले ,
घनश्याम तुम कहलाये तब।
फैली प्रफुल्ल्ता चारों ओर,
बनगई गोपियाँ तेरी दिवानी।
कंस के सकल राक्षसों को तुम मारे,
ऋषि मुनि को दुख के सागर से तुम्ही उबारे। .
ग्वाल वालों के सखा बने तुम,
और गौ माता के रखबाले।
राधा जी के परम सखा तुम,
नंद यशोदा के राज दुलारे।
संकट कट गए द्वापर युग के,
आए तुम मझधार के खिवैया बनके।
संकट में है संसार आज फिर,
चारों ओर फैला है डर का घना अंधेरा।
मच रही है हर तरफ त्राहि-त्राहि,
कंस नहीं ये है कोरोना महामारी।
नेपाल चीन भी अब आंख दिखा रहे,
सच्चे लोगों को आज सब दबा रहे।
गौ माता पर भी संकट छाया है अति भारी,
खा रहे है गौ माँस आज राक्षस मांसाहारी।
छिप गया है आजादी का सूरज,
मास्क सैनिटाइजर की जंजीरों में
बँधे भक्त तुम्हारे।
बच्चों के भविष्य पर भी
छाये संकट अति भारी।
मंदिर तीरथ सब बंद पड़े हैं,
गंगा जल का पान नहीं है,
मदिरा से अब हाथ धोने पड़ रहे।
चीन नाम का राक्षस हुंकार भर रहा,
पाकिस्तान दानव भी उसके साथ खड़ा हुआ.
सत्संग भंडारे सब बंद हो गए,
दर्शन को तेरे बांके बिहारी हम तरस रहे।
अब देर ना करो हे कृष्ण मुरारी,
दर्शन दो हे मुरली धारी।
नाश करो सब पापियों का,
सुदर्शन से हनन करो इस महामारी का।
मंदिर तीरथ सब खोल दो फिर से,
राधे रानी की जय जयकार होने दो फिर से।
फिर से सत्संग की गूंज उठे गगन में,
अग्नि जले फिर हवन कुंड में।
आ जाओ हे कृष्ण मुरारी,
तरस रही ये अखियाँ प्यासी...
झर झर झर झर आँसू बहे है,
हर पल मन अब तुझे ही जपे है।
अब ना तरसाओ अपने भक्त जनों को,
पूछ रहे भक्त सब दर्शन के अभिलाषी।
कब आओगे श्याम हे मोहन गिरधारी
दर्शन पाने को भक्तों की नजर है प्यासी।
भवंर में फ़ँसी है हम भक्तों की नैया,
आकर पार लगादो हे कृष्ण कन्हया।
कब आओगे गोविन्द हे पीताम्बर धारी,
दर्शन पाने को भक्तों की नजर है प्यासी।
फिर से राह दिखाओ लाला हे भक्तन के हितकरी,
आजाओ हे प्यारे कान्हा संकट है अति भारी....
🌹जय जय श्री राधे 🌹
🌹जय जय श्री कृष्णा प्यारे 🌹
कामिनी वार्ष्णेय
अलीगढ़
8. तू आजा मुरलीधर
आज यह कानन विरान है
बाट देखती गाये भी हैरान है,
मुरली अकेली खेल रही समंदर किनारे,
भौंरे भी भुल रहे उन्माद इशारे ।
नयन तरस गए तेरा दर्शन हो जाए ,
तू आजा मुरलीधर, चहुँ और कृष्ण हो जाए।।
भौर से संध्या तक फिर तेरी शरारते चाहिए ,
चुपके चुपके गोपियों को तेरी मुलाकाते चाहिए,
हे! गोपाल अब तू कब आएगा,
चाची- मौसी- दादी को फिर कब सताएगा।
हर उर में तेरी छवि का दर्पण हो जाए,
तू आजा मुरलीधर, चहुँ और कृष्ण हो जाए।।
द्रोपती आज तुझे ही पुकार रही,
आ नंदलाला कितनी दुखिया सवार रही।
तेरा भक्त पंछी भी आगमन का जप कर रहा,
खड़ा अकेला गवाला इंतजार का तप कर रहा।
भक्ति भाव की यह भावना तेरे चरणो में अर्पण हो जाए,
तू आजा मुरलीधर , चहुँ और कृष्ण हो जाए।।
अर्जुन हारा किसी पथित की तरह,
फिर दे गीता का उपदेश , मत कर माखनचोर विरह।
कौरवों के आतंक का दुश्वार बढा़ है,
सत्य पर असत्य चढ़ा है।
तेरे आने से फिर सत्य तृष्ण हो जाए,
तू आजा मुरलीधर, चहुँ और कृष्ण हो जाए ।।
जाभंवन को तेरी भक्ति का भूत चढ़ रहा ,
दिन - रात अपने मैं में खुद को गढ़ रहा।
कन्हैया बढ़ रही अहम् की मधुशाला,
तेरे इंतजार को लगता हूं हारा - हारा।
रो रही आँखें मेरी, यशोदानंद तेरा दर्शन हो जाए,
तू आजा मुरलीधर, चहुँ और कृष्ण हो जाए।।
मौलिक व स्वरचित
कमल कालु दहिया
शेरगढ़, जोधपुर (राजस्थान)
9. कह दो ना वापस कब आओगे
हे कृष्ण कह दो ना वापस कब आओगे,
मेरे दुखी मन को फिर से कब हर्षाओगे,
तेरे बिन सुनी लगेगी वृंदावन,
मुरली की धुन बिन लगेगा नहीं मेरा मन,
वृंदावन की कन-कन तेरे बिन रोएंगे,
कह दो ना वापस कब आओगे।
तेरे बिन चरेगी नहीं गैया-बछरिया,
रोएगी हरदम यशोदा मैया,
कैसी रहेगी बेचारी सखिया,
तेरे संग जो करती थी रास रचैया,
गोपियां की माखन अब कौन चुराएंगे,
कह दो ना वापस कब आओगे।
देखो कैसे उदास खड़े हैं सखा तुम्हारे,
रो-रो कर बुरा हाल कर लिया मनसुखा तुम्हारे,
नंद बाबा की सूखती नहीं नयन,
तुमको तो देना होगा हमें वचन,
तेरे बिन हम सब रह नहीं पाएंगे,
कह दो ना वापस कब आओगे।
टूट कर बिखर गई राधा की पायलियां,
सुनी जब सुनने को नहीं मिलेगी कान्हा की बांसुरियां,
तेरे कंकर बिना ही फूटने लगी मटकियां,
पानी भरने अब नहीं आएगी सखियां,
राधा को कैसे समझाएंगे,
कह दो ना वापस कब आओगे।
छोड़ कर हम लोगों को जाना,
क्या तुम्हें अच्छा लगता है,
साथ में ले भी नहीं जा सकते,
मजबूरी बताकर,
झूठलाना अच्छा लगता है,
तेरा बाट हम सब युग-युग तक निहारेंगे,
कह दो ना वापस कब आओगे।
श्रवण कुमार
10. हे कृष्ण कहो कब आओगे?
*********************
आज मची विश्व में त्राहि-त्राहि,
भर गया अन्याय का अब घड़ा !
पुकारती द्रोपदी करती आर्तनाद,
करता दुशासन द्रोपदी का चीरहरण !
आज युद्ध को दुर्योधन फिर अड़ा,
क्या फिर से महाभारत दुहराया जाएगा?
गांडीव हाँथो में ले अर्जुन सोचता खड़ा,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे?सखा गोविंद!
कहो क्या द्रोपदी की लाज बचाओगे?
क्या गीता का ज्ञान फिर से दोहराओगे?
दुर्योधन हरपल डराता कर शक्ति प्रदर्शन,
अन्याय की दुंदुभी बज रही अब हर ओर!
हे कृष्ण कहो, कब आओगे? लेकर चक्र-सुदर्शन!
अब टकटकी लगायें खड़ी सारी दुनियाँ,
आएंगे कब? तारणहार पार करेंगे नैया!
मुरली मनोहर गोबिंद श्याम कहो,कब आओगे?
हर गली में करने को चीरहरण दुशासन खड़ा,
लूटने को जायदाद छल-कपट धोखे पर अड़ा!
धृतराष्ट्र बैठे हर घरों में नेत्रोंवाले नेत्रविहीन,
देखते कुल की बेटी-वधु को विवश हो चिरविहीन!
