प्रतिध्वनि समूह प्रतियोगिता #9: अनमोल पाती भाई/ बहन के नाम

दिनांक: 02-03/08/2020

दिन: रविवार

विषय: रक्षाबंधन

विधा: पत्र


रक्षाबंधन


प्रिय भाई,


सादर प्रणाम,


रक्षाबंधन का ये त्योंहार , भाई बहन का गहरा प्यार ।

मिलो की दुरी दोनों में पर, मन से बंधे अनुपम तार ।।

लोकडाउन की इस घड़ी में भैया मैं आ नही पाऊंगी

दूर हूँ शहर से प्रेम धागा बांध नही पाऊंगी

बहुत चाह से खाते हो मेरे हाथ के मिष्ठान

इस बार भैया बनाकर भेज नहीं पाऊंगी

थोड़ा मुश्किलों का ये दौर है भाई इस हमें पार करना होगा

थोड़ी सावधानी व सहज हिम्मत से खुद को भरना होगा

है दिलों में प्यार के अहसास खूब अपने जिसे हम अंतर्मन से समझना होगा

कुंकु, मोली, राखी पास में पर परिस्थितियों से खुद को सुरक्षित रखना होगा ।

सच कहूं भैया नियति के हाथों ये है सब खेल

उनके बिना सम्भब नही अपनो का मेल

पर भैया चिंता न करना जल्दी कोरोना से मुक्त हो जाएंगे

रखी के इस पावन पर्व को फिर मिलकर मनाएंगे

प्रेम का ये मधुर रिश्ता जिसमे होता अटूट विश्वास ..

भाई बहन के इस बंधन का होता एक अलग अहसास...

जहाँ दुरिया कितनी भी हो पर मन से होते है वो पास..

रक्षाबंधन से बंधा ये दिन ही होता है कुछ खास .

दूर हो भाई मेरे पर आपका मेरे हृदय में वास

हृदय में वास


आपकी बहन

स्वाति 'सरु' जैसलमेरिया

जोधपुर (राजस्थान)




एक अनमोल पाती भाई के नाम


मेरे प्यारे भैया,


सदैव प्रसन्न रहो और दीर्घायु हो!


सभी की कुशलता की कामना करती हूंँ कि भाभी और बच्चों सहित तुम सप्रेम एवं सानंद रहो।भैया कोरोना वायरस का कहर अभी कम नहीं हुआ है ,पांँच महीने होने को आए तुम सभी से मिले हुए। वो तो शुक्र है तकनीक का कि मोबाइल पर वीडियो कॉलिंग से बातचीत होती रहती है। बहुत मन था कि शायद रक्षा बंधन तक सब ठीक हो जाए तो इस त्योहार पर हम अवश्य मिलेंगे लेकिन अभी इसके खतरे को देखते हुए मैंने घर आने का विचार छोड़ दिया है। भैया, रक्षा बंधन प्रेम का ऐसा पर्व है जब रेशम की डोर से भाई बहन की रक्षा के और बहन भाई को दीर्घायु रहने के पवित्र वचन से स्नेह बद्ध होकर मंगलकामनाएंँ करती है। राखी सूत्र भाई बहन के अटूट स्नेह बंधन का प्रतीक है लेकिन इस बार मैं यहीं से तुम्हारे सुरक्षित एवं स्वस्थ रहने की ईश्वर से प्रार्थना करूंगी । कोरोना की वजह से इस बार यह दूरी ही हम सभी के लिए रक्षा कवच है। इसलिए अच्छा होगा कि हम इस पर्व को इस बार घर पर रहकर ही मनाएंँ और सभी के लिए प्रार्थना करें कि इस कोरोना से मुक्ति शीघ्र मिले और सभी सुरक्षित रहें। भाभी,तुम घर में पकवान और मिठाई बनाकर सबको खिलाना। आशा करती हूंँ शीघ्र ही कोरोना से छुटकारा मिलेगा और हम सभी फिर से पहले की तरह मिलेंगे। भाभी, हर्ष,वंश और ट्विकंल को मेरा स्नेहाशीष!


रक्षा बंधन की बधाई एवं शुभकामनाएँं!


तुम्हारी बहना


चंचल हरेंद्र वशिष्ट

आर. के. पुरम,नई दिल्ली




भैया


मेरे प्यारे भाई,

मुझे तुम्हारी कितनी जरूरत थी, कितनी जरूरत है ये शब्दों में आ जाये, ये संभव ही नही। तुम नही जानते कि एक बहन के दिल के अरमान क्या होते हैं। काश तुम मेरे छोटे भाई होते तो हमेशा तुमसे लड़ती लेकिन बहुत प्यार भी करती। तुम होते तो हर साल इस दिन मेरी आंखों से ये अरमान पानी बनकर नही निकलते। पूरे घर मे खूब हंगामा होता। किसी लड़ना मेरा ऐसा अधिकार होता जिसको दुनिया की कोई ताकत नही छीन पाती। काश तुम मेरे बड़े भाई होते तो बहुत लाडली होती, खूब नखरे करती, खूब फायदा उठाती तुम्हारा, अपनी गलती पर तुम्हारा नाम लेकर बच जाती। पड़ौस में जब दोनों भाई बहन लड़ते हैं और दोनों मम्मी पापा से डांट खाते हैं तो तुम्हारी बहुत याद आती है। लेकिन, सोच कर क्या फायदा। तुम नहीं हो, तो नहीं हो। शायद मेरी आंखें हर साल इस दिन भीगने के लिए ही बनी है। अब क्या हो सकता है। जो है वो बदल नही सकता न।


हे मुरलीधर! तुमने क्या समझा तुमने भाई नहीं दिया तो मैं हार जाऊंगी। याद है न वो राखी का दिन जिस दिन रोते हुए देखकर पता नही क्यों तुमको ही राखी बांध दी थी। अब तुम बचकर दिखाओ मुझसे। अब मुझे छोड़कर कहाँ जाओगे तुम, आखिर तुमको हर साल मेरे पास तो आना ही होगा।


आंखों में आशा के मोती लिए


तुम्हारी बहन

नीलू



अनमोल पाती भाई की बहन के नाम

दिन- रविवार 2 अगस्त 20


मेरी प्यारी छोटी बहना !


लगभग 3 दशक बीत चुके आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि हम भाई-बहन रक्षाबंधन पर ना मिले हो। इस पावन पर्व पर मेरी राजदुलारी बहना मेरा इंतजार करती होगी मैं यह अच्छी तरह से जानता हूं। इस तुम्हारे नहीं आने से मेरी कलाई पहली बार सुनी रहेगी। इस दर्द को मैं ही समझ सकता हूं। परिस्थितियां मुझे भी तुम्हारे पास नहीं आने दे रही ।मुझे पहली बार महसूस हो रहा है कि मेरी बहना का रिश्ता इतनी अधिक दूर क्यों किया ? लेकिन तुम अपनी दुनिया में खुश हो । तुम्हें अच्छा घर परिवार मिला, तुम्हें किसी बात की कोई कमी नहीं है। सब जानकर देखकर मन बड़ा खुश होता है। बड़ी तसल्ली मिलती है।

कोरोना काल की अपनी सीमाएं हैं। हमें इसका पालन करना चाहिए । शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश का पालन हमारे ही हित में है। हमने तो यह वह जमाना भी देखा है जब केवल लैंडलाइन फोन ही चुनिंदा लोगों की बातचीत का जरिया होता था। घंटो बातें नहीं होती थी चिट्टियां भी समय पर नहीं पहुंच पाती थी। आज की इस संचार क्रांति ने हमें कितना पास ला दिया है। आज हम रोजाना दूसरे को देख लेते हैं । बात हो जाती है । फिर भी प्रत्यक्ष मिलन का आनंद अलग होता है ।

इस बार हम लाइव रक्षाबंधन कार्यक्रम में डिजिटल राखी का त्यौहार मनाएंगे। विश्वास है तुम्हारे घर सभी सानंद होंगे। सभी को मेरी ओर से यथा योग्य कहना। यह चिट्ठी भी मैं सोशल मीडिया के माध्यम से तुम्हें भेज रहा हूं ।


तुम्हारा अपना भाई


रमेशचंद शर्मा-इंदौर






अनमोल पाती बहन की भाई के नाम



पूज्य भइया,

चरण स्पर्श


आज रक्षाबंधन का त्योहार है ,जो भाई- बहन के अटूट स्नेह बंधन का परिचायक है! इस अवसर पर मैं आप के शुभमंगल कामनाओं की आकांक्षी हूँ!


भईया सर्वविदित है कि, इस रक्षाबंधन पर हम एक दूसरे के समक्ष वैश्विक महामारी कोरोना के मद्देनजर उपस्थित नही हो पाए ! इस संक्रामक बीमारी के वजह से अभी भी जगह-जगह स्वास्थ्य की दृष्टि से लॉक डाउन की प्रक्रिया जारी है!  भइया हमारा यह निस्वार्थ और मजबूत प्रेमबंधन किसी त्योहार का मोहताज नही है। हम दोनों अपनी भावनाओं और मन से हर पल जुड़े है, और जुड़े रहेंगे! 


अगले वर्ष आपकी कलाई पर रक्षा सूत्र जरूर बाँधने के लिए जरूर आपके समक्ष उपस्थित रहूँगी ! और जोर -शोर से त्योहार का आनंद लूँगी और सुखद अनुभूतियों को अपने हृदय पटल पर अंकित कर लूँगी!


आज भी बचपन मेआपके साथ बिताए क्षण हमारे स्नेह बंधन को एक मजबूती प्रदान करते हुए निरंतर अटूट बंधन में बांधे हुए है! 


आशा करते है हम जल्द ही मिलेंगे एक सुरक्षित और स्वास्थ्य वातावरण में! 


सम्पूर्ण विश्व के शुभमंगल कामनाओं के साथ सुरक्षा पूर्ण दिवस की अभिलाषा में,


आपकी बहन

शशिलता पाण्डेय






अनमोल पातीबहिन की भाई के नाम

दिनांक 02.08.2020



प्रिय अनुज


ठेर सारे स्नेहिल प्यार के साथ बहुत बहुत शुभाशीष।ईश्वर से कामना करती हूँ कि तुम स्वस्थ एवं सुखी होंगे।सर्वप्रथम रक्षा बन्धन की बहुत बधाईऔर शुभकामाएं है । वैश्विक महामारी के कारण आज रक्षा बन्धन के पावन त्योहार पर तुम से इस बार मिलना न हो पायेगा ।इसलिए पत्र के साथ राखी भेज रही हूँ।

रक्षा बन्धन का त्योहार है ऐसा

नही दूजा कोई इसका जैसा।

धागे की एक डोर है ये

जन्म नाल की छोर है ये।

एक कोने से मै बंधी

दूजे से तुम बंधे।

जीवन भर बंधे है रखती

और येअहसास दिलाती।

एक ही रक्त की बूँद है हम

एक माली के फूल हैं हम।

ईश्वर से करती हूँ विनती

क्षमा करे भाई की हर गलती।

कुशल रखे तुम्हारा घर आंगन

सदा रहे तुम्हारे जीवन में सावन।

सुख समृद्धि आये हमारे घरों में

यू रहें हम सदा ह दूसरे के दिलो में।

रक्षा बन्धन की बधाई के साथ बहुत बहुत शुभकामनाये।


तुम्हारी दीदी

सन्नू नेगी

गौचर, चमोली





बड़े भैया


ये वक़्त भी गुजर जाएगा। आप मेरे पिता समान है, पिताजी के गोलोक के पश्चात्‌ आपने सदैव मेरे हर खुशियों का ध्यान रखा। मुझे बहुत प्यार दिया, ऐसे भाई का मिलना मेरे अच्छे कर्मों का फल है। मेरी आँखे नम है क्योंकि कोरोना की महामारी से आपका जुझना बड़ी दुखदायी परिस्थिति है।ऐसे पावन त्यौहार के अवसर आपकी याद आना स्वाभाविक है। राखी का त्यौहार हर वर्ष आता है, अगले वर्ष मना लेंगे, बस आप सुरक्षित रहे, इसी अभिलाषा के साथ...


