प्रतिध्वनि साहित्य समूह प्रतियोगिता #13: डायरी लेखन
प्रतिध्वनि साप्ताहिक प्रतियोगिता
*प्रतिध्वनि साहित्य समूह प्रतियोगिता #13*
*दिनांक- 19/9/2020 से 20/9/2020*
*दिन- शनिवार से रविवार*
*विधा- डायरी लेखन*
स्थान - प्रयागराज/इलाहाबाद
दिनांक/तिथि - १३ अक्टूबर, २०२०
दिन/दिवस - शनिवार
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
रोज़ की तरह आज भी ये जीत सुबह की अरुण लालिमा के पूर्व बिस्तर से उठकर दैनिक दिनचर्या से निवृत्त होकर योग और ध्यान किया तदोपरांत झाडू और पोंछा के बाद स्नान करके भगवान की पूजा अर्चना की। सुबह के अल्पाहार की व्यवस्था के बाद जल्द ही भैया के लिए दोपहर के भोजन को तैयार करके टिफ़िन तैयार किया और भैया के साथ अल्पाहार में अदरक तुलसी वाली चाय के साथ पोहा लिया।भैया के कार्यालय जाने के बाद पढ़ाई करने के थोड़ी देर बाद मैंने कविता सृजन की और वेबसाइट पर काम किया। थोड़ी देर आराम के बाद 3 बजे झाडू और बाहर दरवाजे के आसपास सफाई की और ख़ुद के लिए चाय बनाई और नमकीन के साथ उसे ली। तभी भैया कार्यालय से आकर तुरंत तैयार होकर संगीत की अपनी दैनिक कक्षा के लिए जानसेनगंज तुहिना मैम के यहां चले गये। टेलीविजन देखने के साथ ही वेबसाइट के कंटेंट को सोशल मीडिया में साझा करने के बाद व्हाट्सऐप चलाने लगा तभी २०१६ से लंबित उ.प्र. अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा जूनियर असिस्टेंट के परिणाम की ख़बर को एक समूह में देखा तो दिल की धड़कन बढ़ने लगी। ख़ुशी भी थी और डर भी जो मेरे मन में आशंका और उत्साह दोनों के सम्मिलित भावनाओं का समावेश करा रहे थे। मैंने UPSSSC की वेबसाइट में जाकर अपना परिणाम देखा और वहां पीडीएफ फ़ाइल थी। सच दिल जोरों से धक-धक कर रहा था कि न जाने क्या हुआ होगा। मैं उसे खोलकर अपना अनुक्रमांक खोजने लगा और परिणाम के 5वें पेज पर जब मैंने अपना 118543 देखा तो मेरे मन में लड्डू फूट पड़े। मैं घर में अकेले में ख़ुशी के मारे उछलने लगा मानो करोडों रुपये हाथ लग गए हों। इस खुशी को शायद मेरे लफ्ज़ बयां न कर पाएं क्योंकि महज़ 23 साल में और 2 साल की जद्दोजहद के बाद जब एक बेटा किसी माँ की उनके नौकरी पर रहते उनके बेटे को नौकरी मिल जाने की ख़्वाहिश को पूरा करे तो सच में उस ख़ुशी को बयां भी नहीं किया जा सकता।
नवरात्रि के दिनों में माँ का आशीर्वाद अपने बेटे पर हुआ जिस कारण आज मैं अपनी माँ के एक छोटे-से सपने को पूरा कर पाया पर अभी तो शुरुआत की है न जाने अभी कितनी दूर जाना है। "#बेरोज़गार" शब्द से अब इस नौकरी ने 'बे' हटा दिया क्योंकि समाज आज भी आपकी प्रतिभा को सरकारी नौकरी से ही आंकता है। आपके हुनर कोई मायने नहीं रखते। ये वो सच है जिसे नकारा नहीं जा सकता।
आज ये ख़ुशी इसलिए भी बयां करने की इच्छा हुई कि वो कहते हैं न ज़िन्दगी में हर छोटी ख़ुशी को बांटो क्योंकि इस जीवन में बहुत दुःख है दर्द है पर अगर आपके एक कार्य से भी दूजे के चेहरे पर मुस्कान आती है तो उसे करिये। यही इंसानियत कहती है।
आज ये बात भी साबित हो गयी कि अपने कर्म को इतनी शिद्दत से करो कि
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
जैसे ही परिणाम देखा तो तुरंत माँ को फ़ोन लगाया पर उठा नहीं तो पिताजी के नंबर पर लगा कर उन्हें इस हृदय प्रफुल्लित कर देने वाली ख़बर को सुनाया तो उनकी आवाज़ सुनकर लगा आज उनके बेटे ने अपने पिता को दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी दे दी। माँ-पिताजी ने ढ़ेर सारी बधाई दी, आशीर्वाद दिया। बहन ने बधाई दी और बहुत ज़्यादा ख़ुशी हुई। उसके बाद तुरंत भैया का फ़ोन आया। कहा - परिणाम आ गया, देखे, बताओ क्या हुआ? मैंने उन्हें जैसे बताया हो गया। उन्होंने कहा - congrats jitu चलो बधाई हो पर इसी में नहीं रह जाना। आगे तैयारी करो। सच में सब बहुत ख़ुश हैं आज मेरी इस अभूतपूर्व सफ़लता से। सनय भैया ने फ़ोन करके बधाई दी। इसके बाद पिताजी ने परिवार में