सगे भाई-बंधु एक दूसरे के रक्त-पीपाषु बने,
भले ही एक ही माता के कोख से हो जने!
होती विखंडित खण्ड-खण्ड में धरा,
बंटवारे को हर घर मे दुर्योधन जिद पर अड़ा!
आज की नेत्रों में गांधारी के स्वार्थ की पट्टी चढ़ी,
घर मे कर भेदभाव करती पति को सबके विरुद्ध!
आज भी मामा शकुनि फुट डाल भांजों के बीच,
चाहते कराना बहन के घर महाभारत युद्ध!
हे कृष्ण कहो, कब आओगे? गीता सुनाओगे,
ईर्ष्या-द्वेष की अग्नि में जलते विश्व को बचाओगे!
***************************************
शशिलता पाण्डेय
बलिया:-उत्तर प्रदेश
11. कृष्ण की याद
यमुना के तट ,गोपियॉ पूछे,
कालिया नाग कब नचाओगे |
प्रभु , लीला कब दिखलाओगे,
हे कृष्ण कहो , कब आओगे ||1||
कान्हा नव अवतार में आओ,
फिर से गीता -पाठ पढ़ाओगे |
सूना पड़ा है ब्रज के कानन ,
कब हमें मधुर तान सुनाओगे ||2||
हे कृष्ण कहो...
ताक रहे हैं सब सखियॉ मेरे,
फिर प्रभु कब माखन चुराओगे |
नैनो में मस्ती , होठों में लाली,
कब गोपियों संग रास रचाओगे ||3||
हे कृष्ण कहो....
लीला तुम्हारी ,अद्भुत न्यारी,
मेरा मन कब तक बहलाओगे |
हे मनमोहन , जल्दी से आओ,
कब तक नटवर तरसाओगे ||4||
हे कृष्ण कहो...
हे साँवरिया मुरलीधारी ,
कब अपना रुप दिखलाओगे|
फिर से आओ वृन्दवादन में,
प्रभु मेरा भी भाग्य जगाओगे ||5||
हे कृष्ण कहो....
हे पीताम्बर , तारणहारी ,
प्रभु कब तक बहलाओगे |
गाय, गोपी, जगवासी पूछे,
सबको कब तक बतलाओगे ||6||
हे कृष्ण कहो....
धनेश्वर देवांगन "ऋषि"
सारागॉव,जॉजगीर-चॉपा (छ. ग.)
12. कृष्ण : करो उद्धार
गिरधारी
हे कृष्ण
कहो कब आओगे?
बढ़ता अधर्म
त्रिपुरारी ।
***
अनाचार
हिंसा अपार
सुन लो पुकार
करो उपकार
तारणहार ।
***
गोपाल
वृंदावन सूना
उदास ब्रज धाम
प्यासी यमुना
पालनहार।
***
माखनचोर
गोपियाँ उदास
लिए मिलन आस
हरो त्रास
चितचोर ।
***
मनमोहन
मोहक मुस्कान
बाँसुरी की धुन
निश्छल नयन
नारायण ।
***
रितु अग्रवाल
बेंगलुरु ( कर्नाटक)
13. हे कृष्णा
हे कृष्ण कहो
कब आओगे
मित्र सुदामा की तरह
ही मुझे संवारोगे
हे सांवरे बताओ
मुझे आखिर
कब तुम मेरे पास
आओगे
इंतजार है मुझे
आपके आने कीखबर का
तरस रहा हूं मैं अब तक उस
कृपा को पाने के लिए
जो तुमने दी है
अपने सब चाहने वालों को
जिन्होंने भांति भांति से
आपका गुणगान किया
मैं भी इच्छुक हूं
उसे पाने का
इसलिए पूछ रहा हूं मैं
हे कृष्ण कहो
कब आओगे।।।
मनोज बाथरे
चीचली जैन मंदिर के पास जिला नरसिंहपुर मध्य प्रदेश
14. हे कृष्ण!
*****************
हे कृष्ण कहो कब आओगे
यह धरती तुम्हें पुकारती
हे दीनदयाल प्रभु मेरे
हम करते तेरी आरती।
मथुरा वृंदावन की गलियाँ
वह तान मुरलिया की न्यारी
गोपी संग रास रचैया तू
अब झलक दिखा अपनी प्यारी।
ग्वालों संग गाय चराने फिर
गोकुल के धाम चले आओ
अधरों पर मुरली फिर धरके
राधा के संग में आ जाओ।
सब भक्त पुकारें हृदय से
हे कृष्ण कहो कब आओगे
कब धर्म का शंख बजाने तुम
इस धरती पर आ जाओगे।
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गजेंद्र कुमार घोगरे
स्नातकोत्तर हिन्दी अध्यापक
जनवि, वाशिम (महा)
15. जरूरत कृष्ण अवतार की
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आ जाओ कृष्णा लेके एक नया अवतार,
नारी रूप द्रोपदी कर रही आज पुकार##
आजाओ कृष्णा.............. .....।
त्रेता में तुम आये,पूतना का किया संहार,
कंस सा मामा पाया,किया उसका भी उद्धार।
ओ लीलाधर तूने कैसी लीला रचाई,
बंसी बजाकर तूने गोपियाँ खूब नचाई।
दधि की मटकी फोड़ी,
जैसे किया दानव संहार।।
आजाओ कृष्णा लेके एक नया अवतार..
कुरुक्षेत्र में तूने अर्जुन का मान बढ़ाया,
दिखा व्रह्माण्ड मुख में,गीता का पाठ पढ़ाया।
जड़ चेतन से अधर्म का तूने किया विनाश,
पापियों का कर संहार,किया धर्म का संचार।।
आ जाओकृष्णा ......
अब कलयुग है आया,हर घर ने दुर्योधन पाया,
दुःशासन खींच रहा साड़ी, क्या कन्या या नार।
#हे,कृष्ण कहो,कबआओगेअब की बार,
आ जाओ कृष्णा अबतो,मचा है हाहाकार।।
आ जाओ कृष्णा लेके एक नया अवतार......।।।
गीतांजलि वार्ष्णेय "सूर्यान्जली"
बरेली, उ.प्रदेश
16. कृष्ण कहो कब आओ गये
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
कहो कब आओ गये कृष्णे गोपाला
तेरी राह ताके बृज बाला
मीरा बन मैं घूम रही
दर दर तुमको ढूंढ रही
भव् सागर मे डूब रही
अब नैया मेरी पार करोना
कहो कब आओ गये कृष्ण गोपाला ****************
सपनो मे मेरे तु मुरली बजाए
पल पल मन सिर्फ तुझको बुलाए
इस दासी संग क्यु ना तु बतियाए
कब मेरे संग तु राधा जैसा रास रचाए
पल पल खुद जला, मैने आस का दीपक जलाया
कहो कब ***************
घर हारा तन भी हारा
तेरी प्रीत मे मन भी हारा
ब्रज की गलिया घूम रही
बस तुझको ही खोज रही
मै ने तो पी लीया अब विष का प्याला
कहो कब ********
गीता राजेंद्र मिश्रा
अलवर
17. प्यारे कब तुम आओगे ?
मेरे आस तुम ही हो, प्यास तुम ही हो।
कलयुग की हर द्रौपदी का, विस्वास तुम ही हो।
पल-पल आती चीतकारों का, विश्वास तुम ही हो।
धरती को संकट मुक्त कराने,
कान्हा आओ अष्टमी की काली रात में।
धर्म ही कर्म है, कर्म ही धर्म है।
हे कान्हा, तुम बिन कौन सिखाये ?
जग में कृष्ण और कृष्ण में जग है।
ऐसी भक्ति कौन जगाये।
तुम पर कैसे कुछ लिखूँ मैं, कान्हा.......
शब्द भी तुम और कलम तुम्हीं हो,
मन में उपजा भाव तुम् ही और,
उन भावों का आकार तुम्हीं हो।
जूझ रही है तेरी धरती,
नित नए पैदा होते कंसों के अत्याचारों से,
मानवता अब, सिसक रही है,
भौतिकता और लालच के घेरों में।
कहीं कालिया,कल-कारखानों का,
करता गंगा-यमुना को निष्प्राण।V
वहीं प्रदूषण,पूतना करवा रही
नवजातों को विषपान............