आपकी प्यारी बहना,


मधु भूतड़ा

गुलाबी नगरी जयपुर से






'अनमोल पाती भाई के नाम'


ना कोई वचन ना दूजा कोई प्रमाण है,

खूबसूरत डोर से बंधा बहन का प्यार है।


सलामती के खातिर रक्षा डोर बांध रही,

मेरे प्रिय भाई ये तो बहना का अधिकार है।


टूटे रूठे जग जहाँ सब; एक तेरे साथ से,

मेरे जीवन का हर सपना तुझसे साकार है।


स्नेहिल रिश्ता सबसे खास भाई बहन का,

किसी हिस्से में ना बदलाव ना ही तक़रार है।


तू सदा रहे सलामत यही दुआ बस रब से,

अंधियारा छू ना सके तुझसे सारा परिवार है।


नेहा यादव

लखनऊ उत्तरप्रदेश।






मेरा पत्र-सेना के भाइयों के नाम


मेरे प्यारे भाइयों


जय हिन्द


मेरे प्यारे भाइयों,सादर नमन मुझे पता है आज आप सभी राखी के पावन पर्व पर अपनी बहन को याद कर रहे होंगें।इसी को ध्यान रख कर मैं आप सबको रक्षा सूत्र भेज रही हूँ।हम सब बहनों की दुआएं इन धागों में हैं,स्वीकार कर

अपनी बहनों का मां रखना।

भाई आप सब तन मन से हमारी और देश की आन मान शान बढ़ा रहें हैं।आपकी देशभक्ति,बलिदान को ये देश सदैव याद रखेगा।

आपकी याद में

आया आया राखी का त्यौहार रक्षाबंधन प्यारा,

धागों के बहाने याद दिलाए बहना,

रक्षाकरना भैया दानव है सारा जमाना।

जब आन पड़ी कर्णावती पर,हुमायूँ को भाई कह पुकारा,

बांध के धागा प्रेम का भाई बहन का धर्म निभाया।

तुम भाई मेरे मैं भी हूँ भारत की बेटी,

रक्षाकर इस माटी की लाखों बहनों का सिंदूर बचाना।

लौट के एकबार फिर ये धागा बंधवाना,

आया रक्षाबन्धन भैया प्यारा तोहफा फिर ले आना।।


आप सबकी बहन


गीतांजलि वार्ष्णेय

बरेली,उ.प्रदेश






करोना काल की राखी

नमस्कार ,


भैया और भाभी आप सभी कैसे हो, साल भर जिस दिन का मै इंतज़ार करती हो वो दिन "राखी " का आ ने वाला है । हर दम मेरा हाथ पकड़ के पग पग आप ने सम्भाल, और राखी के दिन मै आप का हाथ पकड़ कर आप के उज्वल भविष्य की कामना करती आई हो, बच्चपन की ये रीत , कैसे इस करोना काल मे थम गई है। दिल से चाहते हुऐ भी मै अपने मायके के घर के आँगन मे नही आ सकती। सही मायने मे जो रीत बचपन से पूरी करती आई हो उसका उपदेश घर न आ कर आप की और आप के परिवार की सलामती की कामना कर रही हो ताकि इस महामारी से मेरे भाई भाभी मुक्त रहे ओर सब फिर से मिल कर आने वाले वर्षो मे इस त्योहार को सब साथ मिल कर मना गए। भैया उमीद करती हो हमारा प्यार कभी कम ना हो, और आप की याद मे इस राखी मेरे आखो से आँसू ना बहे ,

करोना का काल भी कट जायेगा

भैया तेरा प्यार मेरी हर तकलीफ हर जायेगा


गीता राजेंद्र मिश्रा

अलवर






प्यारे भाई-बहन


मेरे प्यारे भाई-बहन,


इस छोटे भाई का प्रणाम। आशा करता हूँ कि घर में सकुशल होंगे। महामारी के इस दौर में मुझे घर न आ पाने और आपके हाथ से मिठाई न खा पाने का विषाद है परंतु ख़ुद के साथ ही आप सभी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए यह नितांत आवश्यक है कि मैं इस वक़्त वहाँ न आऊँ। रक्षाबंधन के इस पावन त्यौहार की आप दोनों को बधाई। अरे हाँ! दीदी आपका ख़ूबसूरत प्यार मुझे आज ही डाकिया वाले भैया ने दिया। राखी और आपकी दी हुई शर्ट बेहद सुंदर है क्योंकि ये केवल राखी नहीं अपितु ये तो आपका निश्छल प्रेम है इस छोटे भाई के लिये। भगवान करे हम सब इस महामारी के दौर से उबरें और हम तीनों भाई-बहन फिर से मस्ती करें और साथ में वक़्त गुज़ारें। माँ को प्रणाम कहना और बताना कि उनका छोटा बेटा सकुशल है। चिंता करने की कोई बात नहीं है। मैं यहाँ पूरे एहतियात के साथ रह रहा हूँ। जल्द ही माहौल सही होने पर घर आऊँगा तब अपनी प्यारी बहन को छोटे भाई की तरफ़ से सुन्दर तोहफ़ा भी लाऊंगा। माँ-पापा का ख़्याल रखियेगा और ध्यान रखिएगा।


आपका दुलारा कनिष्ठ भाई

जीत





बहन का प्रेम राखी


राखियां राखियां राखियां ये राखियां।

भैया की कलाइयों पे ,बहनों की ये राखियां।

प्रेम का प्रतीक हैं, विश्वास की हैं झाकियां राखियां राखियां राखियां ये राखियां।

राखी के दिन का ,बहन इन्तज़ार करती हैं

भाई के लिए दुआ ये बार बार करती हैं।

लंबी उम्र हो भाई की खुशहाल सदा ही वो रहे।

प्यार का त्योंहार ये युगों युगों युगों तक

रहे।

उपहार की है लालसा न रुपियो पैसो की है भ्रांतियां।

राखियां राखियां राखियां ये राखियां।

सरहदों पे जो भाई हैं ,जो सुनी हैं

कलाइयां।

राखियां तरस रही, आंखे हैं बरस रही।

फिर भी दुआएँ लबो पर है आएगा मेरा भैया।

देश की वो आन है वो शान है वो मान है।

मेरा प्यारा भैया भारत माँ का अभिमान है।

देश के नाम पर कुर्बान है ये राखियां।

राखियां राखियां राखियां ये राखियां


सोनिया प्रतिभा तानी







दीदी


अरे दीदी तेरे बिन,

आती नहीं हमें नींद,

लोरी सुनने के बदले,

सो जाता हूं तारे गिन-गिन।

ना जाने मैं क्यों हुआ बड़ा,

छीना गया तेरी आंचल का सहारा,

बांध दिया गया एक आंचल के सहारे,

हम दोनों के बीच वो आ गए।

तू भी तो कम नहीं,

हम सबके बीच रही नहीं,

चली गई रश्म निभाने अपने ससुराल,

कभी ये नहीं सोची हमें कौन करेगा दुलार।

साल भर चिट्ठी-पाती से,

पूछती हो हाल-खबर,

सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही,

आती हो नजर।

एक ही दिन में,

सालों भर की प्यार बांटती हो,

क्या खजानों में भर भर कर प्यार,

मेरे लिए रखती हो।

यह भाई का पाती,

दीदी तेरे नाम,

रहना हमेशा सलामत,

मेरी दुआओं के साथ।


श्रवण कुमार





मेरा पत्र


मेरे भइया ,

तुम जब से मुम्बई से गये हो, ये मायानगरी मुम्बई जाने क्यों वीरान सी लगने लगी है। सारी हलचलें, सारी कायनात वैसी ही तो है ,पर सिर्फ एक तुम्हारे यहाँ से जाने से कुछ तो अधूरा सा लगता है। सोचा था अबकी रक्षा- बंधन पर अचानक से आकर तुमको अचंभित कर दूंगी। लेकिन इस वैश्विक महामारी के दौर में सब कुछ उथल पुथल हो गया।

तुम्हे याद है न ,हम हर रक्षा - बंधन में एक पेड़ लगाते हैं साथ मिलकर। अबकी वो पेड़ मैने अकेले ही लगाया है। वो पेड़ एक आम का है 15 साल बाद वो फल देने लगेगा। आशा करती हूँ कि अगली साल हम साथ में पेड़ लगाएंगे।

तुम इस दौर में अपना खूब ख्याल रखना मेरे भाई । हम दोनों बहनें अपने दुलारे भाई के बारे में यही कहना चाहूंगी।

"मेरे भैया मेरे चंदा तेरे बदले में जमाने की कोई चीज़ न लूँ।"


तुम्हारी बहन

कल्पना श्रीवास्तव





मेरा पत्र मेरी अनदेखी दीदी के नाम।


मेरी प्यारी दीदी।

सादर प्रणाम।


मैंने तो अक्सर आपको अपनी कल्पनाओं में ही देखा है क्योंकि आप तो मेरे इस दुनिया में आने के पहले ही दुनिया को छोड़ चुकी थी। माँ अक्सर बताती थी हैं कि मैं बचपन में कुछ-कुछ आप जैसा ही दिखता था। मुझे आपसे बहुत ही शिकायत है कि आपने मुझसे किस जन्म का बदला लिया दीदी। क्या मैं इतना बुरा था कि मेरा सान्निध्य आपको पसंद नहीं था? मैं अक्सर ही ईश्वर से इस प्रश्न का उत्तर माँगता रहता हूँ मगर उन्होंने भी कभी मेरे इस सवाल का उत्तर नहीं दिया। मुझे लगा कि आप मेरे घर दोबारा से मेरी बेटी बनकर आओगी परन्तु मेरी ये इच्छा भी पूरी नहीं हुई। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप अगले जन्म में मुझसे बाद आना जिससे कि मैं आपको कहीं भी जाने नहीं दूँगा दीदी।