सबको बता दिया तो काफ़ी लोगों की बधाई आने लगी। शाम को जब भैया आये तो मिठाई लेकर मेरा मुँह मीठा किया। मैंने भी अपनी ख़ुशी फेसबुक और व्हाट्सएप में साझा किया। उसके बाद रात्रि का भोजन तैयार किया और भैया के लिए शाम का अल्पाहार दिया। रात के 9 बजे हमने खाना खाया। सच आज का दिन बहुत ही ख़ुशियों भरा रहा। आज मैंने अपने कर्म से सबके चेहरों में वो गर्व की अनुभूति वो ख़ुशी दी जिसके लिए सभी बहुत दिन से इंतज़ार कर रहे थे। खाना खाने के बाद और सोशल मीडिया में दोस्तों की बधाई संदेश पढ़कर अब सोने जा रहा हूँ। आज का दिन वाक़ई में मेरे जीवन का सबसे बड़ा दिन रहा क्योंकि आज मैंने लोगों द्वारा प्रायोजित जीवन की पहली सफ़लता पा ली। अभी तो न जाने कितना कुछ करना बाक़ी है। अब सोने जा रहा हूँ। ईश्वर वैष्णों माँ साईं बाबा आप सभी का दिल से धन्यवाद इतनी बड़ी ख़ुशी देने के लिए। माँ-बाप, बहन के प्यार और आशीर्वाद के साथ ही भैया के कुशल मार्गदर्शन से आज मैं सफ़ल हुआ। ढ़ेर सारा प्यार आप सभी को।
शुभ रात्रि
आपका छोटा प्यार बेटा और भाई
जीत
मुम्बई
19 सितंबर,2020 ,शनिवार
रात्रि 11 बजे
मेरी डायरी की अंधी परी
आज मुलुंड स्टेशन पर मैं लोकल ट्रेन पकड़ने की जल्दी में भाग रही थी, स्कूल से निकलते ही सिर्फ एक ही ख्याल आता कि बस जल्दी से बेटा के पास पहुंचू ।इस आकांक्षा में आगे पीछे कोई नहीं दिखाई पड़ता,शायद मातृत्व ऐसा ही होता है।
ट्रेन सामने से आती दिखाई पड़ी तो मैं अपने दुपट्टे को ठीक तरह से समेटकर जंग के लिए तैयार थी, अचानक नजर प्लेटफॉर्म पर बैठी एक लड़की पर गई जो रो रही थी।,मैंने देखा और मुंह से निकला बेचारी ! सभी उसे धक्का मार रहे थे ,लेकिन वो वहीं प अपने को बचाने का प्रयास करती बैठी थी।
मुझे लगा ट्रेन आ रही तो उठ जाएगी,ट्रेन प्लेटफार्म पर खड़ी थी ।वो नहीं उठी, मैंने भी नजर फेर लीं ,और सोचा मुझे क्या,और ट्रेन पे चढ़ गई
लेकिन फिर जाने क्या हुआ ,मै रेंगती ट्रेन से उतर गई,एक दो लोग चिल्लाए भी,की कैसी पागल है।
मै तुरंत उसकी ओर बढ़ी ,और गुस्से से बोली कि पागल क्या? क्यों बैठी है यहां वो और चिल्ला के रोने लगी ,तो मेरा हृदय थोड़ा पिघला और मैंने उसका मुंह उठाकर अपनी ओर किया तो मै अवाक रह गई , वो अंधी थी ईश्वर न इस सुंदर दुनिया में जन्म तो दिया था,लेकिन इस दुनिया को देखने के लिए आंखें नहीं ।
अब मै किसी मोम की तरह पिघल चुकी थी ,मैंने आस पास के लोगों से पूछा कि ये कब से बैठी है यहां? लोगों ने मुंह बिचका कर इंग्लिश तर्ज पर उत्तर दिया ----आई डोंट नो ___ मुझे आश्चर्य नहीं हुआ।क्योंकि इस धरती पे लोगों के दिल सीमेंट से मजबूत हो गए । मैंने पुलिस से मदद लेने कि कोशिश की ,वो मेरे साथ आए और उससे पूछे लेकिन वो बताने म असमर्थ थी ,उसकी हिचकियां रुकने का नाम ही नही ले रही थी।
मैंने उसकी पीठ पे हाथ फेरा तो उसने मेरा हाथ तेजी से पकड़ लिए ,मै भी उसका साथ बैठ गई और उसका हाथ पकड़ के पूछा तो ,उसने बताया कि
उसकी ब्लाइंड स्टिक कहीं छूट गई और लोग धक्का देकर उसे यहां उतार दिए और वह दोपहर से रो रही ।
उसका फोन डिस्चार्ज हो गया जिससे वो किसी से संपर्क नहीं कर पा रही। ये सब सुनते ही मन में अजीब सी पीर उठी ।क्या हम इतने निर्दय है । कि किसी अंधे को रास्ता ना दिखा सके,स्कूल में घर में , परिवार से हमने कुछ नहीं सीखा ,तब तक २..४ लोग और जमा हो गए थे।
मैंने उसको दिलासा दी और उसका फॉर पुलिस स्टेशन पे चार्जिंग के लिए लगाया और उसके लिए जूस लेकर आई ।पहले तो उसने मना कर दिया जूस पीने से ,लेकिन जैसे मैंने उसको प्लीज़ बोला वो गटागट पी गई। जैसे कोई धरती बरसों से प्यासी हो।
मैंने उसका घर फोन किया तो उसके घर वाले भी उस ढूंढ रहे थे । उसका भाई लेने आने के लिए बोला।
मै भी उसका हाथ थामे बैठी थी।
वो बोली बप्पा बहुत मारेंगे कि छड़ी कहां खो दी, मैंने पुलिस को बोला कि इसकी छड़ी कहीं से दिलवा दीजिए , तो वो अकड़के बोले मैडम हमने ठेका लिया है क्या?