एक बार पुनः अवतरित हो मेरे कान्हा....
पावन करने इस धरती को,
भौतिकता और लालच के
मलीन विचारों से..
चलाओ तुम्हारा चक्र सुदर्शन
जिससे हो धरती अंबर,
ग्रह नवग्रह सब प्रकाशमान
फिर छेड़ो मुरली की ऐसी तान
जिससे सबके अधरों पर
फैले मधुर मुस्कान........
अब आश खो रही, प्यास खो रही,
नित होते अत्याचारों से।
लाज बचानी मुश्किल हो गई,
कलयुग के दुशासन से।
संकट चारों ओर पसरा है,
वसुधा गुंजी हाहाकारों से।
भक्तों को संकट मुक्त कराने,
प्यारे कब तुम आओगे?
**********************************
मोहन चन्द्र जोशी
18. हे कृष्ण कहो कब आओगे ?
मैं भवाटवी भटक रहा हूँ ।रुखी सूखी गटक रहा हूँ ।
असह्य पीडा बडी अपार ।
हे कृष्ण कहो कब आओगे ।
परम प्रिय आप हमारे । ओ आ जा श्याम प्यारे ।।
चीटी चाहे मिलन गरुण से क्या वह कर सकती है ।
चाह गरुण की यदि हो जायें तो वह पा सकतीं है ।।
अपने पुरुषार्थ से ,प्रभु को ,पाना अति मुश्किल है ।
कृपा करुणानिधि यदि हो ,तो फिर क्या मुश्किल है ।।
भटक रहा हूँ कई जन्मों से, तेरी माया का विस्तार ।।...............१
हे परम प्रिय आप हमारे , ओ इ जा श्याम प्यारे ॥........
पल पल प्रति क्षण आयु देखो, कम ही होती जाती ।
तरस रही है कब से अखियां, ये दरस न तेरा पाती ।।
तेरा दिव्य अलौकिक वैभव, यह ना वाणी गा पाती ।
अपरम्पार सुयश स्वामी का ,ये पार कहां से पाती ।।
कृपासिन्धु एक बिन्दु कृपा पर , ये जीवन है बलिहार ।।..................२
मेरे यदि तुम दुर्गुण देखो तो कभी नहीं तर सकता ।
अपरम्यपार नाम की महिमा ,संत शास्त्र यह कहता ।
नाम रटत नर नामी पावत , नाम ते प्रस्तर तरता ।
राम नाम है अमर जगत में , क्यों जिह्वा नहीं जपता ।
मुक्ति राम नाम के बल पर , पावन भोले का भण्डार ।।....................३
राजेश तिवारी "मक्खन"
झांसी उ प्र
19. आओ मोरे कृष्ण कन्हया
आओ मोरे कृष्ण कन्हया
कलयुग में भी छवि दिखलाओ।
कई नैंन प्यासे है अब भी
एक बार तो छवि दिखलाओ।
पुनः वसुंधरा कुपित हुई है
कई दुर्योधन और शिशुपालों से।
सबके चेहरे धृतराष्ट्र बने हैं
मन के कालिक शकुनी से।
द्रौपती के चीर हरण सी
गली-गली यह बिष गागरी।
तब तो मात्र द्रोपदी हारी
हार रही आज हर नारी ।
नही कोई भी कृष्ण यहाँ
रणभूमि में जो गीता रच दे।
हर चेहरा लाक्षयागृह यहाँ
पता नही कब भष्म कर दे।
घर से बाहर आज हर बेटी
द्रौपदी सी डरी और सहमी हुई।
नही किसी नर में इंतना दम
साहस भर उसमे,जो है डरी हुई।
भारत के महान पुरुष तुम
भारत का मान अभिमान हो तुम।
पुनः भारत की धरती पर आकर
धन्य कर तो हर प्राणी को तुम।
गांव गांव फिर मथुरा बने
गाय,ग्वाले दूध दही के धारे बहें।
हर शहर, राज्य इंद्रप्रस्थ बने
सुख शांति समृद्धि की सरिता बहे।
रचना--
सन्नू नेगी
उत्तराखंड
20 हे कृष्ण कहो, कब आओगे
मानसिक, सामाजिक, धार्मिक बेड़ियों में जनमानस जकड़ा हुआ है
सत्य को ,झूठ ने कारागृह में पकड़ा हुआ है
दुःखों की काली अंधियारी रात भी कहर ढा रही है
प्रकृति भी अपना रौद्र रूप दिखा रही है
आपातकालीन परिस्थितियाँ ,कभी कहीं कभी कहीं चपला सी कौंध रही हैं
आततायी शक्तियाँ दीन हीन को रौंद रही हैं
नदियों में प्रदूषण रूपी कालिया नाग पसरा हुआ है
सारा विश्व अदृश्य असुर से डरा हुआ है
दिन प्रतिदिन घटित हो रहे हैं सामूहिक दुष्कर्म
भोग विलास में जीवन बिता रहा है अधर्म
और दर दर ठोकरें खा रहा है धर्म
हे कृष्ण कहो, कब आओगे?
स्वरचित
मीना कुमारी "महिमा"
शालीमार बाग,दिल्ली
21 हे कृष्ण कब आओगे, कब ख़त्म होगा इंतज़ार
*हे कृष्ण तुम कब आओगे,*
*कब होगा ख़त्म इंतज़ार...?*
कई दुःशासन घूम रहे बेखौफ
घर से बाहर कैसे आऊं,
एक नहीं अनेक द्रौपदी खौफ़ में कर रही इंतज़ार...
भटक रहे बालक गली गली
माखन तो भूल चुके ,
भर पेट रोटी एक वक़्त की होती नहीं दरकार...
हे कृष्ण तुम कब आओगे
कब होगा ख़त्म इंतज़ार...
मन ही मन में करें मित्रता का मान
ऐसे सुदामा तो बहुत है,
कृष्ण सा मित्र कोई , इस जहाँ में अब कहाँ खोले द्वार..
मकर से बचाया वो गज़ के वंशज
खूब घूमे सर्कस सर्कस,
तेरे मानव का पेट भरे फिर भी मानव गज़ का करे संहार...
हे कृष्ण तुम कब आओगे..
कब होगा ख़त्म इंतज़ार
गैरों की आँखों मे ढेर सारा प्यार
अपनो की आस्तीनों में छुपे सांप-ओ-खंज़र देखे..
हमारी आँखों ने घर घर मची महाभारत के मंज़र देखे...
मीरा सी भक्ति दे जा, हम भी कर ले कुरीतियों का विषपान,
देने आजा फिर आज नई गीता का ज्ञान..
बस कर दे इतना उपकार..
हे कृष्ण तुम अब आ जाओ
बस और ना होता इंतज़ार...
*हे कृष्ण तुम कब आओगे*
*कब होगा ख़त्म इंतज़ार...*
रचनाकार
स्नेहदिल नरेश चावला
जोधपुर राजस्थान
22 हे कृष्ण कहो,कब आओगे
पाप बढ़ा जब जब धरा पर प्रभु तुमने अवतार लिया है
जब जब हानि हुई धर्म की चक्र सुदर्शन थाम लिया है
लाज बचाने द्रुपद सुता की पल में चीर बढ़ा दिया है
नृप दुर्योधन को ठुकरा के महात्मा विदुर को मान दिया है
दीनों के तुम नाथ कहाए ,दीन सुदामा को मित्र बनाया है
समर क्षेत्र में प्रभु तुमने अर्जुन को गीता ज्ञान सुनाया है
अधर्म का नाश किया और धरम का पाठ पढ़ाया है
अहम मिटाया दुर्योधन का विराट स्वरूप दिखाया है
शिशुपाल के अत्याचारों से सम्राटों को मुक्त कराया है
जयद्रथ के अधर्म का अर्जुन से संहार करवाया है
अहंकारी जरासंध को पल में परलोक पहुंचाया है
युगों युगों के अभिशापों से अभिशप्तों को मुक्त कराया है
अत्याचारी नरेश कंस से मथुरा नगरी को भी बचाया है
मेरी विनती द्वारका नाथ क्यूं तुम इस तरह ठुकराओगे
कलयुग में पाप का ताप बढ़ा, हे कृष्ण कहो कब आओगे!