आपके लिए कुछ पंक्तियाँ हैं दीदी।

बचपन से ही कल्पनाओं में आपको पाया है,

हर रक्षाबंधन आपके राखी का स्पर्श अपने कलाई पर महसूस किया है,

माथे पर मेरे तिलक लगाते हुए आपके उँगलियों की छुअन महसूस किया है,

सदा ही अपनी ही परछाई में आपको ढूँढने का प्रयास किया है।


आपका अभागा भाई

बिप्लव कुमार सिंह






रक्षाबंधन का पर्व


श्रद्धेय बहना।

सादर प्रणाम,


आप,मेरे जीजाजी और भांजे सकुशल होंगे ऐसी आशा है।


आपका भेजा हुआ रक्षासूत्र मुझे आज प्राप्त हुआ,जिसे देखकर आँखे भावो से भारी हो उठी व स्नेहिल अश्रुधारा बह निकली।हर बार की तरह इस बार भी सोचा था कि आपके करकमलो से रक्षासूत्र बन्धवाऊंगा पर क्या करू कोरोना महामारी के चलते मैं अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए वचनबद्ध हूँ।मेरी कोविड 19 नियंत्रण कक्ष में ड्यूटी है,जिसमे आप जैसी ही सेंकडो बहिनो तक उनके भाइयो की सुचना का आदान प्रदान करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है।जिसे करके मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूँ।

मुझे आशा ही नही यकीन है कि आप भी मेरी इस सेवा से बेहद खुश होगी।क्योंकि शताब्दियों में एक बार आने वाली ऐसी महामारी में देश की सेवा करने का सौभाग्य आपके भाई को नसीब हुआ।

मैं तो बस यही चाहता हूँ कि हमारा देश जल्द से जल्द इस महामारी से उबर जाए और आप और मेरे जैसे भाई बहन बेखौंफ होकर रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व को मना सके।जैसे ही हालात सामान्य होंगे मैं शीघ्रातिशीघ्र आप सभी से भेंट करने आऊंगा और हम मिलकर खूब बाते करेंगे।

बहना आप अपना और अपने घरवालो के साथ मेरे भांजो का इन विषम दिनों में विशेष ध्यान रखना।

आदरणीय जिजोसा को मेरा चरण स्पर्श कहना। भांजो को प्यार देना।


आपका भाई

गौरव सिंह घाणेराव





प्यारी बहना को भाई का संदेश


.......श्री........

मेरी प्यारी बहन,

ढेर सारा प्यार व आशीष

सूना सूना है आज मेरा घर अंगना

इस राखी में जो तू नही आई बहना

मम्मी पापा भी आज बुझे बुझे से हैं

घर के सब बच्चे रूठे रूठे से हैं

तेरी भाभी भी आज तेरी राह तकती है

तेरी मेंहदी हाथों में उसके खूब रचती है

मुझे भी आज तेरी कमी खल रही है

ये पहली राखी है जिसमें तू न मिल रही है

तू कहीं भी रहे राखी पे मुझसे मिलने आती रही है

अब समय की ये कैसी घड़ी है एक बहना

राखी पे भाई से मिलने को तरस रही है

पर मेरी प्यारी बहना तुझसे मेरा है यही कहना

इस कठिन घड़ी में तू अपने घर में सुरक्षित रहना

सूना सूना है आज..........

इस राखी में जो तू...........

तेरे आने से घर में त्योहार सा लगता है

मम्मी,पापा,बच्चों में अलग उत्साह दिखता है

मम्मी तेरे पसंद की रसोई बनाती है

तो बच्चे पीजा बर्गर का लुफ्त उठाते हैं

पापा जी भी बहुत खुश नजर आते हैं

तेरे साथ हम बचपन में झांक आते हैं

घर में सदा यूँ ही आकर खुशियां बरसाती रहना

सूना सूना है आज मेरा..........

इस राखी में जो तू नही..........


तेरा भाई 

अनिल कुमार मिश्रा

कोरबा छत्तीसगढ़







अनमोल पाती बहन की भाई के नाम


तिथि - 02/08/2020


राम राम भैया,चरण वन्दन


राखी पर स्नेह भरी चिट्ठी प्यारी छुटकी की ओर से राखी पर आपको स्नेह की राखी त्यौहार मनाने आ रही हैं अक्षत कुमकुम और चंदन से सन्देशा ला रहीं,मैं कुशलमंगल से हूं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ आप भी कुशलमंगल से होगें, इस बार राखी ने कुछ भावुक कर दिया है. समय ने कैसा चक्र चलाया इस कोरोना ने पूरे विश्व को अपनी आगोश में लेकर समय की परिस्थिति में मैंने राखी नही भेजी जानबूझकर कर,जो भी मेरी राखी लेकर आप तक आते उनकी भी तो स्वास्थ्य की जिम्मेदारी हमारी ही तो उनकी चिंता भी थी.

मैं जानती हूँ आप मेरी राखी का बहुत इंतज़ार करेंगे,रक्षा सूत्र से मेरे भाई की रक्षा करना,दीपक की ज्योति से मेरे भैया की बलाए उतार, अक्षत चंदन से अपना मान बढ़ाना, ये निःस्वार्थ प्रेम की ज्योति सदा हमारे हृदय में बनाए रखना,इसी आशा से तेरी छुटकी सदा इस बंधन को अंतिम पल तक निभायेगी।

भैया आप इस संकट की परिस्थिति में बिल्कुल ना घबराना, जल्दी ही सब अच्छा होगा बस धैर्य बनाए रखना, अगली राखी पर फिर से मिलेंगे,बस अब अपनी पाती को विराम दूँगी, अपना ख्याल रखना आपकी छुटकी.....।


भावना गौड़

ग्रेटर नोएडा(उ. प्र)







अनमोल पाती भाई की बहन के नाम


तारीख- 2/8/ 2020


मेरी प्यारी बहना,


सस्नेह


आज रक्षाबंधन का त्योहार है ।जो भाई-बहन के रिश्ते को और भी दृढ़ता प्रदान करता है । अब की बार एक बार फिर आपको इस हक से वंचित रहना पड़ेगा और मेरी भी कलाई सूनी रह जाएगी। क्योंकि अगर मैं अपनी कलाई पर राखी बांधी देखने का लालच करूँ तो सैकड़ों बहनों के हाथों में राखी यूँ ही कोरी रह जाएगी ।अनेकों सुहागिने अपने पिया से बिछड़ जाऐंगी।

अब की बार मेरी पोस्टिंग गलवान घाटी पर है और आप ने ही सिखाया है कि देश सुरक्षा सर्वोपरि है ।


लेकिन हम रक्षाबंधन का त्योहार जरूर मनाएंगे ।हम त्योहार उसी दिन मनाएंगे जिस दिन मैं गांव आऊंगा। आप अपनी राखी की थाली तैयार रखना। इस इंतजार में .........



आपका प्यारा भाई

स्वाति मानधना






शीर्षक - बहन का प्रेम ,भाई के लिए।

प्रिय अनुज

शुभाशीष एवं स्नेह।


मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करती हूँ कि तुम सभी वहाँ कुशलतापूर्वक होगे।

रक्षाबंधन का त्यौहार आ रहा है,जब भी हम सब रक्षाबंधन पर साथ नहीं होते तो दिल बहुत उदास हो जाता है पर इस साल तो इस महामारी की वजह से साथ त्यौहार मनाना संभव नहीं है.......तुम निराश न होना, हम जल्द मिलेंगे। मैंने राखी भेज दी है तुम माँ से बंधवा लेना, मैं वीडियो कॉल करूँगी और उसी से तुम्हारी बलाएँ लूँगी ।😊

क्या करें मज़बूरी है, बहुत मन था सबसे मिलने का पर इस समय संभव नहीं है ।😔

रक्षाबंधन पर बचपन याद आ जाता है , जब सबको रक्षाबंधन का इंतजार रहता था। याद करके ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है । बुआओं का आना ,फिर उनसे राखी बंधवा कर, हमारा ननिहाल जाना। सब भाई - बहनों के साथ मिलकर पूरे दिन धमा - चौकड़ी करना ।एक भरेपूरे परिवार का प्यार और ये सारे रिश्ते मन को आनंदित कर देते थे ।अब सब व्यस्त हो गए हैं , 'हमारे परिवार' से अब सबके 'मेरे परिवार' हो गए हैं। ऐसे में ये त्यौहार ही हमारे परिवार और उसके प्यार को फिर जीवंत कर देते हैं।😇

अपना और माँ- पापा का ध्यान रखना । तुम सदा स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु रहो, इसी आशीर्वाद के साथ , जल्दी ही मिलने का विश्वास लिए .....🌺


तुम्हारी बहिन


रितु अग्रवाल





पाती भाई बहन की

रक्षा बंधन का पवित्र त्यौहार भाई बहन के अटूट प्यार का इजहार।जिस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर अपनी सुरक्षा का वचन लेती है।भाई बहन का प्यार सिर्फ एक त्यौहार का मोहताज तो नहीं पर इस समय आगे की पीढ़ी को अपना कल्चर अपने संस्कारों से रूबरू कराने के लिए आया रक्षाबंधन का त्यौहार।

भैया आज करोना जैसी वैश्विक महामारी की वजह से हम आपके पास नहीं आ पाएंगे पर हम दोनों का प्यार किसी राखी सूत्र का मोहताज नहीं ।आपके साथ बीता बचपन स्नेहिल पल हमें और भी मज़बूत बनाते हैं।

आशा करती हूं कि सब ठीक ठाक हो जाए तो हम जल्दी ही मिलेंगे।प्यार भरे दिन फिर लौटेंगे। विश्व के लिए मंगलकामनाएं करते हुए हम लोग सुरक्षा पूर्ण दिन की चाह कर रहे हैं।


आपकी बहन

रेनू अग्रवाल





प्यारी बहना और रक्षा बन्धन


प्रिय छोटी प्यारी बहिन गीता,


असीम स्नेह ! हम सभी सकुशल हैं और आप सभी की कुशलता की मंगल कामना करते हैं ! एक सप्ताह पूर्व आपने राखी डाक द्वारा भेजी, जो मुझे आज प्राप्त भी हो चुकी है ! तुमने कल फोन भी किया था, लेकिन मैं व्यस्त चल रहा था ! फिर आपने संदेश भी लिखा कि "भैया मैं अबकी बार रक्षाबंधन पर नहीं आ रही हूँ ! आप ही रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने आ जाना! प्रिय बहन मुझे पता है कि यह भाई- बहिन के अटूट प्रेम का एक पर्व है ! लेकिन आपको पता है कि इस समय वैश्विक महामारी का समय चल रहा है ! इसलिए आप डाक द्वारा मुझे राखी भेज देना ! बुरा समय निकल जाने के बाद फिर हम दोनों प्यार से मिलेंगे और ढेर सारी बातें भी करेंगे और हाँ आपने मैसेज में पूछा भी था कि कोरोना की बीमारी चल रही है लेकिन ये covid- 19 क्या है? तो मेरी बहन मैं आपको बता दूँ कि इसका अर्थ है- " कोरोना वायरस जिसका पता 2019 में लगा "

मैं ऊपर बता चुका हूँ कि आपकी राखी मिल चुकी है और इस प्रेम की डोर में ढेर सारी शुभकामनाएं हैं जो अपने अटूट प्रेम को हमेशा चिरायु रखेंगी

मैं आशा करता हूँ कि मैं तुम्हारे सुख- दुख के क्षणों में तुम्हारे प्रति अपने कर्तव्यों का पूर्ण निर्वहन करता रहूंगा !