फिर मैंने कुछ नहीं सोचा पर्स निकाली ,आज ही आंखों का चश्मा बन ने को दिया था , लेकिन शायद मुझसे ज्यादा जरूरत आज इस लड़की को थी ,मैंने ५०० का नोट उसे देते हुए कहा कि रख लो, अपनी स्टिक लेना।
उसके पास जवाब नहीं था मुझे कुछ कहने के लिए
बस वो हाथ पकड़कर यही कह पाई -----------दीदी आप हमेशा खुश रहेगी ।मै खड़ी हो गई और उसको बोली कि अपना ध्यान रखना ।पर वो शायद मुझे जाना नहीं देना चाहती थी |उसके वो शब्द अभी तक याद है कि ------ दीदी थोड़ी देर और रुक जाइए न
बेटे का बार- बार फोन आ रहा था, मै भी सोच रही थी , कि आज तो बहुत देर हो गई है।अब चलना चाहिए,
मैंने उससे हाथ छुड़ाकर तेजी के साथ भीड़ को धक्का देते हुए और अपने आसूं को छुपाते ट्रेन में चढ़ गई । मैं उसको छोड़कर अपने कर्त्तव्य पथ की ओर रही थी ,लेकिन मेरा मन उसकी तरफ ही लगा था |
आज घर पहुँचने में बहुत देर हो जायेगी ,कितना सारा काम करना है ,घर जाकर मन में बहुत संतोष था |
और वो मेरी इस गुलाबी डायरी की अंधी परी बन गयी।
कल्पना श्रीवास्तव
दमोह मध्य प्रदेश
दिनांक -21/07/19
समय -9:00 रात्रि..
आज का दिन बढ़िया निकला जिसकी उम्मीद भी कम सी थी वो सब भी हुआ|खुशी के पल परिवार के साथ जिए |आज सुबह सुबह मेरे बड़े भाई भाभी और नन्ही सी परी मेरी भतीजी घर आये, जो कि हर बार बता कर आते है पर आज अचानक बिन बताये सरप्राइज देने और दीदी भी दोनों लाड़ली बेटियों को लेकर आने वाली है दोपहर तक वो भी आ गई बड़े दिनों बाद आज सब साथ है सारे भाई बहिन और दोनों के बच्चे पहली बार मिले और छोटी सी उम्र में भी मामा बुआ की बेटीयों से मिल खुशी बच्चों के चेहरे पर अलग ही थी अभी सब बच्चे तय करने में लगे थे कौन बड़ा कौन छोटा कौन किसे दीदी बोलेगा, और हम अपना बचपन फिर से याद कर बहुत ख़ुश थे और बच्चों साथ फिर पुरानी यादें ताज़ा करने में लगे थे |
मेरी डायरी
वर्षा सोनी दमोह मध्य प्रदेश
डायरी लेखन
रविवार
20 सितंबर 2020
रात्रि - 10:00
आज सुबह से ही मां के पेट में असहनीय पथरी का दर्द था। वह चाहकर भी बिस्तर से नहीं उठ पा रही थी। पिताजी को सुबह ही जल्दी ठेकेदारी पर जाना था। गैस भी अचानक खत्म हो गई अतः उन्होंने स्टोव पर पोहे बनाये और जल्दी आऊंगा कहकर चले गये। दोपहर के तीन बज गये, पिताजी नहीं आये। हम सभी को बहुत भूख लग रही थी। आज से पहले मेने कभी खाना नहीं बनाया था। कहते हैं किसी भी परिस्थिति में नारी अपने अंदर सौगुना ऊर्जा का समावेश कर ही लेती है। मेने स्टोव पर ही आढे तिरछे पराठे बनाये और अचार नमकीन के साथ भाई बहिन को खिलाकर उनकी क्षुधा शान्त की। थोड़ी देर बाद पिताजी भी आ गये। मां को दवाई देकर स्टोव जलाने लगे तभी मेने उन्हें रोका और कहा कि पापा पहले आप खाना खा लो। उन्होंने पूछा - खाना कहाँ से आया? मेने कहा - पापा खाना मेने बनाया है। "मेरी 10साल की बच्ची आज इतनी बड़ी हो गई।" रूंधे हुए गले से यह कह कर पिताजी ने मुझे गले लगा लिया। आज से पहले कभी पिताजी ने मुझे गले नहीं लगाया था यह मेरे लिए भी अविस्मरणीय क्षण था इसलिये आंखों से खुशी के आंसू निकल रहे थे। मैंने देखा पिताजी भी मुझे देखकर रो रहे थे। आज पिताजी की आंखों में खुशी और पश्चाताप दोनों के आंसू थे क्योंकि बेटे की चाहत में उन्होंने मुझे कभी नहीं अपनाया था।
आज मेरी खुशी इतनी प्रगाढ़ है कि शायद ही नींद आये।
अर्चना बामनगया।
दिनचर्या का विवरण
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धाराशिव ( बिलाईगढ़ )
दिनांक - 19 - 09 - 2020
दिन - शनिवार
समय - 9 : 45 बजे रात्रि
आज का दिन कुछ अच्छा नहीं गया । सबेरे स्नान और योग - ध्यान के पश्चात स्वल्पाहार लिया । फिर फसल देखने खेत चला गया । लहलहाते हुए हरे - भरे धान के पौधे को देखकर मेरा मन प्रफुल्लित हो गया । खेत से आने के बाद 11 बजे ऑनलाइन क्लास लिया । चूँकि मैं एक शिक्षक हूँ और कोरोना के कारण स्कूल भी बंद है । इसलिए अंग्रेजी की पढ़ाई मोबाइल से ऑनलाइन ले रहा हूँ ।
इसके बाद खाना खाकर आधा घण्टा थोड़ा आराम किया । बैंक और पोस्ट ऑफिस में कुछ काम था इसलिए अपनी धर्म पत्नी के साथ दोपहर 1 बजे बिलाईगढ़ चला गया । लेकिन शनिवार होने के कारण और कुछ अपनी गलती से कोई काम नहीं हुआ । थोड़ी खरीददारी करके घर वापस आ गये ।
किन्तु मेरा मन अशान्त हो गया । पुस्तक पढ़ने का प्रयास किया तो मन ही नहीं लगा । बेचैन रहने लगा । शाम को कॉपी और कलम लेकर अपने बाड़ी के गार्डन में गया । धीरे से कविता लिखने का प्रयास किया और लगभग डेढ़ घण्टे मे एक अच्छी कविता बन गई । तब कहीं जाकर अच्छा लगा और मन आनन्दित हो गया । इतने में चाय भी आ गई ।
इसके बाद अपने दोनों बच्चों के साथ नाला तरफ घूमने निकल गये । फिर वापस आकर आरती - पूजा के बाद रात्रि 8 : 30 बजे भोजन ग्रहण किये । फिर टी. वी. पर समाचार देखते - देखते 9 : 30 बज गये । तत्पश्चात अपनी पत्नी व बच्चों से कुछ वार्तालाप किया और अब 10 बजे प्रभु को धन्यवाद देते हुए प्रभु का चिंतन करते - करते सोने जा रहा हूँ । हरि ॐ.....