भ्रष्टाचारी और कुकर्मियों से देश है मेरा पटा हुआ
देशद्रोही और गद्दारों से मुल्क है अपना सटा हुआ
लाज बहु बेटियों की क्या अब आकर न बचाओगे
दया करो हे दया निधान और कितनी देर लगाओगे?
एक ही सूरज,एक ही चंदा,एक ही गगन,एक थल है
एक ही वायु ,एक विधाता ,एक ही वर्षा का जल है
फिर कौन सा,धरम कौन सा मजहब आकर धरती पे बचाओगे
एक प्रभु तुम, नाम अनेकों ,अब कौन सा स्वरूप दिखाओगे
एक ही आस ,एक विश्वास तुम अब न देर लगाओ प्रभु
सृष्टि आकर बचालो भगवन तनिक अब तो विचारो प्रभु
क्या 'चंचल' के अन्तर्मन की यह करुण पुकार सुन पाओगे
अनाथों के नाथ द्वारका नाथ, हे कृष्ण कहो कब आओगे!
श्रीमती चंचल हरेंद्र वशिष्ट,
हिन्दी भाषा शिक्षिका,कवयित्री एवं रंगकर्मी
आर के पुरम,नई दिल्ली
09/08/2020
23 हे कृष्ण कहो कब आओगे !
====================
हे कृष्ण कहो कब आओगे !
फिर गीता ज्ञान सुनाओगे !...हे कृष्ण..
मथुरा अब तक उदासी है ,
जमुना पनघट प्यासी है ,
ग्वाल बाल राह देखते हैं,
गाय गोपी राह तकते हैं ,
वृंदावन गलियों में कान्हा
बोलो कब रास रचाओगे !.... हे कृष्ण
फन फैलाए नाग खड़े हैं ,
शस्त्र उठाए असुर अड़े हैं,
दुर्योधन तांडव करता है ,
दुशासन हरण करता है ,
शोषण अनाचार मिटाने को
सुदर्शन चक्र कब उठोगे !... हे कृष्ण
आंखें तरसती रहती हैं ,
दिनरात बरसती रहती हैं,
अशांत मन भटकता है ,
अदृश्य दैत्य खटकता है,
बरसाने में फाग रचाकर
कब मुरली मधुर बजाओगे !... हे कृष्ण
====================
रमेश चंद्र शर्मा
16 कृष्णा नगर इंदौर
स्वरचित मौलिक रचना
24 हे कृष्ण कहो, कब आओगे ?
हे कृष्ण कहो,कब आओगे ?
देश बना है फिर से कुरुक्षेत्र,
मानव-मानव नहीं रहा अब,
दानव-सी हो गई है मानव का यहां,
रोज-रोज हो रहे हैं चीरहरण यहां,
बहू-बेटियां होती हैं रोज-रोज यहां,
दुष्ट-दानवों-असुरों की शिकार यहां,
बनकर दुष्ट-दानव-राक्षस पवन-धरा पर,
फैला रहे हैं पाप रोज इस पावन-धरा पर,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे ?
एक बार फिर से आकर इस पावन-धरा पर,
महाभारत वाला गीता ज्ञान देकर ,
करदो पावन-पवित्र पुनः इस धरा,
निभा कर सखा-सुदामा वाला प्यार,
वो खुशियां हमें वापस लौटा जाओ,
पाप-शाप और संताप मिटे अब तो आजाओ,
मिट जाए यहां सारे क्लेश और विकार,
धारण करके अपना वो सुदर्शन-चक्र,
जैसे वध किया था उस मायासुर का,
वैसे ही इस पावन-भूमि को पुनः,
अपने चक्र से पापियों का कर दो वध पुनः,
बन गया हैं मानव जो यहां मयासुर,
करो कृष्ण कृपा हम पर,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे??
चेतन दास वैष्णव
गामड़ी नारायण
बाँसवाड़ा
25 कृष्ण-जन्माष्टमी
हे कृष्ण! कहो कब आओगे
इन्तज़ार में मन तरसे
यूँ बेरुखी तुम्हारी देख कर
सावन जस् नैना बरसे..
नटखट अदा और सूरत भोली
गोपियों संग करें हँसी ठिठोली
वृंदावन में रास रचाये कान्हा
होलिया मे खूब भिगोये चोली
दुखियारी बेचारी तेरे प्रेम की
राहत दे दो न अपने कर से..
मटकी फोड़े माखन चुराये
गोपियों को ये खूब सताये
घोलें मीठी मीठी बातों में
बजा बाँसुरी सबको बुलाये
सम्राट हरेक चित के कान्हा
दरस को बीत गए हैं अरसे..
नाज़ुक दिल मेरा क्यों तोड़े
विश्वास के धागे तुमसे जोड़े
कान्हा सताना अच्छा नहीं-
कबतक रहोगे तुम मुँह मोड़े
बारंबार करुँ विनती तुझसे
खाली न जाऊँ मैं तेरे दर से...
अनामिका वैश्य आईना
लखनऊ
26 आ जाओ मेरे गिरिधर गोपाल।
*****************
जमुना तट पर बंशी बजाओ,
नटखट सखियो के मन को लुभाओ।
दूध दही और मिस्री आकर खा जाओ ।
अपनी मनमोहक सूरत तो दिखाओ।
आ जाओ मेरे गिरिधर गोपाल
मधुर मुरली की तान सुनाओ।।
************************
माँ यशोदा की माखन खाने आओ।
माँ यशोदा की मीठी लोरी से सो जाओ।
नटखट अटखेलियों से माँ के मन को लुभाओ।
आ जाओ मेरे गिरिधर गोपाल
मधुर मुरली की तान सुनाओ।।
***********************
चित चोर मुरली गोपाल।
चितै चितै मेरे आँगन में आओ।
पंकज कमल चरणों सी,
पायल की झंकारों से गुंजित कर जाओ।
आ जाओ मेरे गिरिधर गोपाल,
मधुर मुरली की तान सुनाओ।।
***********************
इस जन्माष्टमी में आओ
गोपियों के साथ रास लीला रचाओ।
भक्तो को मुरली की धुन में नचाओ।
सभी के मन को हर्षित कर जाओ।
आ जाओ मेरे गिरिधर गोपाल
मधुर मुरली की तान सुनाओ।
**********************
स्वरचित व मौलिक रचना✍️✍️
श्रीमती उषा साहू
जिला बलौदाबाजार
राज्य छत्तीसगढ़
****************
27 कृष्ण भक्त
हे कृष्ण कहो, कब आओगे ?
कब तक मुझे तड़फाओगे ।
तुम बिन सूना ये वृन्दावन ,
कब मुरली की मधुर धुन सूनाओगे ॥
ग्वाल बाल सब हैं उदास ।
मन में लिए मिलन की आस ।
दरस दिखा दो हे मनमोहन ,
मिट जाये अँखियन की प्यास ॥
सृष्टि पालक हे गिरधर नागर ।
सूखी पड़ी है प्रेम की गागर ।
व्याकुल हैं यहाँ हर बृजवासी ,
छलका दो हे प्रभु , कृपा का सागर ॥
एक बार प्रभु चक्र चलाओ ।
हर भक्तन के कष्ट मिटाओ ।
सारे जगत में डर का साया ,
आजाओ प्रभु हमें बचाओ ॥
सर्वमौलिक अधिकार सुरक्षित
विशाल चतुर्वेदी " उमेश "
जबलपुर मध्यप्रदेश
आयोजक: प्रतिध्वनि साहित्य समूह
28 हे कृष्णा कहो,कब आओगे*
हे। मेरे कान्हा, मेरे मुरलीधर,
क्या तेरे दिल में समायी,
वसुधा, जी से जंजाल बनी,
हे। कृष्ण कहो, कब आओगे ?
देख तेरी वसुधा थक गयी,
कितने लाल शहीद हो गये,
कितने कोरोना से अनाथ हो गये,
हे। कृष्ण कहो, कब आओगे ?
नहीं सुन सकती मैं,
बिन मां के बच्चे की किलकारी,
उस मां का क्रंदन,जिसकी कोख, हो गयी खाली,
हे। कृष्ण कहो, कब आओगे ?
कभी वरुण सताता है,
कभी महामारी सताती है,
बस कर अब ए खेल सारे,
हे। कृष्ण कहो, कब आओगे ?