सभी को मेरा बहुत बहुत प्यार !


तुम्हारा भाई

जगदीश बेजान

भरतपुर





अनमोल पाती भाई के नाम


मेरे प्यारे भैया


जब भी राखी का त्यौहार आता है।आपकी बहुत याद आने लगती है।कैसे हम एक दूसरे से लड़ा करते थे पर दोस्त की तरह रहा करते थे।राखी के दिन आप यहीं कहते थे देख छुटकी मैं तुझे कुछ नहीं दूंगा कुछ नहीं लाया तेरे लिए और फिर सबसे प्यारा गिफ्ट आप लेकर आते थे।

मैं भी आपको बहुत तंग किया करती थी।छोटी थी ना आपसे और आप भी मेरी हर फरमाइश पूरी किया करते थे।

इस बार महामारी के कारण हम नहीं मिल पा रहे है पर मैने राखी भेज दी है आपके लिए ।

अगली राखी पर इस बार की राखी की पूरी कसर निकाल देंगे।

मां पापा को मेरा प्रणाम कहना और भाभी को भी प्रणाम कहना।

इस बार रक्षाबंधन का पर्व कुछ इस तरह मनाएंगे

भाई से दूर रहकर रक्षा का फर्ज निभाएंगे

ना होगी त्यौहार की रौनक इस बार

ना होगी मिठाई में भी वो मिठास

रक्षा का फर्ज तो निभाना है भाई बहन को

भाई से दूर रहकर अपना फर्ज निभाएंगे


जया वैष्णव

जोधपुर राजस्थान








रेशम का धागा


नाजुक होता हैं,

भाई बहन का रिश्ता,

रेशम के धागे जैसा,

इस रिश्तो को संभालना हैं।।

सरहद पर हैं भाई मेरे,

करते भारत मां की रक्षा,

देकर जीवनदान देकर अपना,

हम बहिनों की, सबकी रक्षा करते हैं ।।

आज मैं उन भाईयों के लिए,

ले चली मेरे आयु:के रेशम,

धागे से बनी राखियों को लेकर,

बांधुगी मैं उनके कलाई पर ।।

जुग जुग जिये मेरे, सारे फौजी भाई

बांधी हैं राखी कलाई पर,

कान्हा तेरे नाम की,

करना रक्षा मेरे भाइयों की।।


डॉ।। वसुधा पु.कामत






मेरा अनमोल भाई


तू मेरा अनमोल भाई है।

तू मेरा रब तू मेरा साईं है।

बचपन मे माँ का प्यार दिया है।

पापा का दुलार दिया है।

तू मेरा अनमोल भाई है।

मुझे खाना खिलाई है।

लोरी गाकर सुलाई है।

बहुत दुआ से आपको पाई है

तू मेरा अनमोल भाई है।

रक्षाबंधन त्यौहार आई है।

आपकी याद सताई है।

कोरेना काल मे राखी

कैसे पहनाऊँ ये चिंता सताई है।

तू मेरा अनमोल भाई है।

तू जहाँ भी हो सलामत हो ।

इस बहन में दुआ फ़रमाई है।

इस पत्र लेखन के माध्यम से

मैंने सन्देशा भेजवाई है।

उषा साहू

जिला बलौदाबाजार

राज्य छत्तीसगढ़







अनमोल भाई बहन का प्यार


रेशम के धागे मे लिपटा

भाई बहन का प्यार है

स्नेह श्रद्धा प्रेम वाला

राखी का त्योहार है

रक्षा करूंगा हर बला से

भाई का ये वादा है

साथ कभी न छोडूंगा

ये अटूट ईरादा है

जीवन भर निभाते है

ये ऐसा व्यवहार है

रेशम के धागे मे लिपटा

भाई बहन का प्यार है

जैसे जैसे उमर है बढती

प्यार हमेशां बढता है

बेल स्नेह रिश्तों के ऊपर

हरदम चढता है

खत्म कभी न होता ये

रिश्तों का संसार है

रेशम के धागे मे लिपटा

भाई बहनका प्यार है

विदा हो जायेगी बहना

जायेगी जब ससुराल को

तब भी भाई रखेगा

बहना के ख्याल को

दुनिया के हर भाई का

हर बहना से करार है

रेशम के धागे मे लिपटा

भाई बहन का प्यार है


श्रीमती सुनीता साहू

विकासखंड बिलाईगढ़

जिला बलौदा बाजार

राज्य छत्तीसगढ़








एक अनमोल पाती: बहिन (सहोदरा)के नाम


वैसे बंधन किसको प्यारा,

पर यह बंधन _सबसे_ न्यारा।

जो न बंध सका इस बंधन में,

दिल दहके जैसे अंगारा।।

मेरी पाती उस बहिना को,

जो मेरी थी,मगर नहीं है।

मेरे"मन-अबोध-जीवन" में,

कहाँ गई, कुछ खबर नहीं है।।

माँ कहती,रोना मत भैया।

"बिन्नी"भगवन डगर गई है।

तब से राह तकूं मैं एकटक,

दरश् दिखाती मगर नहीं है।।

बिछड़े पैंसठ साल हो गए,

इतनी ही पाती लिख डालीं।

कोई उत्तर दिया नहीं क्यों,

राह तके उपवन का माली।।

अश्रु-मसी,मन-कलम,लिखित ये,

पत्राचार-कोष के द्वारे।

रक्षाबंधन राह तके तव,

एकटक,पलक-पाँवरे डारे।।

आज लिखूं मैं,फिर से पाती,

हे बहिना,अब तो आ जाती।

या फ़िर,किस घर जनम लिया है,

अता-पता,कुछ तो बतलाती।।

पंख लगाकर मैं उड़ आता,

बँध जाता,कलाई में बंधन।

मेरी प्यारी बहिना के संग,

होता सार्थक, रक्षाबंधन।।

मगर न आईं बहिन कभी तुम,

शायद अब फ़िर कभी न आओ।

रक्षा-सूत्र बाँधती,एक पल,

बस सपने में ही दिख जाओ।।

हे सहोदरा, बन सुभद्रा,

संबोधित कर मुझे कन्हैय्या।

चमक-दमक परिपूर्ण कलाई,

मन-मयूर,नाचे ताथैया।।

जब मैं दृष्य निहारूँगा यह,

जब कर सकूं तेरे पग-वंदन।

तभी सफलतम हर्ष दिलावे,

तेरा-मेरा यह रक्षाबंधन।।

.... ........ .....

संतोष श्रीवास्तव "विद्यार्थी"

मकरोनियाँ, सागर, मध्यप्रदेश



पाती तेरे नाम


पाती तेरे नाम की बहना

आज मैंने लिख डाली

याद मुझे तू आज आ रही

राखी बाँधने वाली।

भेजी तुमने राखी मुझको

भले दूर तू रहती

तुझे पता है बहना मेरी

तू दिल में ही रहती।

आज तुझे मैं याद करके

कुछ रोया कुछ मुस्काया

भेज रहा हूँ पाती तुझको

मेरा दिल भर आया।

पाती मेरी पढ़ते ही

याद मेरी तुम करना

मुस्काती आँखों से मेरी

प्यारी पाती पढ़ना।

******************

गजेंद्र कुमार घोगरे

स्नातकोत्तर हिन्दी अध्यापक

जवाहर नवोदय विद्यालय, वाशिम (महा)






अनमोल पाती


पूज्य भैया


सादर प्रणाम



कैसे हैं भैया आशा करती हूं कि आप कुशल मंगल होंगे मैं आपकी छोटी बहन सुनीता..

आज रक्षा के सूत्र का पावन और पुनीत दिन है भैया , लेकिन तुम मुझसे बहुत दूर हो और मैं चाहती हूं कि आप की कलाई पर मैं राखी बांधु, लेकिन कल्पना में, भावना में , भावुकता में , आप घर कब आओगे । आपकी बहुत याद आती है। इस पवित्र दिन में जब सब घरों में बहने अपने भाई को राखी बांध रही है और एक आपकी यह छोटी बहन आपकी बाट जो रही है

सोच रही है कि अभी भाई आने वाला है लेकिन शायद वह ख्याल है जो पल भर में खत्म हो जाएंगे।

पिछली बार भी कुछ ऐसा ही हुआ था भैया रक्षाबंधन के अवसर पर आप घर नहीं आए थे। आपको नहीं पता कि आपके बिना इस दिन मेरे हृदय में कितना दर्द होता है ।कैसे बयां करूं आपकी प्यारी गुड़िया बहना अपने आंखों से बार-बार आंसू बहाती है , और यह सावन की बौछार भी सताती है।

आपकी याद आती है।

आज मैंने थाली के अंदर राखी को सुशोभित किया तिलक हेतु कुमकुम सजाया लेकिन भैया आपको मैं राखी बांधने में असमर्थ।

आपकी एक तस्वीर अलमारी के कोने में सजी हुई थी मैंने उसी तस्वीर को तिलक लगाकर आपका आशीर्वाद लिया।

भैया मैं आशा करूंगी कि आप जल्द ही जल्द छुट्टी लेकर घर आए और अपनी बहन के ह्रदय को समझे । मैं आपका इंतजार कर रही हूं प्यारे बड़े भैया....।


कमल कालु दहिया

जोधपुर, राजस्थान







रक्षाबन्धन


पूजनीया दीदी


सादर चरण स्पर्श


सेवा में कुशलपूर्वक रहकर आपकी कुशलता की कामना करता हूँ । आशा करता हूँ कि आप सभी कुशलपूर्वक होगें । मेरी कोई सगी बहन नही है परन्तु जब मैं आपको देखता हूँ तो ऐसा लगता है कि अगर मेरी बहन होती तो आप जैसी ही होती ।

मैं जब भी आपकी व्यस्तता में भी कोई प्रश्न किया तो आपने एक बड़ी बहन कि तरह मेरे हर प्रश्नों का उत्तर दिया और मुझे सही गलत का पाठ पढ़ाया ।

रक्षाबन्धन के पावन पर्व पर सड़को पर मुझे सिर्फ दो व्यक्ति दिखाई देते है , एक भाई जिसके हाथ की कलाई में रेशम की डोर बंधी हुई और दूसरी बहन जो अपने भाई की लम्बी उम्र की दुआ मांग कर , चेहरे पर खुशी के भाव लिए दिखायी देती है । उनको देखकर मन अतिउत्साह से भर जाता है परन्तु जब मैं अपनी सुनी कलाई देखता हूँ तो मन भर जाता है ।