लीलाधर कुम्हार
निडरता की हार
नांगलोई,दिल्ली
13 नवम्बर, 2017
रात 11:07
रात के 11 बज गए है और मैं दो घण्टों से यही छत पर बैठी हूँ । हमेशा की तरह खामोश रात है और मन मे बहुत सारे सवाल । लेकिन आज की रात और आज के सवालात में जमीन आसमान का अंतर है ।
आज दोपहर करीब 2:20 पर मैं और मेरी दोस्त रीमा और सीमा अभी कॉलेज की क्लास खत्म करके घर को जा रहे थे । आज मीनाक्षी और मेनका नही आई क्योंकि उनको शायद कुछ काम था घर पर ये बात रीमा ने बताया । और हम बातें करते करते अपने बस स्टैंड पहुँचे "एस. पी. एम .सी. " और बस का इंतज़ार करने लगे । क्योंकि 2 बजे " डी.टी.सी. " का लंच होता है तो हमे बस का इंतज़ार करना ही था ।
हम बस का इंतज़ार कर ही रहे थे कि पांच मिनट बाद एक बस आई जिसका नम्बर था 236 । बस में बहुत भीड़ थी फिर भी हम तीनों बस में चढ़ गए और पीरागढ़ी पहुँचते पहुँचते आगे भी पहुँच गए ।
हम जैसे ही पीरागढ़ी रेड लाइट से आगे हुए वैसे ही मैंने देखा कि एक चोर ने एक भैया की जेब से उनका फ़ोन निकाल लिया और बड़ी सफाई से अपनी जेब मे रखा । मैंने और मेरे साथ खड़े एक आई.टी.आई. के लड़के ने ये सब देखा। मैंने तभी ये बात रीमा ,सीमा को बताई की फोन चुराया है इन्होंने और स्विच ऑफ भी कर के रख दिया । इतने में ही उद्योग नगर को पार कर हम अगले बस स्टैंड आ गए जिसे "4 नम्बर" का बस स्टैंड बोलते हैं और वो भैया वही उतर गए ।
उतरते ही उन्होंने अपनी जेब टटोली और फिर मुझसे चुप नही रहा गया -" मैं ज़ोर से चिल्लाई की आपका फ़ोन इन अंकल जी ने चुराया हैं" और ये बोलते ही बस चल पड़ी ।
बस के सारे लोग मुझे देख रहे थे और साथ मे वो चोर अंकल मुझे घूर रहे थें । एक दम से ही बस रेड लाइट पर रुकी और चोर अंकल मुझे बोले कि "क्यों झूठ बोल रही हो " ... मैं एक पल के लिए सुन्न खड़ी रही और एक दम से बोल पड़ी - "मैं नही आप झूठ बोल रहे है , मैंने और इस लड़के ने सब देखा है ।" न जाने क्यों वो लड़का चुप खड़ा रहा ... और अचानक से वो चोर रास्ता देख बस से उतरा कर भाग गया ।
उसके भागते ही बस में शोर होने लगा सब कहने लगे कि अरे ये लड़की सच बोल रही थी , सच बोल रही थी। लेकिन जब तक देर हो गई चोर भाग चुका था रेड लाइट ग्रीन हो चुकी थी, बस चल पड़ी अब मेरे सच बोलने का क्या ? मैं सुन्न खड़ी रही सीमा ने मेरा हाथ थामा था शायद मैं डर भी रही थी । बस में बैठी वो आंटिया रीमा और सीमा को सलाह देने लगी - "अपनी दोस्त को समझाओ उनके पास चाकू और ब्लेड होता है मार देंगे तो जिंदगी ख़राब हो जाएगी" और न जाने क्या क्या ...
हम नांगलोई पहुँच चुके थे मैं रीमा ,सीमा के साथ "भूतवाली गली" ही उतर गई , फिर दोनों ने मुझे समझाया कुछ नही हुआ प्रीति सब ठीक हैं , तूने तो कोशिश की अपनी, शांत हो जा मत रो... मैं उस समय चुप हो गई हम तीनों अपनी अपनी घर के लिए निकले। मैं घर आई खाना पीना खाया और सो गई , उठने के बाद घर मे सबको बताया और माँ भी मुझे वही बात समझाने लगी जो बस में वो आंटी समझा रही थी । मेरा कुछ सुनने का मन नही कर रहा था , दिमाग मे बस एक बात चल रही थी कि मैं मदद नही कर पाई ...। अब मैं लगभग 1 घण्टे से छत पर ही बैठी हूँ 12 बजने को हैं और दिमाग मे अब भी वही चल रहा हैं - काश बस में सब ने पहले मेरी बात को सच मान लिया होता तो आज उन भैया का फ़ोन उन्हें वापस मिल जाता , आखिर क्यों मेरी बात पर किसी ने यकीन नही किया ?