तेरी माया सारी,
हो गयी है वसुधा ,
पाप से भारी,
हे। कृष्ण कहो, कब आओगे ?
कर दें वसुधा को,
फिर से हरी-भरी,
जन्म लेने दों
राम-कृष्ण की जोड़ी।।
डॉ।। वसुधा पु. कामत
29 हे कृष्ण कहो,कब आओगे
पूछ रहे हम भक्त तुम्हारे
हे कृष्ण कहो,कब आओगे?
याद सताती हर पल तेरी
कब आके दरश दिखाओगे?
हो गई सूनी ब्रज की गलियां
कब आकर धूम मचाओगे?
हे कृष्ण कहो...।
रास-रंग सब बीती बातें
कब आकर उन्हें जिलाओगे?
हे कृष्ण कहो.... ।
यमुनातट तेरी राह देख रहे
कब आकर बंशी बजाओगे?
हे कृष्ण कहो.... ।
ग्वालबाल सब फिरते मारे
कब आकर गऊयें चराओगे?
हे कृष्ण कहो...?
कंस हो गये गली-गली अब
किस-किसको धाम पहुंचाओगे?
हे कृष्ण कहो...?
बहन द्रोपदियों की लाज लुट रही
कब आकर चीर बढाओगे?
हे कृष्ण कहो.... ।
अर्जुन अपनी राह भटक रहा
कब आकर गीता सुनाओगे?
हे कृष्ण कहो...।
गुरु शिष्य मर्यादा भूले
कब आकर गुरुकुल बसाओगे?
हे कृष्ण कहो.... ।
मित्रों में वो बात रही नहीं
कब फिर से दुहराओगे?
हे कृष्ण कहो..... ।
प्रीति शर्मा "पूर्णिमा"
30 कान्हा की धुन
श्याम छवि बड़ी प्यारी लगे,
मोहे कान्हा की धुन बड़ी न्यारी लगे!
पुनि-पुनि देखूँ मैं छवि तुम्हारी,
बलि-बलि जाऊँ मैं हे मनोहारी!
जरी-जड़े जो पहने हो मुकुट,
उसपे ही जाऊँ मैं वारी-वारी!
कानों में कुंडल सुशोभित हो रहे,
नैनों की मस्ती से मैं चितहारी!
होठों की लाली सुहानी लगे,
पिया बंसी तुम्हारी है प्राणों से प्यारी!
चलते हो जो तुम पायल पहन के,
वन उपवन भी शोर करे!
धूरि कहे ब्रज की हे श्यामा,
धन्य भयो जो पाँव परे!
रास रचैया है नाम तिहारो,
सबके हृदय में है राज तुम्हारा!
सांवरिया तुम कहलाते हो,
तुम्हारी कृपा से ही है जग सारा!
पिया-पिया में गाती जाऊँ,
पिया नहीं सुने एक हमारी!
बने हो जो तुम पिया हमारो,
पिया धर्म तो निभानो पड़ेगो!
आज नहीं तो कल पिया जी,
इक दिन तुमको आनो पड़ेगो!
शिल्पी शहडोली
शहडोल, मध्यप्रदेश।
31 ओ कन्हैया सुन बंसी बजैया!
हे कृष्ण कहो, कब आओगे,
कब अपने दरश दिखाओगे,
मैं व्याकुल सी देखूँ यमुना तट,
कब आकर बंसी बजाओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
सुनने को तेरी बंसी की तान,
कब से बेकल हैं मेरे ये प्राण,
जाने तुम कित अब फिरते हो,
कब आकर मन बहलाओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
हे नटखट माखनचोर सुनो,
देखो ना इतने निर्दयी बनो,
मैं तो हर साँस हारी तुम पर,
कब मेरा प्रेम समझ पाओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
कितनों को तुमने है तार दिया,
भ्रम-भंवर से उन्हें उबार दिया,
अर्जुन को दिया गीता का ज्ञान,
कब मुझ को तुम समझाओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
जब आन पड़े विपदा जग पर,
तुम जग को बचाने आते हो,
मुझ पर क्यूँ करते नहीं कृपा,
कब तक और मुझे सताओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
जब द्रौपदी पुकारती थी तुमको,
हे कृष्ण तुम दौड़े आते थे तब,
वो “निर्भया” पुकारती रही तुम्हें,
कैसे तुम उससे नजरें मिलाओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
जब सुदामा आये थे तुम्हारे दर,
नंगे पैरों जाकर गले लगाया था,
उनकी दोस्ती को निभाते हो,
कब मुझे अपना मित्र बनाओगे?
कब अपने दरश दिखाओगे,
हे कृष्ण कहो, कब आओगे!
मीना सिंह “मीन”
नई दिल्ली
32 चक्र सुदर्शन क्यों खामोश है
हे कृष्ण कहो तुम कब आओगे
अधर्मियों को कब मार भगाओगे
पूतना फिर दूध पिलाने को तैयार है
बकासुर निगलने को राजी हो गया है
कंस और जरासंध फिर आ गए हैं
पांडव फिर लाक्षागृह में जल रहे हैं
आपका आना ही केवल बाकी है
अब तो आइए तैयार सब झाँकी है
द्रौपदी के चीर हरण में आये थे
भरी सभा में उसकी लाज बचाये थे
महाभारत में महत्वाकांक्षी दुष्ट दुर्योधन
अत्याचारी दुःशासन,प्रतिशोधी कर्ण
कर रहे थे एक नारी का वस्त्र हरण
आज भारत में हर तरफ अनेकों
द्रौपदीयों का होता है चीर हरण
रोज होती है द्रौपदियाँ नंगी
दुर्योधन दुःशासन कर्ण और शकुनियों
और कंसों की संख्या बढ़ती जा रही है
उनकी ताकत भी बढ़ती जा रही है
मौन भीष्मों की संख्या भी बढ़ गई है
पर पता नहीं आपका न जाने कहाँ
बेसुध हो चैन से बाँसुरी बजा रहे हैं
गीता में आपने ही कहा है कि
जब -जब धर्म की हानि होती है
और पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ते हैं
आप मानव रूप में अवतार लेते हैं
तो क्या अभी धर्म की हानि होनी
अभी और कुछ बाकी है
या अवतार लेना नहीं चाहते
शिशुपालों की गालियों की संख्या
सौ के पार कर गई है
लेकिन आपका चक्र सुदर्शन
अभी तक क्यों खामोश है
अब तो आइए प्रभु फिर से
अपना चक्रसुदर्शन चलाइये
दुष्टों से भारत को मुक्त कराइये
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
33 कृष्ण
हे कृष्ण तुम्हारा स्वागत है,
नयन बावरे तुम्हे पुकारे,
मुरली मनोहर बृज की धरोहर
बंसी की धुन पर सब दुःख हरने
कृष्ण तुम कब आओगे?
माखन मिश्री खाने रास रचाने,
प्रेम का विस्तार करने तुम कब आओगे?
चौराहे पर लुटता चीर, हाहाकार करता मानव पुकारे ,
तुम कब आओगे,
सूना मन जलता तन ,विरह की मारी मीरा पुकारे ,वन२ डोले तुम्हे पुकारे ,सांसों की हर तार पुकारे,
शाम ढले भी श्याम न आए
मीरा ने हैं दीप जलाए ,
नया जोश नया उल्लास लिए
आशा भरी नज़रों से ये संसार बुलाए तुम्हे निहारता मन बावरा
दुनिया की पीर मिटाने ,।
हे , कृष्ण तुम कब आओगे?
वीणा का हर तार पुकारता
न सूझे मिलन का कोई रास्ता
राह कठिन डगर टेढ़ी मेढ़ी ,
आओ तुम्ही, अब अपनी धरोहर सम्हालने ,
हे कृष्ण तुम कब आओगे?