मैंने सोचा था कि इस बार रक्षाबन्धन के पर्व पर मैं आपसे राखी बंधवाने आऊँगा परन्तु कोरोना संक्रमित क्षेत्र में ड्यूटी के कारण अवकाश नही मिल रहा है परन्तु इस बार मैं बहुत खुश हूँ , भले ही मेरी कलाई में राखी ना सही पर आँखो में बहन की तस्वीर तो है । आप अपना ख्याल रखिएगा ।


आपका छोटा भाई

विशाल चतुर्वेदी " उमेश "




मंदिर का कलावा


प्रिय अनुज आलोक,

स्नेहाशीष।


आशा करती हूँ कि तुम सपरिवार सकुशल होगे।सबसे पहले तो अपनी दीदी को माफ करना क्योंकि इस बार तुम्हें राखी नहीं भेज पाई।तुम तो जानते ही हो कि इस बार कोरोना ने देश विदेश में कैसा कहर ढाया है।तुम मीलों दूर परदेस में जा बसे हो।विमान सेवा भी बाधित है और मैं तुम्हारी सेहत के साथ कोई जोखिम नहीं उठा सकती इसलिए मंदिर के कलावे को राखी समझ कर कलाई में बंधवा लेना।तुम्हें ईश्वर के आशीष के साथ हमारा भी आशीर्वाद और प्यार मिल जाएगा।

इस कोरोना काल में सभी के जीवन व शैली में परिवर्तन आए हैं।

परन्तु शारीरिक दूरी कोई मायने नहीं रखती।दिल से हम आज भी वैसे ही जुड़े हैं जैसे बचपन में थे।

वीडियो में तुम सबको देखकर हम बहनें और माँ पापा खुश हो जाते हैं।

अपनी कुशलता के समाचार देते रहना।फोन पर संपर्क बनाए रखना।ईश्वर ने चाहा तो हम शीघ्र ही मिलेंगे।

सदा खुश रहो,स्वस्थ रहो और अपने नाम स्वरूप जग नाम आलोकित करो।

भाभी और हमारी प्यारी भतीजियों सियोना और अमायरा को ढेर सारा प्यार व आशीर्वाद।

"करूँ दुआएँ दिल से भैया

भेजा है तुमको अमिट प्यार।

मात पिता की आँख के तारे

तुम से है आलोकित परिवार।।"


तुम्हारी दीदी,

वंदना सोलंकी

नई दिल्ली






रक्षाबंधन

पूज्य दीदी जी ,

सादर चरण स्पर्श ,


हम लोग यहॉ कुशल मंगल हैं, आशा है कि आप सभी सकुशल होगें | बहुत दिनों बाद यह पत्र लिख रहा हूँ ,आगामी 3 अगस्त को रक्षाबंधन के त्यौहार पर आप सभी बहनों को मेरे घर में आमंत्रित कर रहा हूँ | पिछले कई वर्ष से आप लोग मेरे नहीं आई है | हमारे माताजी - पिताजी को गुजरे 21 वर्ष हो गये हैं, इस दौरान कभी सुख-दुख में शामिल हुए हैं तो भी रात में नहीं रुके है |

मुझे याद हैं, माता - पिता के समय रक्षाबंधन में आप सभी बहनें भॉजा -भॉजी और जीजाजी सहित तीन - चार दिन रुक कर जाते थे, घर में चारो तरफ खुशी ही खुशी रहता था, मुझे आप सभी के प्रेम एवं आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा है | मैं उसी प्रेम के वशीभूत होकर इस बार रक्षाबंधन में आमंत्रित कर रहा हूँ, साथ ही सभी चारों बड़े भैया - भाभी जी को आमंत्रित किया हूँ|

आप सभी अवश्य आइये, इसी आशा के साथ चरण छुकर प्रणाम करता हूँ |



आप सभी का छोटा भाई

धनेश्वर प्रसाद देवांगन






करोना काल में रक्षा बंधन

आदरणीय भैया,

सादर नमन!


आशा है ईश्वर की कृपा से आप सब कुशल मंगल होंगे। भैया, वैसे तो हम सभी त्यौहारों का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। त्यौहार हमारे जीवन मेंहर्षोल्लास जो लेकर आते हैं।परंतु रक्षा बंधन का त्यौहार तो हर्षोल्लास के साथ साथ भाई बहिन के पावन,पुण्य और पवित्र प्रेम तथा स्नेह का प्रतीक होता है जो बचपन की मायके की सारी भूली बिसरी स्मृतियों को जीवंत कर एक बार फिर से हमें एक अल्हड़ सा बच्चा बना देता है। इसीलिए तो हम सब इस त्यौहार का साल भर बेसब्री से इंतजार करते हैं।भैया, वैसे तो हम हर बार ही रक्षा बंधन बड़े ही उत्साह से मनाते हैं परंतु इस बार करोना जैसी भयंकर महामारी के डर से आगरा नहीं आने के कारण मेरा मन बहुत उदास है। खैर, एक जागरुक नागरिक होने के नाते पूरे परिवार और समस्त देशवासियों के स्वस्थ जीवन हेतु सरकार के सामाजिक दूरी के आदेश का पालन करना भी अत्यावश्यक है। ताकि भविष्य में कोई त्यौहार उदासी का कारण न बन सके।इसीलिए मैंने आप सबके प्रति अपनी भावनाओं की मिठास,शुभकामनाओं और प्रेम को रेशम की कोमल राखी में समेट कर कोरियर से भेज दिया है। ताकि स्वास्थ्य के साथ साथ इस त्यौहार की परंपरा भी बनी रहे।रक्षा बंधन पर हम सब मोबाइल से वीडियो काल कर आपस में मिल लेंगे। टीना भी आप सबको बहुत याद करती है।हम सब मिलकर ईश्वर से करोना को दूर करने की प्रार्थना करेंगे ।ताकि शीघ्रातिशीघ्र प्रत्यक्ष मिलन हो सके। शेष कुशल है।भाभी जी को मेरा प्रणाम और गुल्लू को ढेर सारा प्यार व आशीर्वाद।


आपकी अनुजा

सुधा बसोर

वैशाली(गाजियाबाद)





एक अनमोल पाती भाई के नाम


मेरे प्यारे भाई

सादर प्रणाम


रक्षाबंधन का यह पर्व भाई बहन के अटूट स्नेह एवं प्रेम का प्रतीक है परंतु इस बार कोरोना महामारी की वजह से भैया मैं आपको राखी बांधने नहीं आ सकती लेकिन इस पत्र के साथ मैं अपना स्नेह, प्रेम तथा रक्षा का सूत्र भेज रही हूं। रक्षाबंधन के दिन आप यह रक्षा सूत्र अपनी कलाई पर सुसज्जित करना तथा इस रक्षा सूत्र के सामिप्य से मेरी उपस्थिति को अनुभव करना। ईश्वर से सदा आपकी समृद्धि तथा दीर्घायु की कामना करती हूं ।आप सदैव स्वस्थ्य रहो और कोरोना से बचे

रहो। भाभी को मेरा प्रणाम तथा बच्चों को प्यार देना।

भेज रही हूं पाती संग स्नेह, प्रेम, रक्षा का सूत्र

भाई बहन का प्रेम त्याग, विश्वास का अटूट संगम

सदा मंगलमय में समृद्ध रहे मेरे भाई का संसार

यही कामना करती हूं मैं ईश्वर से बारंबार।।


आपकी बहन

प्रेमलता चौधरी

फालना,पाली राजस्थान





कैसा सावन बिन भैया के


कैसा सावन बिन भैया के

चुभती है शीतल पुरवाई।

विदाई हुई पीहर छूटा

जग ने कैसी रीत बनाई।

सावन का झूला जब देखा

पीर नीर बन छलक पड़ी थी।

लिखने बैठी तुझको पाती

याद नयन से खूब झड़ी थी।

झूला छूटा गुड़िया छूटी

बहना भी अब हुई पराई।

कैसा सावन बिन भैया के

चुभती है शीतल पुरवाई।।


रंग-बिरंगी रेशम डोरी

मैंने दिल की हर आस बुनी।

व्याकुल नयना बाट निहारें

कहीं न तेरी आवाज सुनी।

सुन भाई यह रक्षाबंधन

बिन तेरे लगता दुखदाई ‌।

कैसा सावन बिन भैया के

चुभती है शीतल पुरवाई।।


बँधी हाथ में रेशम डोरी

पर्व बड़ा पावन मनभावन।

बहना की पाती हाथ लिए

भीग रहा है भाई का मन।

पढ़ चिट्ठी अपनी बहना की

भाई की आँखें भर आई।‌।

कैसा सावन बिन भैया के

चुभती है शीतल पुरवाई।।


अनुराधा चौहान 'सुधी' 











एक बड़ी बहना का पत्र अपने छोटे फौजी भाई के नाम 


पत्र में सिमटा रक्षाबंधन इस बार 


मेरे प्यारे भैया,

मेरे दिल के टुकड़े आशा करती हूँ, तुम स्वस्थ और सुरक्षित होगे।

रक्षाबंधन के इस सुन्दर पर्व पर मैं अपने प्यारे भईया को दिल से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देती हूँ।

आशा करती हूँ कि तुमने भी मुझे याद जरूर किया होगा और मेरे दिल की शुभकामनायें तुम तक जरूर पहुंची होगीं।

तुम मुझसे छोटे हो लेकिन फिर भी मेरे पिता तुल्य हो। मेरे लिए हर जिम्मेदारी को बहुत अच्छे से निभाते हो।

आज बहुत याद आ रही थी तुम्हारी, तो सोचा एक पत्र में उन यादों को समेट लूँ ।

आज बहुत याद आ रहा है वो तुम्हारा मंद मंद मुस्कुराना, वो तुम्हारी शरारतें, मेरे साथ तुम्हारा स्कूल जाना, पढ़ाई के लिए मेरा डांटना और फिर भी तुम्हारा मंद मंद मुस्कुराना सब कुछ बड़ा याद आ रहा है।

सावन में बरसात के पानी में मेरा कागज की नाव बनाकर चलाना और तुम्हारा ताली बजा बजा कर खुश होना,बहुत याद आ रहा है मुझे।

तुम कितने भी दूर सही लेकिन मेरे दिल के बहुत ही करीब हो, जब चाहुँ दिल में झाँक कर तुम्हें देख लेती हूँ।

कहने को तो फोन भी है मगर पत्र में लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का आनंद ही कुछ और है।

तुम से जुड़ी हर एक याद एक कीमती मोती की तरह है, जिसे मैं अपने हृदय रूपी सीप में छिपा कर रखती हूँ।

हर साल मैं रक्षाबंधन का बड़ा ही उत्सुकता से इंतजार करती हूँ, कि मुझे तुमसे मिलने का एक और मौका मिलेगा।

तुम्हारे लिए तरह-तरह के पकवान बनाती हूँ और तुम्हारी कलाई पर राखी का पवित्र धागा बांध कर तुम्हारी बलायें लेती हूँ और दिल से ढेर सारी शुभकामनाएं तुम्हें देती हूँ।

लेकिन इस बार तुम उधर सरहद पर चीन के साथ संघर्षपूर्ण स्थिति में फँसे अपना सर्वोपरि कर्तव्य का पालन कर रहे हो और मैं इधर देश में फैली महामारी के संकट फँसी हूँ।

इस लिये मन बड़ा विचलित हो रहा है...