क्यों आई. टी. आई. वाला लड़का चुप खड़ा रहा?
आखिर क्यों ....?
शायद आज इसी सवाल के साथ मुझे सोना होगा क्या पता कल इसका जवाब मैं ढूंढ लू....
प्रीति कुमारी "अल्हड़"
सलका-अघिना
दिनांक- 05 सितंबर 2020
दिन- शनिवार
समय- रात्रि 10 बज
" शिक्षक दिवस पर मिले सम्मान से प्रसन्नता हुई"
प्रिय डायरी,
आज का दिन व्यस्त और खुशियों से भरा रहा। प्रात: दैनिक कार्यों को पूरा करने के बाद विद्यालय के बच्चों द्वारा आयोजित आनलाइन शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शामिल हुई। बच्चों को संबोधित किया और स्वरचित कविता "शिक्षक" प्रस्तुत किया जिसे सभी ने बहुत पसंद किया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की संस्था उद्घोष-शिक्षा का नया सबेरा के कार्यक्रम में शामिल होने का सुअवसर प्राप्त हुआ जहां मुझे "टीचर्स आइकान अवार्ड 2020"से सम्मानित किया गया।
संध्या के समय मुझे राज्य स्तरीय कविता प्रतियोगिता का परिणाम घोषित होने की सूचना मिली। मेरी तो खुशी का कोई ठिकाना ही ना रहा,जब मुझे पता चला कि मेरी रचना को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
इस तरह आज का दिन बहुत ही बढ़िया रहा। बच्चों की शुभकामनाएं और शिक्षक दिवस पर मिले सम्मान से परिवार, विद्यालय परिवार और सभी विद्यार्थियों में अत्यधिक प्रसन्न व्याप्त थी। सभी ने बधाईयां दी।
सभी के स्नेह और सम्मान से मैं भावविभोर हो गई।सच ही तो है शिक्षक बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईश्वर को धन्यवाद देते हुए मैंने संकल्प लिया कि सदैव बच्चों, विद्यालय और राष्ट्र हित में अपने कर्तव्य पथ पर पूरी निष्ठा और लगन से अग्रसर रहूंगी। विद्यार्थियों का स्नेह और सम्मान ही मेरे जीवन की वास्तविक पूंजी है जिसे मैं सदैव अपने पास रखना चाहूंगी।इसी विचार में मग्न मैं रात्रि विश्राम के लिए चली गई।
रीता गिरी (व्याख्याता)
शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अघिना-सलका
विकास खंड-भैयाथान,
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़)
पुरस्कार वितरण समारोह
नई दिल्ली
19 सितम्बर 2020
रात्रि 10 बजे
आज विद्यालय में वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह था| सभी बहुत उत्साहित थे| लेकिन मैंने इसी वर्ष उस विद्यालय में कक्षा 8 में प्रवेश लिया था तो मैं थोड़ा मायूस थी| अध्यापिका क्रमवार कक्षा के होनहार विद्यार्थियों को और प्रतियोगिता में भाग लेने वाले और जीतने वाले विद्यार्थियों को पुकार रही थी और विद्यालय की प्रधानाचार्या उन्हें पुरस्कार स्वरुप ट्रॉफी और प्रमाणपत्र प्रदान कर रही थी| प्रांगण में उपस्थित सभी तालियाँ बजा रहे थे| मैं ख़ुशी से उन्हें देख रही थी और सोच रही थी कि मुझे तो इस बार कोई पुरस्कार नहीं मिलेगा क्योंकि मैं तो उस विद्यालय में उसी वर्ष आई थी| तभी अचानक से अध्यापिका ने मेरा नाम पुकारा और मैं चौंक गयी थी| मुझे लगा कि शायद कोई ग़लतफहमी होगी लेकिन उन्होंने फिर मेरा नाम पुकारते हुए मुझे स्टेज पर आने का किया तो मैं उठकरअसमंजस की स्थिति में स्टेज पर चली गयी| प्रधानाचार्य ने मुझे ट्रॉफी और प्रमाणपत्र थमाते हुए बधाई दी| मैंने देखा उस प्रमाणपत्र पर मेरा नाम है और मैंने क्षेत्रीय स्तर पर हुई निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है| आज मैं बहुत ज्यादा खुश हूँ क्योंकि हर वर्ष की तरह 4-5 पुरस्कार नहीं प्राप्त कर पायी थी लेकिन कम से कम एक पुरस्कार तो प्राप्त किया है|
घर पहुँच कर जब मैंने वो पुरस्कार अपने पापा और बहनों को दिखाया तो सभी बहुत खुश हुए और मैं तो पहले से ही खुश हूँ| आज का दिन बहुत अच्छा रहा| अगले वर्ष मैं बहुत सारे पुरस्कार अपने नाम करने वाली हूँ जैसे कि पिछले विद्यालय में करती थी| बहुत नींद आ रही है और अब मैं सोने जा रही हूँ|
मीना सिंह “मीन”
डायरी लेखन
20सितंबर 200, रविवार
रात्रि 10:30
आज का दिन व्यस्तता से भरा लेकिन अत्यंत विशेष रहा। आज कवि सम्मेलन में जब मंच पर प्रस्तुति दी तब पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा उस समय अत्यन्त हर्ष और गर्व की अनुभूति हुई और
इतने प्रतिष्ठित साहित्यकारों के मुख से स्वयं की प्रशंसा सुनकर हृदय प्रफुल्लित हो गया। घर आने पर मेरी सासू मां ने मुझे ढेरों आशीर्वचन के साथ उपहार स्वरूप नया मोबाइल दिया तब मेरी खुशी दोगुना बढ़ गई।
ईश्वर का बहुत-बहुत आभार
प्रेमलता चौधरी
डायरी लेखन
06 सितम्बर, 2020, रविवार
11:30 रात्रि
1घ3 ,हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी ,हिरन मगरी सेक्टर 4,उदयपुर ,राजस्थान