रेनू अग्रवाल, आशियाना,
लखनऊ
स्वरचित🌹
34 हे कृष्ण कहो, कब आओगे
हे कृष्ण कहो, कब आओगे
वैसे ही हमें ,कब रिझाओगे
ढेरो खुशीया कब लूटाओगे
प्यारी लीलाएँ कब दिखाओगे
हे कृष्ण कहो, कब आओगे।
मोहक मुस्कान कब दिखाओगे
सारे दुखो को दूर भगाओगे
प्रेम का रस कब फैलाओगे
मन की सुंदरता कब दिखाओगे
हे कृष्ण कहो, कब आओगे ।
दुष्टो का विनाश कर बचाओगे
कभी गोपीयो को भी सताओगे
शेषनाग पर सुंदरता से नाचोगे
बांसुरी की धून पर नचाओगे
हे कृष्ण कहो, कब आओगे।
वृंदावन में रास कब रचाओगे
चोरी चोरी माखन चुराओगे
मासूमियत से माँ को रूलाओगे
सभी को अपना तुम बनाओगे
हे कृष्ण कहो, कब आओगे ।
ममता बारोट
35 हे कृष्ण कहो -कब आओगे
मेरे प्रिय मोहन राधा के प्यारे नंद के दुलारे
हे कृष्ण कहो-कब आओगे।
बैठी हूं मैं भी आस लगाए,
बह रहा नैना नीर क्यों नहीं आए तुमको बुलाएं सूनी यमुना किनारे नंद के दुलारे
हे कृष्ण कहो-कब आओगे।
गोपियों से किया जो वचन वो निभाना
हे चक्रधारी कहीं भूल ना जाना,
यशोदा के लाला फिर छुपोगे कहां रे, नंद के दुलारे
हे कृष्ण कहो-कब आओगे।
आंखें हुईं मेरी सपनों से भारी ,
मुझको संभालो मेरे बांके बिहारी
ये दासी तुम्हारी तुम को पुकारे नंद के दुलारे
हे कृष्ण कहो-कब आओगे।
जा बसे मथुरा नगरी बृजधाम छोड़ के,
जन्मों जन्मों का नाता पल ही में तोड़ के,
ग्वाल बाल कान्हा तुमको पुकारे रे नंद के दुलारे
हे कृष्ण कहो-कब आओगे।
मंजू तंवर
36 हे कृष्ण कहो कब आओगे!
हे कृष्ण कहो कब आओगे?
कब आकर मुझे सताओगे!
अपनी नटखट शैतानियों से,
कब मेरा मानस चुराओगे।
कब अपनी नादानी दिखाओगे,
और माखन मेरा चुराओगे।
क्यों पुकार मेरी नही सुनते हो,
न अश्क मोती तुम चुनते हो।
खूब खेले तुम गोपिओ के संग,
क्यों न मुझे सखा तुम चुनते हो।
दुःख मेरे भी बहुतेरे है,
कुछ मेरे तो कुछ तेरे हो।
जब मैं मानु तुझे अपना ही,
फिर क्यों मुझसे तुम मुंह फेरे हो।
हे कृष्ण कहो!कब आओगे?
संग मेरे भी रास रचाओगे।
सुदामा को तुम दिए सखा सुख,
कब मेरे भी भाग्य जगाओगे।
देवकी-यशोदा के भाग खोले तुम,
ब्रजवासियो को मस्ती रंग घोले तुम।
कंस,पूतना और कालिया के
भी स्वर्ग द्वार हो खोले तुम।
कब हमारे भी भाग जगाओगे,
भवसागर पार लगाओगे।
कलयुगी इस तम को हरने,
कल्कि अवतार अपनाओगे।
हे!कृष्ण कहो कब आओगे?
हमे भी तार ले जाओगे।
भवसागर पार लगाओगे।।
गौरव सिंह घाणेराव
(अध्यापक,कवि,लेखक)
सुमेरपुर,राजस्थान
37 हे कृष्ण कहो कब आओगे
----------------------------------
हे कृष्ण कहो कब आओगे
फिर मुरली मधुर बजाओगे
हे कृष्ण कहो कब आओगे
कौरवों का अत्याचार बढ़ा।
दुर्योधन का अन्याय बढ़ा।।
धृतराष्ट्र को सच सिखलाओगे।
हे कृष्ण कहो कब आओगे।
गौ माता दुत्कारी जाती हैं।
हत्या कर मारी जाती हैं।।
गोपाल इन्हें कब बचाओगे।
हे कृष्ण कहो कब आओगे।।
पांडवों की सुमति कुमति बनी।
भाई - भाई में है भृकुटि तनी।।
कब गीता पाठ पढ़ाओगे।।
हे कृष्ण कहो कब आओगे।।
है द्रोपदी करुण पुकार रही।
लज्जा से हो शर्मसार रही।
बोलो कब चीर बढ़ाओगे।।
हे कृष्ण कहो कब आओगे।।
यशुदा माँ वियोग में रोती हैं।
देवकी जेल में बाट जोहती हैं।
कब इनको लाड़ लड़ाओगे।।
हे कृष्ण कहो कब आओगे।।
मामा शकुनि और मामा कंस।
हैं मिटा रहे ये दोनों वंश।।
कब इनको आप मिटाओगे।।
हे कृष्ण कहो कब आओगे।।
-------------------
आशुकवि प्रशान्त कुमार"पी.के."
पाली, हरदोई (उत्तर प्रदेश)
8948892433
38 गौ माता की श्री कृष्ण को पुकार
मैं आई द्वार तुम्हारे,मुझे भीख प्राण की दे दो।
मैं हूँ तुम्हारी माता,तुम लाल का फर्ज निभादो।
दुष्टो ने मुझे है घेरा,संघर्ष बना घनेरा
चाबुक की बेंत से मारे,मुझे दे दो तुम बसेरा
मेरी तड़फती मौत न देखो
दुष्टो से मुझे बचादो
मैं हूँ तुम्हारी माता,तुम लाल का फर्ज निभादो।
चिंता ने मुझे सताया,चाहत का मिला क्या साया
मेरे बालक तुमको मुझपे, क्यों तरस नहीं आया
अमृत सा दूध पिलाती
बैमोत न मर जाने दो
मैं हूँ तुम्हारी माता,तुम लाल का फर्ज निभादो।
यूँ तड़फ तड़फ कर मरना,क्या है अपराध मेरा
मैं फर्ज निभाऊ माँ का, अब कर दो मेरा सवेरा।
हे कृष्णा कहो, कब आओगे?
धरती पर वीर जगा दो
मैं हूँ तुम्हारी माता,तुम लाल का फर्ज निभादो।
स्वाति "सरू" जैसलमेरिया
जोधपुर(राजस्थान)
39 आधुनिक नारी की कृष्ण से पुकार
अब तक फिरती मारी मारी,
तरस रही अँखियाँ बेचारी,
बेसुध हो रही राधा प्यारी,
क्या कभी लौट न पाओगे
हे कृष्ण कहो कब आओगे।
कभी भटकती है वो दर दर,
कभी ढूंढती सारा जग भर ,
कभी तलाशे खुद के भीतर,
मीरा के विष के प्याले को,
क्या अमृत अब न बनाओगे,
हे कृष्ण कहो कब आओगे।
अब भी लडती वो अस्मिता खातिर,
दोष लगाते उस पर सब शातिर,
वो तुम्हें ही करे स्मरण आखिर,क्या
अब द्रौपदी की लाज न बचाओगे,
हे सखा कहो कब आओगे।
हर नारी को कुछ शक्ति दे दो,
हे गिरधर ये पीडा हर लो,
क्यूँ कलयुग की नारी का
तुमने छोड़ दिया है साथ,
कोई उठाये न उंगली उसपर,
न उठाये आँख या हाथ
कब यह संदेश सुनाओगे?
हे कृष्ण कहो कब आओगे।
सना...(दिल्ली)
40. इन्तजार श्री कृष्ण अवतार का
फिर एक बार कृष्ण तुमको, अवतार यहाँ लेना होगा !
हर पापी के पापों का अब, दण्ड तुम्हें देना होगा !
1. महाभारत में अर्जुन से, तुमने इकरार किया स्वामी !
मैं बार बार जन्मूंगा तब, जब थर्म की हो भू पर हानि !
अब वही प्रतिज्ञा पूरी करने, भूतल पर आना होगा !
फिर एक बार कृष्ण तुमको अवतार यहाँ लेना होगा
2. तेरी इस पावन भूमि पर अत्याचारों का डेरा है !
होती न कभी यहाँ सुप्रभात, बस चारों तरफ अंधेरा है !
इस तम को दूर भगाने को, तुम्हेँ ज्योति पुंज लाना होगा!
फिर एक बार कृष्ण तुमको.............
3. यहाँ हर दूशासन हर द्रोपति की, इज्जत लेने को है आतुर !