लेकिन भैया मन छोटा ना करना, जल्द ही मिलन की वो बेला आयेगी, ज़ब हम चीन और कोरोना दोनों पर ही विजय प्राप्त कर लेगे।

बस अपने कान्हा जी से प्राथना करती हूँ, कि तुम स्वस्थ व सुरक्षित रहो और जल्द ही हमारे प्यारे देश को कोरोना की दहशत और चीन की मनमानी से मुक्ति मिले। दोनों ही सूरत में हमारी ही जय हो...

जिस दिन ऐसा होगा उस दिन ही हमारे लिये रक्षाबंधन का पर्व होगा।

इस बहन की कलम रुकना तो नहीं चाहती, लेकिन मुझे अपनी कलम को विराम देना होगा। लेकिन ज़ब मिलेगे तो ढेर सारी बातें करेंगे...

अपना ख्याल रखना और चीन पर कड़ी नज़र रखना। इस पूरे देश की सभी बहनों का आशीर्वाद तुम सभी सैनिक भाइयों के साथ है।


जय हिन्द

तुम्हारी बहन

कामिनी वार्ष्णेय





अनमोल पाती


प्रिय भाई,

इस कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में भी आशा करती हूँ आप भाभी-बच्चों समेत कुशल-मंगल होंगे। याद तो नहीं आती होगी मेरी फिर भी आज रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर आपकी बहन आपको याद कर रही है इतना ही बताना चाहती हूँ..।

आज बहुत दुविधा में हूँ क्योंकि पिछले साल रक्षाबंधन में जो आपने मेरे साथ किया उसके बाद सोचने पर विवश हूँ कि राखी भेजूं या नहीं? पर फिर भी कहीं न कहीं दिल मान ही नहीं रहा।

कितना बुरा लगता है जब कोई भाई आस-पास आकर भी छोटी सी नाराजगी वश रक्षाबंधन जैसे पर्व पर भी बहन से बिना राखी बंधवाये चला जाए और बहन ससुराल की बंदिशों में क़ैद बहन भाई का इंतज़ार करती रह जाए और सालों हो जाये बड़ा भाई होकर भी बहन का हालचाल भी न पूछे ये जानने के बाद कि बहन किन विकट समस्या और विषम परिस्थितियों जूझ रही है। भाई ये पीड़ा आप कभी समझ ही नहीं सकते। एक विश्वास रक्षा का आपकी कलाई पर बचपन से बाँधती चली आ रही थी नहीं पता था इतनी आसानी से एक दिन टूट जायगा। ख़ैर जो हुआ सो हुआ... आज फ़िर एक प्रेम सूत्र आपको भेज रही हूँ अपने टूटे हुए विश्वास और प्रेम की पीर के साथ.. उम्मीद करती हूँ इस बार निराशा हाथ नहीं लगे..



आपकी पगलिया बहन,

अनामिका





यही तो तेरा मेरा प्यार है


यही तो तेरा मेरा प्यार है

कभी मुझसे लड़ने वाली अब मेरे लिए लड़ती है

मैं दूर रहूँ या पास रहूँ, मेरी फ़िक्र बहुत करती है

वैसे तो साल में , ये पर्व बस एक ही बार है

पर 365 दिन अपने हैं , हर दिन इक त्योहार है

यही तो तेरा मेरा प्यार है

जरा सा मौका मिले तो , माँ बन जाती है मेरी

जरा सी गलती करूँ तो , सुनाती है खरी - खरी

कभी भाई , कभी दोस्त , कभी बेटे सा अधिकार है

खुश है तो फिर क्या कहने , रूठने पर मनुहार है

यही तो तेरा मेरा प्यार है

उसके बनाए पकवानों से मन कभी भरता नही

मगर ढिठाई देखो , मैं तारीफ़ कभी करता नही

मन ही मन में लगाव कितना , बातों में खूब रार है

ऐसे ही तो चलता ये भाई बहनों का संसार है

यही तो तेरा मेरा प्यार है

राखी के दो धागों से वो वचन मांगती रक्षा का

असल बात तो ये है उसके आगे हूँ मैं बच्चा सा

मुझको कोई आँख दिखा दे किसमें वो अधिकार है

कोमल नाजुक बहन मेरी, फिर काली का अवतार है

यही तो तेरा मेरा प्यार है

ऐसे ही हर साल आए ये दिन राखी वाला अपना

एक तमन्ना यही मेरी , पूरा हो तेरा हर सपना

तेरी खुशियों की खातिर ये दुआ मेरी हर बार है

तू जो बोले वो करने को , भाई तेरा तैयार है

यही तो तेरा मेरा प्यार है


सचिन 'राकेश'

लखनऊ, उत्तर प्रदेश






मेरे प्यारे


मेरे प्यारे भाई,


हमेशा खुश रहो |रक्षाबंधन आज हैँ और मेरी राखी कहती हैँ कि मुझे उदास नहीं होना हैँ और न ही तुम होना | तुम मेरे एकलौते मुझसे 10साल छोटे भाई हो बहुत प्यार करती हूँ तुमसे,माँ ज़ब इस संसार से जाने वाली थी तब मैंने उनसे वादा किया था कि अपने भाई को अपनी औलाद जैसा प्यार दूंगी ख्याल रक्खूंगी | तुम रूठ गए हो मुझसे, ये भी मुझे पता हैँ क्योंकि मैंने तुम्हे इस बार अपनी ससुराल मे आने से मना कर दिया हैँ |मेरे भैया मेरी राखी मुझे साहस देती हैँ किमैं धीरज रक्खूँ, क्योंकि इस समय कोरोना महामारी फैली हैँ सामाजिक दूरी ही इसका मात्र एक इलाज हैँ पैसे की तंगी वजह से तुम मोटरगाड़ी भी नहीं खरीद पाए तो मैं कैसे तुम्हे लोकल साधन इस्तेमाल करने को कह देती |आखिर तुम मेरी वो अमूल्य निधि हो जो मेरे जन्म से लेकर मरण तक साथ निभाने वाले साथी हो |

सतर्कता बरतकर हम अपने गांव, जिले, देशऔर राष्ट्र को इस कोरोना महामारी से बचा सकते हैँ, समाज के प्रति अपने कर्तव्य को निभाना हर नागरिक का पहला कर्तव्य होता हैँ, और तुम इसे निभाओगे ये मेरी आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास हैँ |

मेरी पोस्ट की हुयी राखी को निकालो और मुझे विडिओ कॉल करो 😊हम इस बार राखी कात्योहार डिज़िटल तरीके से मनाएंगे |

मेरे प्यारे से छोटे भाई अब मुस्कुराओ जल्दी 😊😊


तुम्हारी दीदीरानी


कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

हरदोई उत्तरप्रदेश






एक राखी सैनिक (रक्षक) बहनों के नाम ।



मोहन चन्द्र जोशी

म.न. ९७ शिव भवन

झण्डा चौक, कनखल

हरिद्वार, उत्तराखंड

दिनाँक ०२ अगस्त २०२०


मेरी प्यारी बहनो

सस्नेह आशीष!


आशा है तुम सीमा पर अपनी सभी सैनिक मित्रों के साथ सकुशल होंगी।

मैं भी सपरिवार यहाँ पर कुशल से हूँ। जैसे-जैसे राखी का त्यौहार नजदीक आ रहा है, मुझे कहीं ना कहीं यह विचार आ रहा है कि इस बार कोरोना के कारण बहनें हमारे घर आकर राखी नहीं बाँध पा रही हैं। परंतु तब आभास हुआ कि आप लोग प्रतिवर्ष इसी तरह निरंतर सीमा पर डटे हुए रहते हो। यहाँ तक कि अपने भाई की कलाई पर राखी तक नहीं बाँध पाते हो। इस मौके पर आपको अपने भाइयों की याद भी बहुत आ रही होगी। और आप जैसी बहनों के कारण हम यहाँ सकुशल प्रत्येक त्यौहार मना पाते हैं। राखी ही ऐसा त्यौहार है जो भाई और बहन के कर्तव्यों का बोध कराता है। आज अगर मेरी बहन सीमा पर मेरी रक्षा में लगी हुई हैं तो मेरा भी कर्तव्य बनता है कि मैं अपनी बहनों को राखी भेंट करूँ।

प्रिय बहना! परम्परानुसार तो बहन, भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं, परंतु आज परंपरा के उलट बहन, भाई की रक्षा में दिन-रात डटी हुई है। इसीलिए भाई का कर्तव्य भी बनता है कि वह बहन को राखी पर याद करें। बस इसी स्नेह निवेदन के साथ अपने भाई की राखी को स्वीकार करना।


धन्यवाद


आप लोगों का भाई

मोहन चन्द्र जोशी

हरिद्वार, उत्तराखंड






भैया की पाती बहना के नाम

कलकत्ता

दिनाँक- 02-8-2020


प्रिय बहन राज।

शुभ प्यार


विशेष मैं पूरे परिवार के साथ कुशल पूर्वक हूँ और आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास करता हूँ कि तुम भी अपने पूरे परिवार के साथ कुशल होगी। फिर भी मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि तुम्हें हमेशा खुश रखें। यहाँ पर माँ-पिताजी तुझे बहुत याद कर रहें हैं। राखीपुर्णिमा आ रही है इसलिए तेरी याद बहुत आ रही है।

मेरी प्रिय बहन बड़े दुःख के साथ ये कहना पड़ रहा है इस बार कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन चल रहा है ये तो तुम भी जानती हो इसलिए मैं राखी बंधवाने के लिए नहीं आ पा रहा हूँ और न ही तुझे आने के लिए कह पा रहा हूँ।

न तो ट्रेन चल रही है न बस कहीं आना जाना तो मुश्किल ही हो गया है। आने का कोई साधन नहीं है। छोटा भी गाँव से तेरे पास नहीं जा सकेगा क्योंकि वो भी तो बाढ़ में फंसा हुआ है। तुझे तो पता ही होगा कि पहली बार अपने गाँव में भी बाढ़ का पानी आ गया है। सब घिरे हुए हैं। पिछले साल जो तुमने दो राखी भेजी थी उसमें से एक राखी तेरी भाभी संभाल कर रखी है वही तेरे नाम से इस बार बांध लूँगा।

इसलिए लिए तुम किसी बात की चिंता मत करना सशरीर तो नहीं मन से राखी के दिन अवश्य उपस्थित रहूँगा।

संकट के बादल अवश्य छटेंगे और अगले साल हम सब खूब धूमधाम से राखी का त्यौहार मनाएंगे। सबकुछ सामान्य होने पर मैं स्वयं तुम्हें लेने आऊँगा।

सदा खुश रहो।

तुम्हारे भैया

दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"






अनमोल पाती भाई की बहन के नाम


प्यारी बहन ,


सदा खुश रहो , और बहुत सारा प्यार मेरी प्यारी गुड़िया के लिए । ये तो तुम्हे पता ही है कि रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला है। और तुम्हे ये भी पता है कि कोरोना की वजह से जो लॉकडाउन है उससे कितनी परेशानी सभी को है । मेरी गुड़िया ये परेशानी जरूर है लेकिन हम सब की हिफाजत भी तो जरूरी है ना ।

क्यूँकि जान है तो जहान है ।

हर बार की तरह इस बार मै राखी बंधवाने नही आ पाऊँगा । इस बात का जितना दुख तुम्हे है उससे कही ज्यादा मुझे है , क्यूँकि मेरी कलाई सूनी जो रहेगी । मगर मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है और ताउम्र रहेगा ।

इस रक्षाबंधन पर तुम जेल में कैदियों को राखी बाँधना ताकि उन्हे अपनी बहन की कमी महसूस न हो । ये मेरी इच्छा ही नही तुमसे विनती भी है ।आशा करता हूँ कि तुम मेरी ये इच्छा जरूर पूरी करोगी ।

अपने सास ससुर को मेरा प्रणाम कहना जीजू को सादर नमस्कार और तुम्हे व बच्चो को ढेर सारा प्यार ।


बहुत सारी शुभकामनाओं सहित


तुम्हारा भाई


सूफिया ज़ैदी

सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)








डॉक्टर भाई - बहनों के नाम मन की पाती

दिनांक 03/08/2020


मेरे प्रिय डॉक्टर भाइयों और बहनों,


आप को मेरा सादर प्रणाम और ढेर सारा स्नेह,


आपको रक्षाबंधन पर्व पर बहुत बहुत शुभकामनाएं…...