आज का दिन बहुत आराम से गुजरा। बड़ी खुशी मुझे आज मिली। मेरे परम मित्र रामचंद्र जी पालीवाल चारगदिया भीण्डर वरिष्ठ अध्यापक ने मुझे दूरभाष द्वारा बताया और बधाई दी कि मेरी रचना सितम्बर माह की शिविरा पत्रिका में पृष्ठ 11 पर "जीतेंगे हम" शीर्षक से प्रकाशित हुई है। इसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई ।मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राजस्थान शिक्षा विभाग के लोकप्रिय प्रतिष्ठित शैक्षिक मंथन-चिंतन की पत्रिका शिविरा में रचना का प्रकाशन होना अपने आप में एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। इसको प्राप्त करने के बाद मैंं नये संकल्प के साथ और कुछ रचना करने में जुट गया।आठ वर्षीयाबेटी पाखी को भी रचना लिखने के लिए प्रेरित किया । यह खुशी और दुगूनी हो गई यह जान करके कि सितंबर माह के इसी अंक में बाल शिविरा पृष्ठ पर बेटी पाखी की "मेरा शहर प्यारा शहर" के शीर्षक से उसकी स्वरचित रचना भी प्रकाशित हुई, सुंदर कलेवर के साथ। यह अपने आप में 8 साल की नन्ही उम्र में बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका में रचना प्रकाशन से खुशी की कोई सीमा नहीं है । इस इस खुशी को मैंने अपने साथियों के साथ और माता-पिता के साथ शेयर किया मैंने उसको सोशल मीडिया पर भी शेयर किया पिताजी को भी रचनात्मक लेखन में रूचि होने से उनको यह जानकर करके बहुत खुशी हुई और मुझे और आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया। रचना क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन कार्य के संकल्प के साथ सोने को चलता हूँ ।
ॐ शांति।जय हिन्द । जय जिनेन्द्र ।
मंगल कुमार जैन उदयपुर
डायरी लेखन
06 सितम्बर 2020 रविवार
10:30 रात्रि
1घ3 हि. मगरी सेक्टर 4,उदयपुर
आज मुझे बहुत बड़ी खुशी मिली। मेरे पापा ने मुझे बताया और बधाई दी कि मेरी रचना सितम्बर माह की शिविरा पत्रिका में "मेरा शहर प्यारा शहर" शीर्षक से प्रकाशित हुई है। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा । मुझे मेरे पापा ने बताया कि राजस्थान शिक्षा विभाग के लोकप्रिय शिविरा पत्रिका में रचना का प्रकाशन होना बहुत बड़ी बात है। मैंने अपने परिवार में मामा को नाना को दादा दादी को भी यह बात बताई सभी बहुत खुश हुए । मुझे भी बहुत खुशी हो रही है।
जय जिनेन्द्र ।
पाखी जैन उदयपुर
डायरी लेखन
दिनांक - 20 सितंबर 2020
दिवस- रविवार
समय- संध्या 6:45 बजे
आज प्रतिध्वनि समूह में इस छोटे से मगर सारगर्भित शब्द डायरी पर क्या लिखूं, यह मैं
अभी भी याने कलम चलाते वक्त भी तय नहीं कर पा रहा हूं ।
वैसे आम आदमी की नजरिये से देखुं तो मुझे भला डायरी में लिखने से क्या लेना देना।
हां डायरी उपयोग में लाता हूं, अपना लेखा-जोखा लिखने के लिये ,
चलो आज तक जो नहीं किया।
आज ही आज ही कर लेते उस बात की शुरुआत,
यानी डायरी लिखने की शुरुआत
कहां से करूं शुरुआत
अरे हां याद आया सुबह-सुबह अलसाई आंखों से सूरज की पहली किरण को देखते ही याद आया।
अरे आज तो झूम पर
कवि सम्मेलन है न,
चलो उसी की तैयारी
थोड़ी देर बाद में चालू कर लेते।
रोजमर्रा की आदत की तरह अखबार पढ़ना, मोबाइल देखना, फ्रेश होना इन सब को बहुत समय लग गया।
कवि सम्मेलन के लिए क्या लिखूं, क्या बोलूंगा
यह सोचने लगा तो ख्याल लाया श्रीमती को ही ध्यान में रखते हुए एक हास्य कविता लिख लेते हैं।
हम साहित्यकारों के नजरों में वही एकमात्र पात्र ऐसा है, जिस पर जो चाहे वह लिख लो, जो चाहे वह बोल लो।
पर सारा जमाना चाहे कितना भी भी कुछ भी कह ले।
यह बेचारी समर्पण की भावना से परिवार के लिए अपने आपको न्योछावर करते ही रहती है।
आज डायरी लिखने का पहला दिन, मुझे तो यह भी नहीं मालूम डायरी लिखते कैसे हैं।
अब मुझे नहीं लगता रात तक और कुछ विशेष होंगा।
तो दे रहा हूं, मैं मेरी कलम को विराम
सतीश
प्रतियोगीता के लिये
सतीश लाखोटिया
दिनांक - 19.09.2020
विधा - डायरी
मेरा प्रथम उच्च मंचीय काव्यपाठ
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हरदोई,
25, फरवरी 2019,
सोमवार,
05:00 बजे,
बेहद प्रसन्नता और गौरवानुभूतिपूर्ण रहा आज का दिवस। आज मुझे अपने संस्था उत्तर प्रदेश भारत स्काउट/गाइड की जिला संस्था हरदोई व जिला विद्यालय निरीक्षक जी के माध्यम से हमारे जनपद के जिलाधिकारी श्री पुलकित खरे जी के विशेष आमंत्रण पर उनके आतिथ्य में जनपद के प्रतिष्ठित कलमकारों के समक्ष काव्यपाठ करने का न सिर्फ अवसर प्राप्त हुआ बल्कि उनके हाथों सम्मानित होने का गौरव भी प्राप्त हुआ। वापस घर पहुंचने पर हमारे परिजनों विशेषकर माता-पिता जी ने बधाई देते हुए आशीष देकर शाबाशी दी। बेहद प्रसन्न हूँ। अब आगे मैं साहित्य सेवाहित आज से अग्रसर हो रहा हूँ। यह हमारा साहित्यक्षेत्र में प्रवेश के पश्चात प्रथम स्वतंत्र मंच और जनपद स्तरीय काव्यपाठ रहा।। सोने जा रहा हूँ। इन यादगार पलों को यादगार बना लेता हूँ।
आशुकवि प्रशान्त कुमार"पी.के.",
पाली, हरदोई (उत्तर प्रदेश),
विधा - डायरी लेखन
विषय - स्वतंत्र
लेखिका - मेघा जोशी
( *छोटी* *एम* *जे* - डायरी को सम्बोधन )
*मेरी* *डायरी* *के* *अंश*
07/12/2016
बुधवार ( 1:27 pm )
एस आर छात्रावास (रूम नं 9)
गुड आफ्टरनून छोटी एम जे....