यहाँ हर दुर्योधन कपट जाल से, जुआ खेलने में चातुर!
इन कामी क्रूर कंटकों का, भूतल पर वध करना करना होगा !
फिर एक बार कृष्ण तुमको...............
4. मानव अपनी पहचान भूलकर, आज हुआ पागल जैसा !
हर शख्स अस्मिता खो बैठा, यह नंगा नृत्य हुआ सहसा !
भाई ही भाई से कहता, हर जुर्म तुम्हें सहना होगा !
फिर एक बार कृष्ण.....................
5. यहाँ नैतिकता आदर्श ज्ञान की, बात मात्र इतिहासों में !
रिश्वतखोरी या मारकाट, पढने मिलती अखबारों में !
मासूमों के हत्यारों को, कुछ तो प्रतिफल देना होगा !
फिर एक बार कृष्ण तुमको.......................
6. इस ऋषि मुनि की तपोभूमि को, हे जगदीश बचालो तुम !
बेजुबां अनाथों की रक्षा, करने को आज पधारो तुम ! " बेजान " मैं जान डालकर अब, अवतार तुम्हें लेना होगा !
हर पापी के पापों का अब, दन्ड तुम्हें देना होगा !
फिर एक बार कृष्ण तुमको.............
जगदीश " बेजान " व्याख्याता
भरतपुर
( स्वरचित और मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित)
41 हाइकु
हे कृष्ण कहो
कब तुम आओगे
भक्त पुकारे
कहां हो प्रभु
भक्त रोग से दुखी
जल्दी आ जाओ
करो उद्धार
बेड़ा करना पार
लो अवतार
भरोसा भारी
दया निधान प्रभु
संकट हारी
धरा दोहन
प्रकृति अत्याचार
भुगत रहें
भूल हमारी
करें क्षमा याचना
स्वीकार करो
अब सुधरे
गलतीयां सुधारे
दो वरदान
कृष्ण आ रहा
हो रहा उजियारा
खुशी अपारा
कलावती कर्वा "षोडशकला"
42 हे कृष्ण कब आओगे
हे मुरली मनोहर,
मन को हरण,
कब आओगे।
अखियां निहारे ,
दिन रात तुहारे,
मन के भीतर,भाव खिले,
हृदय की रिक्तियों को भरने,
कब आओगे कान्हा।
याद आ रही है वो बांसुरी की धुन
जिसपर मेरे पायलों की बजती धुन।
हे कान्हा अब आओगे?
वृन्दावन में गोपियां राह तके,
बाट जोहते मेरी अखियां थके।
हे कान्हा अब आओगे।
रेखा पारंगी
बिसलपुर पाली राजस्थान।
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43 हे कृष्ण कहो कब आओगे
हे मेरे साँवरे कान्हा अब आ जाओ
कब तक तेरी राह निहारे
बतलाओ मेरे साँवरे
ये नयना तेरे दर्श का दीदार चाहें
बता तूने कैसी लीला रचाई
बाँसुरी धुन बजा अपना जादू चलाया
ओ मेरे साँवरे कान्हा अब आ भी जाओ
कण कण तेरा रूप सवारें
हम सब हुए तेरे बिन बावरें
तेरी नटखट बाल रूप की लीला
मेरे इन अँखियों में है समाई
वृन्दावन में गोपियों संग तुमने रास रचाया
आओ मुरली मनोहर अपना दर्श दिखा जाओ
ग्वाल बाल संग टोली बना माखन चुराए
जीवन की नित क्रियाएं दिखाए
धर्म का अर्जुन को गीता सार बताए
हर युग में कर्म सत्य की राह दिखाए
हे देवकीनंदन इस जीवन का उद्धार कर जाओ ।
भावना गौड़
ग्रेटर नोएडा(उत्तर प्रदेश)
44 हे कृष्ण! कहो कब आओगे.
तेरी छवि को आंखन रक्खे हैं.
श्रद्धा के माखन रक्खे हैं.
खुला घर का आंगन रक्खे हैं.
माखन कब आकर खाओगे.
हे कृष्ण! कहो कब आओगे.
लगे पतझड़ सा वृंदावन है.
निष्प्राण सा ये गोवर्धन है.
मुश्किल में सारी गैयन हैं.
फिर से मुरली कब बजाओगे.
हे कृष्ण! कहो कब आओगे.
रिश्ता फिर सब, टूट रहा.
अपना ही अपनों को लूट रहा.
मुझसे मेरा सब छूट रहा.
भटकों को राह दिखाओगे.
हे कृष्ण! कहो कब आओगे.
चीरहरण से अब कोई,
रक्षा भी तो नहीं करता है.
अब उम्र की कोई सीमा नहीं,
हर इक को भक्षा करता है.
अनगिनत द्रौपदी के बोलो,
तुम वस्त्र कब लेके आओगे.
हे कृष्ण! कहो कब आओगे.
न धर्म के मर्म का ज्ञान कोई,
अब धर्म नहीं कोई करता है.
बिन पाने की इच्छा से,
अब कर्म नहीं कोई करता है.
पुनः धर्म संस्थापनार्थाय,
सुदर्शन कब उठाओगे.
हे कृष्ण! कहो कब आओगे.
सुनील गुप्ता 'श्वेत'
मोहाली, पंजाब
(जन्मस्थान-श्री अयोध्या जी)
45 कलयुग और दुराचार
आज धरा के कण कण में
अन्याय,पाप और अधर्म ही समाया है
दुराचार और दुष्कर्मों के बीजों ने
खून के आँसू धरती को रुलाया है
तुम तो हो सर्वज्ञ, सर्वत्र विद्यमान
क्या अब भी मुझे पुकारना होगा
हे कृष्ण कहो कब आओगे।
राम कृष्ण की इस पावन धरती पर
कंसों और पूतनाओं का ही बोल बाला है
कितने ही शकुनियों की चालों से
दुर्योधनों के गले विजय की माला है
ले समरभूमि में पंचजन्य
ह्रदय में अर्जुन के साहस भरने को
हे कृष्ण कहो कब आओगे।
नहीं होता कलयुग में चीरहरण मात्र
रोज निर्वस्त्र द्रौपदी होती हैं आज
बने दुशासन गिद्ध आज हवस मिटाने को अपनी
कर रहे नग्न पूज्नीय नारी की लाज
दुष्कर्म होते नहीं सभा में
निर्भीक, निडरता से चौराहों पर होते हैं
रंगे सियार और बगुला भगत सभी
धृतराष्टॄ,भीष्म और युधिष्ठिर बनते हैं
किंकर्तव्यविमूढ़ हो मौन साध कर बैठे हैं
करता आज पुकार मैं
हे कृष्ण कहो कब आओगे
सुधा बसोर
वैशाली
46 कब आओगे गिरधारी
.....कब आओगे गिरधारी.....