रक्षाबंधन का पावन पर्व हर वर्ष ढेर सारी खुशियां लेकर आता है । इस वर्ष भी यह पर्व आया है । लेकिन एक वैश्विक महामारी के कारण कई भाई और बहन एक दूसरे से मिल ना सके बहन भाई की कलाई पर राखी ना सजा सकी और आपसे अपने दिल की बात कहती हूं , मुझे बहुत दुख भी हो रहा है कि इस वर्ष एक वैश्विक आपदा ने जाने कितने बहनों से भाई और भाई से बहनों को जुदा कर दिया । वे असमय ही काल के गाल में समा गए । मजदूर भाई बहनों की स्थिति देखकर भी मन द्रवित हो उठा । लेकिन हां, इस संकट की घड़ी में सभी डॉक्टर भाइयों और बहनों ने और आपके चिकित्सिकीय स्टाफ ने दिन रात एक करके लोगों की जान बचा कर रक्षा का वचन निभाया है । आपके कारण आज कई बहन और भाई रक्षाबंधन पर्व मना पा रहे हैं ।अपनी वीरता का परिचय देते हुए समूची जनता के साथ रक्षा का वचन निभाया । फौजी, पुलिसकर्मी सफाई कर्मी, डॉक्टर, नर्स शिक्षक इन सभी ने कोरोना वरियर्स बनकर रक्षा का वचन निभाया है इन्हें भी रक्षा सूत्र बांधकर हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए । अतः मैं अपने रक्षा सूत्र आप सब को समर्पित करती हूं । इसलिए कई समाजसेवी और डॉक्टर को डाक के जरिए रक्षा सूत्र और अक्षत कुमकुम भेजा है । इससे बड़ा रक्षा का वचन और कोई नहीं हो सकता । इसलिए आप भी रक्षाबंधन की पावन बेला में कलाई पर रक्षा सूत्र और मंगल अक्षत कुमकुम से टीका अवश्य करवा लीजिएगा । इस विपरीत परिस्थिति में आज के दिन भाई-बहन के लिए देने योग्य सर्वोच्च उपहार है , एक दूसरे के लिए सेहतमंद रहने का उपहार देना।

मैं आप सभी रक्षकों के लिए चार पंक्ति समर्पित करती हूं ।

"इक राखी में भेजूंगी सरहद पे,

वीर जवानों को,

देश की रक्षा की खातिर,

जो अपनी जान गवायें ।

इक राखी में भेजूंगी उन सेवा के प्रतिमानों को,

डॉक्टर जिनको कहते हैं,

मानवता धर्म निभाएं।"


एक आशा और करती हूं कि जल्दी से जल्दी इस महामारी के लिए टीका बनाएं ताकि इस महामारी पर विजय प्राप्त हो सके ।


आपकी शुभाकांक्षी

आपकी एक बहन

डॉ. दीप्ति गौड़ "दीप"

कवयित्री







रक्षाबन्धन पर्व


मेरे परम प्रिय भाई,


सदैव सुखी रहो, ईश्वर की कृपा तुम सभी पर बरसती रहे।

आया सावन का महीना और तेरी याद आई।

भाई बहन के प्यार का पावन त्यौहार लाई।।

इतने दिन हो गए मिले हुए पूरे आठ महीने पर शुक्रिया मोबाइल का जो जब-तब साक्षात्कार करा देता है और इतने दिनों का ना मिलना अखरता नहीं।

इन दिनों बचपन के वो पुराने दिन और उनकी वह खास बातें जो हमने साथ साथ गुजारे लड़ते झगड़ते, रूठते मनाते और खाली समय में ताश की बाजी लगाते कुछ ज्यादा ही याद आते हैं।अब ना वह दिन रहे ना वह समय,तुम जम गए अपनी गृहस्थी में और मैं अपनी।भौगोलिक दूरियां भी इतनी हैं कि तुम इलाहाबाद और मैं करनाल तो हम किसी बहुत खास मौके पर ही मिल पाते हैं।

जानती हूं जीवन की इस भाग दौड़ में जीवन यापन के चक्रों में और परिवार की जरूरतों में किस तरह से जीवन विभाजित हो जाता है और ना चाहते हुए भी बहुत सी चीजें पीछे छूट जातीं हैं।

लेकिन यह हमारे त्यौहार, संस्कृति हैं जो इन रिश्तों के बीच आई दूरी को नजदीकियों में बदल जाते हैं और रिश्तों के प्यार को इनकी ताकत को नई उमंग और उत्साह से भर जाते हैं।साथ ही एक दूसरे के प्रति समर्पित कर जाते हैं,पुरानी यादें ताजा कर जाते हैं और नई यादें बना जाते हैं।

तीज के आने पर ही याद आ जाता है वह नीम का झूला जिस पर झूला करते थे हम और कई बार पहले झूलने के लिए भी लड़ा करते थे और फिर रस्सी से फर्राटे देना झूले को पेड़ की ऊंचाई तक ले जाना और फिर वापस ले आना, इससे बढ़कर उन दिनों और क्या मजा था...?

क्या आनंद था यह आजकल के बच्चे क्या जाने..

सारे सावन समय मिलते ही झूले पर कब्जा जमाना और फिर एक दूसरे की बारी की बाट देखना।तब पढ़ाई का भी इतना तनाव कहां था ..?त्यौहार हमारे लिए सिर्फ और सिर्फ मस्ती लेकर आते हैं।हमारे प्यार को मजबूती से बांधने वाला पावन पवित्र त्यौहार जो रेशमी धागों से बंध कर भाई बहन के प्यार को और ऊंचाई प्रदान कर जाता है।भाई- बहन का रिश्ता कितना प्यारा और अद्भुत है कि समय आने पर बहन भाई के लिए मां के समान और भाई बहन के लिए पिता के समान हो जाता है।

बेशक हम इन त्यौहारों पर ना मिल पाते हो लेकिन राखी चुनते हुए तुम सभी भाईयों की छवि कौन सी राखी ज्यादा फवेगी,ढूंढ ढूंढ कर छांट छांट कर रखना और फिर रोली चावल और चीनी के दानों को पालीथिन में पैक स्टैपल कर रख पति को पोस्ट करने के लिए पन्द्रह बीस दिन पहले ही भेज देना ताकि समय से मिल जाए और फोन करके पूछना पहुंची या नहीं यही तो है हमारा प्यार...।

जैसे ही मेरी राखियां पहुंचें सूचित करना और जीजी से तुम सभी बंधवा लेना मैं फोन करूंगी जब तुम सब एक जगह इकट्ठे होओगे।

इसी के साथ तुम सभी की मंगलकामनाएं करते हुये पत्र को विराम देती हूं।भतीजे-भतीजियों को बूआ का भरपूर प्यार और

बड़ी भाभी को अभिवादन और छोटी भाभियों को मधुर स्नेह।


पत्र की प्रतीक्षा में

तुम्हारी जीजी

प्रीति शर्मा "पूर्णिमा"

करनाल, हरियाणा।






भाई को सदा रही याद* *तुम.. जी*


स्नेही मिक्की(छाया) *तुम.. जी*


स्वस्थ रहो मस्त रहो...

कुछ कहे अन कहे जज़्बातों से अपने 50 से अधिक वर्षो की यात्रा को इस *काव्य पत्र* के माध्यम से तुम्हें समर्पित करता हूँ।

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद*

*तुम.. जी*

खुशियों से घर आबाद हुआ राखी से सजी हमारी कलाई जी,

दो भाइयों के बाद बहना घर मे आई, *तुम.. जी*

दादी की लाडली नानी की गुड़िया *तुम.. जी*

छोटी सी तुम,बड़ी आफत की पुड़िया *तुम.. जी*

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद*

*तुम.. जी*

चाचा-चाची-मामा-मामी की सलोनी चिरैया ,

कलियों संग डोलती फिरती तितली सी *तुम.. जी*

परिवार के नटखट बंदर हम दोनों भाई...जी

बुआ-फूफा का चंचल *मिक्की माउस* *तुम.. जी*

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद*

*तुम.. जी*

बाइस का भाई,बीस का मैं, सिर्फ अठरा साला की *तुम.. जी*

छोटी सी राजकुमारी, स्कूल बाद बस कॉलेज में आई *तुम.. जी*

देख एक गुड्डा सा प्यारा सा सलोना *राजकुमार जी..*

पहले वर्ष पिता ने कर दी तुम्हारी *सगाई ..जी*

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद* *तुम.. जी*

मां की सखी, पिता की पक्की दोस्त *तुम.. जी*

मटकती चहकती हर पल खनकती *तुम.. जी*

सखियों संग जी भर ना खेल पाई दीवाली-होली *तुम.. जी*

भाभी संग नटखट नन्द बन ना कर पाई ठिठोली *तुम.. जी*

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद* *तुम.. जी*

बचपन , अठरा बरस का साथ हमारा प्यारा प्यारा

ससुराल में रच बस गई बहना मायके से ले,विदाई *तुम..जी*

कल तक बेटी बहन ननंद भोजाई बहु बन सभी रस्में निभाती *तुम..जी*

माता रानी और सतगुरु की मेहर से सासु बन बेटों सा पाती जमाई *तुम.. जी*

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद* *तुम.. जी*

मायका का जायका ना भूलना माँ की *छाया* बन घर में आते रहना *तुम..जी*

चंदा रे मेरी बहना से कहना

*भाई को सदा रही याद* *तुम.. जी*


तुम्हारा स्नेहकांशी भाई *नीटू*

स्नेहदिल नरेश चावला

जोधपुर राजस्थान







भाई के पाती बहन के नाम*

*************************


मेरी प्यारी,

बहना दिव्या,


🙏सादर प्रणाम🙏

शेष यहाँ सब कुशल मंगल हैं हमारे। आशा करता हूँ आप के यहाँ भी उस परमपिता परमात्मा की असीम अनुकम्पा से सब कुशल मंगल ही होंगे।।