आज फिर एक अलग अनुभव साझा कर रही हूँ तुमसे, इतना उतावलापन है मुझमें, रूम पर पहुँचते ही सीधे तुम्हारी ओर रूख किया। पता है आज निबन्ध लेखन प्रतियोगिता थी कैम्पस में। औरों की सामान्य भाषा में Essay writing competition.
मैंने भी प्रतिभाग किया उसमें, काफी अच्छे विषय दिए गए थे, और मैंने अपना 100% दिया। लेकिन एक बात ने मुझे थोड़ा सा आहत किया, कि हिन्दी में निबन्ध केवल मैं लिख रही थी। बाकी सभी प्रतिभागी अंग्रेजी को प्राथमिकता देने वालों में से थे। हिन्दी की इतनी आलोचना क्यों?? वो भी अपनी ही मिट्टी में...
यह सवाल मेरे मन को आए दिन परेशान करने लगता है। हाँ हमें जरूरत है अंग्रेजी सीखने की, लेकिन हिन्दी भूलने की जरूरत हमें नहीं है। लोग हिन्दी को वैकल्पिक भाषा की तरह प्रयोग कर रहे हैं। मेरे विचार से तो अंग्रेजी की जहाँ आवश्यकता हो केवल वहीं प्रयोग में लाई जानी चाहिए, अन्यत्र हिन्दी।
और ये सही भी है, यदि आपके आस पास चार लोग ऐसे हैं जो हिन्दी समझ सकते हैं, तब हिन्दी का प्रयोग करने में हिचकना नहीं चाहिए। कुछ लोग केवल इसलिए अंग्रेजी बोलते हैं , कि हमें भी अंग्रेजी आती है। क्या ये दिखलावटीपन सही है???
इस बात पर लेखक जैनेन्द्र कुमार का लेख बाजार दर्शन याद आता है... वहाँ उन्होंने बाजारीकरण की बात की थी, यहाँ *अंग्रेजीकरण* की संज्ञा उपयुक्त रहेगी ।
छोटी एम जे! यह संज्ञा मैं बतौर आलोचक प्रयोग नहीं कर रही हूँ, मैं भी अंग्रेजी सीख रही हूँ, भारत से बाहर जाने पर यही मदद करेगी..... लेकिन भारत में रहने के लिए ????
कुछ लोग विदेश जाने के सपने देखते हैं, बकायदा जाएँगे भी.. लेकिन एक समय सीमा के बाद वायुयान उन्हें फिर भारत की धरती पर ले आएगा, और फिर उसी पुरानी मिट्टी की खुशबू, वही अपनापन..... फिर अपनी मातृभाषा के साथ सौतेला व्यवहार क्यों???
जैसे डायनासोर का नाम आज विलुप्त प्रजातियों में है, कुछ समय बाद भाषाओं में कहीं हिन्दी न हो..... ये कटु शब्द मेरे स्वयं के शब्द नहीं हैं, आज के भारत का हाल है।
14 सितम्बर को पूरे भारतवर्ष में हिन्दी दिवस मनाया जाता है, लेकिन क्या सार्थक है एक विशेष दिवस को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाना?? जबकि आज आधुनिक पीढ़ी हिन्दी से वंचित है, वह तो केवल हिन्गलिश वाली हिन्दी जानती है.....
चलो बहुत निकाली कालेज की भड़ास, अब मुझे मल्लीताल जाना है....
फिर मिलेंगे.....