तुम कब आओगे मेरे बांके बिहारी
अपने नन्हे हाथों से मख्खन चुराने
अपनी मुरली की मधुर तान सुनाने
हम गोपियों के संग रास रचाने
हमारे साथ यमुना में डूबकी लगाने
हमारी पानी से भरी मटकी फोड़ने
गय्यन चराने, श्याम तुम कब आओगे
जब से गये हो कृष्ण तुम द्वारका
हाल बुरा है तुम्हारे पूरे ब्रज का
मधुबन के वृक्ष सब सूख गये है
कदम के झूले सब टूट गये हैं
यमुना की धारा भी आज मंद है
फूलों में नही रहा अब कोई गंध है
गायों का दूध देना भी अब बंद है
गोपियां कृष्ण के वियोग में सन्न है
ब्रज की हर गलियां आज वीरान है
भौरें, तितली,पंछी सब परेशान है
राधा, कृष्ण विरह में हो गई है बावरी
दिन भर रटती है कब आओगे मेरे गिरधारी।
उद्धव आए थे देने ज्ञान का उपदेश
राधा, समझ न सकी उनका यह संदेश
राधा के प्रेम को देख उद्धव हो गये दंग
टूट गया उनका भी आज ज्ञान का दंभ
कान्हा के प्रेम में रंगा था सारा वृन्दावन
ब्रज के कण कण में बसते हैं श्री राधेकृष्ण
उद्धव भी कृष्ण के प्रेम में हो गये मगन
कृष्ण प्रेम से बुलाने में जरूर आते हैं
हम कभी राधा के जैसे उन्हें नही बुलाते हैं
कोरोना रुपी कालिया ने आज फैलाया है फन
जान बचाओ, अब तो आ जाओ मेरे श्री कृष्ण
अनिल कुमार मिश्रा
कोरबा छत्तीसगढ़
47 हे कृष्ण कहो कब आओगे
तुम संग लग गई प्रीत कृष्ण
अब कैसे प्रेम दिखाओगे।
मोर मुकुट पीताम्बर पहने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
ममता माखन लिए खड़ी मैं
कब यशोदा का मान बढ़ाओगे।
मात-पुत्र का प्रेम बढ़ाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
राधा - सी मुस्कान हृदय में
कब प्रेम की प्रीत निभाओगे।
राधा को राधे बुलवाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
भजन तुम्हारे नित उठ गाऊं
कब भक्ति का मान बढ़ाओगे।
मीरा को तुम दरश दिखाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
चंचल चितवन, मीठी वाणी
मुरली मनोहर अति सकुचानी।
मुरलीधर बन तुम तान सुनाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
तू प्रकाश मैं रात अंधियारी
अब कैसे दरश दिखाओगे।
जग में उजियारा फैलाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
न मेरे ऐसे पुण्य करम
चरणों में स्थान मै पाऊं।
भवसागर से पार लगाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
निष्प्राण हुए इस सुप्त हृदय को
कैसे चेतन कर पाओगे।
निष्प्राणो में प्राण जगाने
हे कृष्ण कहो। कब आओगे?
अर्चना बामनगया
ग्वालियर। मध्य प्रदेश।
48 हे कृष्ण कहो, कब आओगे
हे कृष्ण कहो, कब आओगे ?
गऊओं की गौरव गरिमा का,दधि-माखन कब खाओगे ?
हे चन्द्रवंश के चन्द्र,चराचर जगती के आधार तुम्ही।
हो मीरा के नटवर नागर, राधा के प्राणाधार तुम्ही।।
जमुना-जल,निर्मल भर अँजुरी, सौगन्ध प्यार की खाओगे।।
हे कृष्ण कहो...
सर सरिता उपवन सूने हैं, ये पनघट तुम्हें पुकार रहे।
प्रेम की धुन कब गूँजेगी, वंशीवट तुम्हें पुकार रहे।।
महारास की महारात्रि में,मुरली मधुर बजाओगे।।
हे कृष्ण कहो...
नारी की लाज भंग होती,सब भूल चुके हैं अनुशासन।
धर्मराज को घेरे हैं, शकुनि,दुर्योधन, दुःशासन।।
करुणा का अक्षय चीर बढ़ा, कृष्णा की लाज बचाओगे।।
हे कृष्ण कहो...
धीर-वीर अभिमन्यु फँसे हैं, चक्रव्यूह के घेरे में।
वैर बढ़ रहा भाईयों का, स्वारथ तेरे-मेरे में।।
पार्थ सारथी बन कर,महासमर का शंख बजाओगे।।
हे कृष्ण कहो, कब आओगे ?
मनोज शर्मा मधुर
रूपबास, भरतपुर, राज०
49 हे कृष्ण कहो कब आओगे
फूलों से गुथ माला लेकर विविध मिष्टानो की थाल।
चन्दन, कुम्कुम, बांसुरी मोर चढाऊँ आजा हे नन्दलाल।
माखन मिश्री हलवे का भोग लगाने आजा हे बाल गोपाल।
कभी अपने भक्तों का देख तो ले जगत में कैसा है हाल।
तुझ संग गोपियाँ क्या वृन्दावन कितना था खुशहाल ।
मुट्ठीभर चावल से हर ली विपदा सुदामा कितना था बेहाल।
अब तुझबिन कितनी निर्दयता संसार कितना है बदहाल।
हे मुरलीधर नटनागर तुम गीता का ज्ञान बताने आ जाओ।
हे संतृप्त देवेश्वर तुम भटके को राह दिखाने आ जाओ ।
हे दामोदर कृष्ण हे कृष्ण कहो कब आओगे
फूलों से गुथ माला लेकर विविध मिष्टानो की थाल।
चन्दन, कुम्कुम, बांसुरी मोर चढाऊँ आजा हे नन्दलाल।
माखन मिश्री हलवे का भोग लगाने आजा हे बाल गोपाल।
कभी अपने भक्तों का देख तो ले जगत में कैसा है हाल।
तुझ संग गोपियाँ क्या वृन्दावन कितना था खुशहाल ।
मुट्ठीभर चावल से हर ली विपदा सुदामा कितना था बेहाल।
अब तुझबिन कितनी निर्दयता संसार कितना है बदहाल।
हे मुरलीधर नटनागर तुम गीता का ज्ञान बताने आ जाओ।
हे संतृप्त देवेश्वर तुम भटके को राह दिखाने आ जाओ ।
हे दामोदर कृष्ण कहो कब आओगे, भेज रहीं हूँ नेह निमंत्रण।
आ जाओ हे मनोहर सर्वात्मा जग का कब होगा कल्याण।
अब निर्धन का होता नहीं कोई करूणानिधि न दाता मित्र।
उसका स्वाभिमान नहीं सुरक्षित न रहता निर्मल हीं चरित्र।
तेरे पूजन तेरे अनुष्ठान मंदिरों एवं पुस्तकों में बचे सचित्र।
व्याभिचार, भ्रष्टाचार,मँहगाई, दरिंदगी धोखाधड़ी है सर्वत्र।
तेरी बनाई ये दुनिया कितनी हो गई फिर विचित्र।
भक्तों के रक्षण हेतु आना होगा तुझे सज गया फिर कुरुक्षेत्र।
आतंकियों से बचे, जी सके ये जीवन स्वतंत्र बदलो प्रभु नक्षत्र।
हे संतृप्त देवेश्वर तुम सकल विश्व से खोई आस जगाने आ जाओ।
हे निर्वीलिप्त योगेश्वर तुम पापियों का संहार करने आ जाओ ।
हे जगतपालक कृष्ण कहो कब आओगे भेज रहीं हूँ नेह निमंत्रण।
आ जाओ हे मनमोहन हे सर्वात्मा जगत का कब होगा कल्याण।
अश्मजा प्रियदर्शिनी
पटना, बिहार
50 "हे कृष्ण कहो,कब आओगे"
******
कर मुरली,मुख माखन लेकर,
भक्त हिया कब हर्षाओगे।
ग्वाल,गोपिका,राधा ढिंग,
हे कृष्ण कहो तुम कब आओगे।
■
आज पुनः वसुदेव देवकी,
संप्रदाय के कंस ग्रसित हैं।
तव अक्रूर,क्रूर हाँथों की,
कठपुतली बन त्रास-त्रसित है।।
■
कब आएगी जनम अष्टमी,
सत् को कब तक तरसाओगे।
असत् वेदना परित्राण हित,,
कृष्ण कहो,तुम कब आओगे।।
■
आज पुन:दुस्साशन,प्रतिदिन,
पाँचाली का चीर खींचता।
वस्त्रहीन करने को आतुर,
कामातुरता पौध सींचता।।
■
कब तक सत्य-संबली पाँडव,
गर्दन प्रणवश झुकवाओगे।
दुर्योधन मद-मर्दन के हित,
कृष्ण कहो,तुम कब आओगे।।
■
आज शल्य मामा लालच वश,
कौरव सेनापति बन बैठे।
नेत्रहीन धृतराष्ट्र,आज फिर,
आँख दिखाता,बैठा ऐंठे।।
■
हे माधव,कौन्तेय-पार्थ रथ,
अश्व-रज्जु कब अपनाओगे।
कद-विराट ,हित ज्ञान प्रकाशन,
कृष्ण, कहो,तुम कब आओगे।।
■
जरासंध फिर आज तुम्हारी,
मथुरा को घेरे बैठा है।
बार बार मुंहकी खाकर भी,
कोरोना बनकर ऐंठा है।।
■
हे मधुसूदन, बन रिपुसूदन,
मुचकुंदी दृग खुलवाओगे।
धन्वंतरि से औषधि लेकर,
कृष्ण कहो,तुम कब आओगे।
संतोष श्रीवास्तव"विद्यार्थी"
मकरोनियाँ, सागर, मध्यप्रदेश
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