आपको याद है कि किस प्रकार हम भाई बहन एक दूसरे के साथ मिलकर खेला करते थे और आपस में कुछ खट्टी मीठी नोकझोंक भी हो जाया करती थी। आपको याद है आज ही के दिन हम आपस में न सिर्फ प्यार से मिल के रहने का एक दूसरे वादा करते थे बल्कि हम आपसे आपकी रक्षा करने का वचन दिया करते थे और आप हमसे जिंदगी में कभी झगड़ा न करने का वचन दिया करती थीं फिर भी हम लोग एक दूसरे से नोकझोंक कर झगड़ते और एक हो जाते थे। कभी कभी तो हमारे झगड़े पापा और मम्मी जी समझा बुझाकर समझौता कराते और तब फिर हम एक दूसरे से माफी माँगकर हम एक हो जाते थे।

सचमुच क्या अद्भुत वो दिन थे जब हम एक साथ खाते - पीते हल्की - फुल्की नोकझोंक करके प्यार से रहते थे।

और अब हमें आपकी और उन बीते दिनों की याद आती है जिनकी न सिर्फ अब हमें कमी महशूस होती है बल्कि यह भी अहसास हुआ कि सचमुच वो हमारे बीच के झगड़े...... सब हम दोनों के बीच का प्यार ही था जो हमें हमारे दिलों में निर्मलता, सुकोमलता, सहनशीलता आदि गुणों को जन्म दे रहे थे।।

*आपको क्षमापूर्वक बताना चाहूँगा कि इस रक्षा बंधन पर हम कोरोना के चलते आपसे रक्षा सूत्र बंधवाने हेतु न ही आपके यहाँ आ पाएंगे और न ही आप कष्ट करें। आप और हम दोनों एकदूसरे से वचन लें कि हम कोरोना की सावधानियां ध्यान में रखते हुए। अपने अपने घर पर ही सुरक्षित रहेंगे और अपने अपने स्वास्थ्य व अपने परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे और इस कोरोना महामारी को हराएंगे।।*

*हम समझ सकते हैं कि किसी बहन के लिए आज के दिन भाई की कमी कितनी दुःखदायी होती है परंतु हमें एक दूसरे की भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए परिस्थितियों से समझौता कर बेहतर और स्वर्णिम भविष्य का निर्माण कर सकुशल मधुरिम रिश्तों को सिंचित कर उन्नत रखना है। अतः ध्यान रखें।।*

वैसे भी यह रक्षा सूत्र तो बहाना मात्र है बस हमारे दिलों में हमेशा एक दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान बना रहे।।

और हमारे प्रिय जीजू और अन्य सभी लोग कैसे हैं। आशा करता हूँ वह भी कुशल से होंगे।।

*आप घबराना नही शीघ्र ही कोरोना की समाप्ति के पश्चात हम आपसे मिलने आएंगे और तब आपसे ढेर सारी बातें होंगी।।*

इसी आशा के साथ आप सभी बड़ों को सादर प्रणाम।

व छोटों को शुभ स्नेहाशीष।


पुनः सादर प्रणाम।।


🙏🥰

दिनांक आपका लाडला

प्रशान्त कुमार "पी.के."

पाली, हरदोई

(उत्तर प्रदेश)





अनमोल पाती भाई के नाम,


भैया आज रक्षा बंधन है,

बहन पाती तुम्हें लिखती है,

आज मनाओ रक्षा बंधन,

जन्म-जन्म का है ये बंधन,

आज मनाओ रक्षा बंधन,

भैया राखी का त्यौहार आया,

खुशियाँ सब ओर से लाया,

बिन तुम्हारे है राखी अधूरी,

जब तुम आओगे तब होगी इच्छा पूरी,

राखी तुमको डाक से भेजी,

बड़े प्यार से बहना ने भेजी,

कलाई पर तुम बंधवा लेना,

अपनी बहन को याद कर लेना,

आशीर्वाद दूर से ही दे देना,

सिर्फ राखी नहीं मैंने भेजी,

मेरे मन के अरमान भी भेजे,

कैसे तुम्हें बताऊँ भैया,

याद तुम्हारी मुझे बहुत ही आये,

कुछ न मैं भैया तुमसे मांगूं,

न कोई वस्तु न भेंट चाहूं,

तुम मेरे अनमोल उपहार,

तुम आ जाना अगली बार,

तुम नहीं आये राखी पर,

थोड़ा सा भी गम नहीं,

पर उदास हूँ थोड़ी अभी,

आशा करती हूँ मैं भैया,

राखी प्यार से बाँधी होगी,

सोचकर मैं हर्षित होती,

याद तुम्हारी बहुत ही आती,

हमारा ये अटूट है प्यार,

तुम जरूर आ जाना अगली बार

हम मिलेंगे अगली बार,

फिर मिलकर मनायेंगे,

राखी का प्यारा त्यौहार,

अपनी पाती मैं समाप्त हूँ करती,

और भैया आपको नमस्ते हूँ करती।



डॉ०विजय लक्ष्मी

काठगोदाम,उत्तराखण्ड





रक्षाबंधन का त्योहार 


प्यारे भाई विवेक,

मैं यहाँ पर सकुशल हूँ और आशा करती हूँ कि आप और घर के बाकी सभी सदस्य स्वस्थ और सुरक्षित होंगे| सच लिखूँ तो आप सबकी बहुत याद आ रही है| भाई सोचा था इस बार रक्षाबंधन पर आप सब से मिलूंगी तो कुछ दिन वहाँ रूककर आऊँगी| आजकल की भागदौड़ भरी इस ज़िन्दगी में जैसे खुद ही खो गयी हूँ| लेकिन भाई जब आप सब याद आते हो तो लगता है कि मैं खोयी नहीं हूँ बस थोड़ा गुम हो गयी हूँ अपनी जिम्मेदारियों और अपनी गृहस्थी में|

भाई आपको तो पता है इस वक़्त जो हाल है दिल्ली का और दिल्ली क्या सभी जगह इस महामारी ने अपना प्रकोप फैलाया हुआ है| ऐसे में मैं आपको राखी बाँधने नहीं आ सकूँगी और न ही आपको ही बुला पाऊँगी| लेकिन भाई इस पत्र के साथ आपको राखी भेज रही हूँ, उम्मीद करती हूँ आपको समय से मिल जाएगी| आप ये राखी बांध कर अपनी एक फोटो मुझे जरुर भेज देना|

भाई इस राखी पर ही नहीं हर राखी पर मैं आपकी सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना करती हूँ| आप हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहे, बस यही प्रार्थना है मेरी ईश्वर से| भगवान करे जल्दी से ये महामारी खत्म हो जाये ताकि मैं आप सबसे आकर मिल सकूँ| भाभी को मेरा प्रणाम कहना और मेरे प्यारे भतीजे नमन और मेरी छोटी गुड़िया को मेरा बहुत सारा प्यार देना|

भाई आपको रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें! आप सभी से मिलने को व्याकुल आपकी बहन, (मीनू) 

“बचपन के वो दिन सुहाने, बहुत याद आते हैं वो फ़साने,

वो लड़ना-झगड़ना, फिर वो रूठना और फिर वो मनाना,

भाई रिश्ते अनमोल हैं सभी पर भाई-बहन का रिश्ता कुछ जुदा है,

दूर रहकर भी करते हैं फिक्र इक-दूजे की यही इस रिश्ते की अदा है|”


मीना सिंह “मीन” 

नई दिल्ली






भैया आपके इतंजार मे पत्र लिखती हू 




(सम्बंधो के प्रेम गाठ मे ऐसा भी 

होता है ,कभी कभी त्योहारो पर 

उत्सव भी रो देता है खुशीयो को 

देख ऐसा लगता है सब साथ है 

शरहद पर जवानो को देख राखी

भी रो देता है )

 


ऑगन मे बैठ कर ख्वाब बुन रही हू ,भैया आपका इतंजार कर रही हू ,मॉ कि ममता ,पिता का भरोसा

लिख रही हू , इस पत्र मे यादो का  किस्सा लिख रही हू , 


थाली कि पीडा ,रोरी की तड़प

राखी कि उदासी लिख रही  हू 

इस वर्ष अपनी पीडाओ को

गूथ कर भैया मै आपको पत्र लिख रही हू


इस दौर मे त्योहार भी बहकती

है रक्षाबंधन कि राखी भी रो -रो 

कर ये कहती है ,सब के हाथो पे

कलाई है शरहद पर खड़े मेरे 

भैया आपकी कलाई खाली है 


भैया आपकी कलाई रह ना जाये 

खाली इसलिए पत्र को पिरो के भेजती हू ,भैया इसीलिए आपके

इतंजार मे पत्र लिखती हू 


भैया आपकी प्यारी 

      बहन 


कवि सूरज तिवारी 

                   उत्तर प्रदेश 'भदोही





 बहन के नाम
दिनांक  --3/8/2020

प्रिय बहना कैसी हो कुशल मंगल हो क्या और आपके परिवार में
सब कुशल मंगल ही होंगे आप
की बहुत याद आती है।  आज  
रक्षा बंधन है आप द्वारा भेजी 
गयी राखी और मिठाई मुझे मिल
गयी है बहुत सुंदर राखियाँ और
स्वादिष्ट मिठाई देखकर मुँह में
पानी भर आया है। तुम्हारी पढाई 
कैसे चल रही है प्रिय बहना मैं  और माता पिता सदैव तुम्हें याद
करते रहते हैं। अगले माह ही तुम्हारी परीक्षाएं शुरु हो रही है 
मेहनत करके परीक्षा में अव्वल 
आना ऐसी आशा करता हूँ 
अपनी सेहत का ध्यान रखना 
अभी कोरोना काल चल रहा है 
सो विशेष सावधानी रखना। 
 
आज रक्षा बंधन है तुम्हारी बहुत
याद आ रही है सभी काम समय पर और अनुशासन के साथ ही
करना समय मिलने पर फोन अवशय करना। माता पिता की 
और से हार्दिक आशीर्वाद और
मेरी तरफ से भी हार्दिक प्यार 
और शुभकामनाएं। 

तुम्हारा भाई 
जुगल किशोर पुरोहित 
बीकानेर 
शेष मिलने पर शुभ आशीष
प्रिय बहना।





Comments

  1. बहुत ही सुंदर और पठनीय संग्रह डिजिटल युग मे पत्र लेखन की विद्या को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिध्वनि टीम को बहुत बहुत बधाई कमाल की सोच और दिल को छू लेने वाले विषय पर सभी कलमकारों ने जो लिखा वो आंखों में अश्क़ नही रोक पाया बधाई बधाई

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