मेघा जोशी
डायरी लेखन
20/09/2020
दिन - रविवार
रात्रि 11:30 बजे
डायरी का पृष्ठ नंबर - 52
अब तो बहुत थक गई हूँ सोना चाहती हूँ पर अपने भाव की अभिव्यक्ति न करूँ, जब तक अपने मन की बात कलम से इस प्यारी डायरी पर न लिखूं, नींद कहाँ आती है! आज के दिन में फिर गाड़ी से जाते हुए भिखारी को देखा और दुख हुआ कि भारत में ग़रीबी और लाचारी कब ख़त्म होगी,मूलभूत सुविधाएं रोटी कपड़ा और मकान हर आदमी को कब मिलेगी?शायद मूल कारण हमारे देश का सिस्टम है, जिसे ठीक किया जाना चाहिए। यह तो हम सभी की जिम्मेदारी है, पर शायद भ्रष्टाचार ही इसकी जड़ है। बदलेगा और निश्चित बदलेगा मेरा भारत, ऐसा मेरा मानना है।
बस इतना ही...आँखों में नींद का खुमार चढ़ गया है और सपने में देखूँगी मेरा स्वर्णिम भारत, शुभ रात्रि, स्वीट ड्रीम🌹
मधु भूतड़ा की कलम से
- मधु भूतड़ा
डायरी लेखन
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दिनांक 19.09.2020
वार शनिवार
तिथि दितीय।
समय 9.30 रात्रि
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प्रात: ईश्वर का स्मरण करते हुए उठी। माता पिता को स्मरण किया।फिर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर विधालय के लिए तैयार हो गई।विधालय पहुंच कर शाला दर्पण पर सभी की उपस्थिति दर्ज की।उसके बाद अभिभावकों से मिलकर छात्र वृति के फार्म भरें।फिर कुछ बच्चों के प्रवेश शाला दर्पण पर प्रविष्ट किए।विधालय के कामों में व्यस्त। उसके बाद विधालय की छुट्टी होकर घर आई।उसके बाद घर पर काम किया।दोपहर को खाना खा कर आराम किया।। फिर शाम को खाना बनाया।उसके बाद रात्रि ईश्वर का ध्यान किया।पदम साधना करके , ईश्वर का स्मरण करते हुए, रात्रि विश्राम किया।प्रभु भक्ति भावना से सुबह के लिए सो गई।
स्वरचित एवं मौलिक।
रेखा पारंगी
बिसलपुर पाली राजस्थान।
भोपाल
दिनांक-29 दिसम्बर 2019
दिन -रविवार
समय-रात्रि 10 बजे
प्रिय डायरी,
आज मैं बहुत खुश हूँ।हम सपरिवार एक परिचय सम्मेलन में भाई के लिए लड़की देखने गए थे। भाई का विवाह करना था तो वधू तलाश रहे थे। परेशान थे कुछ कमियों के कारण भाई का रिश्ता पक्का नहीं हो पा रहा था। भगवान का धन्यवाद है कि आज रिश्ता पक्का हो गया । दोनों परिवार की सहमति मिल गई।घर में सभी बहुत खुश हैं ।सबकी खुशी देखकर अच्छा लग रहा है। भाई तो बहुत ही खुश है।घर में अभी तक कोई सोया नहीं है। मुझे भी खुशी के कारण नींद नहीं आ रही है। सोच रही हूँ कौन -सी साड़ी भाई की शादी में पहनूँगी।कौन से गाने पर नृत्य करूँगी।अभी तो ये सब चीजों को लेकर मेरा मन भटक रहा है प्रिय डायरी।
मीना जैन
डायरी लेखन
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दिनांक 19.09.2020
वार शनिवार
तिथि दितीय।
समय 9.30 रात्रि
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देर हो जाने के ख्याल से आँखे जैसी ही खुली , माँ का मुस्कुराता हुआ देख कर मैने सुकून की साँस ली। ससुराल मे तो माँ के बिनना खुद को बहुत अकेला महसूस का रही थी । माँ क्या होती है और उसका सुखद एहसास कैसा होता है उनसे दूर होकर ही पाया। फिर तो पूरा दिन ही मै माँ का आचल पकड़ पकड़ ही घूमती रही और आपने मायके का हर दिन माँ के साथ ही बिताने की मन मे शपत भी ले ली,
अब हर रोज मे माँ के साथ बीते हुए वो सुखद पल लिखा कर अपनी यादों की इस डायरी को खास बन लुंगी
क्यु थी मे खामोश तेरे संग माँ मेरी
जब तु ही है मेरा हर शब्द माँ मेरी
स्व रचित
गीता मिश्रा (मुस्काराहट)
अलवर
डायरी लेखन
तिथि _19_9_2020
वार _ शनिवार
समय 9:30
26 जून 1980 को गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में शाम को एक कार्यक्रम में जब दो तीन आइटम के बाद मेरा नाम पुकारा गया तो मैं हैरान थी कि पिता जी को क्या हुआ जो स्टेज पर मुझे आमंत्रित कर रहे हैं। डरते-डरते गई और स्टेज पर जाकर एक बहुत बड़ा जनसमूह देखकर घबरा गई । ये मेरा पहला अवसर था फिर ना जाने कहाँ से हिम्मत आई और मैने पूरे जोश से देश भक्ति गीत गाया तो पूरा हाल तालियों से गूँज उठा । पहला पुरस्कार जब माँ ने देखा तो उनकी आँखो की चमक आज भी नहीं भूली हूँ मैं।
सूफिया ज़ैदी
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
डायरी
विषय - स्वतंत्र
डायरी लेखन
ग्रेटर नोएडा
19/09/2020,शनिवार
रात्रि 11:03 बजे
आज का दिन थोड़ा चिंता भरा रहा,सोच रही थी कुछ लेख नया लिखूं,कार्य की व्यस्तता के कारण समय न दे सकी। मेरे विवाह का प्रस्ताव आया सब बात कर रहे कि लड़का बहुत अच्छा व सरकारी नौकरी है,बेटी खुश रहेंगी। माँ ने ईश्वर से प्रार्थना की बस जल्दी से विवाह हो जाएं,सुखी से बिटियां अपने घर संसार संभाल लें। मैंने भी देखा लड़का अच्छा है मन में ख़्वाब हजार आ रहे थे खुशी के कारण नींद नहीं आ रही थी, मन में बस एक ही बात मेरा भी एक परिवार होगा जहां मैं कह सकूँगी कि आप मेरे हो।
-भावना गौड़.
डायरी लेखन
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दिनांक 19-09-2020
दिन. शनिवार
समय. रात्रि 10:00 बजे
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प्रतिदिन की तरह आज भी सुबह 4:00 बजे उठ कर ईश्वर को याद किया | अपने माता-पिताजी को प्रणाम कर पृथ्वी माता को स्मरण किया | दिनभर मेरे द्वारा किसी प्रकार के कोई और किसी के भी अहित न होने का संकल्प लेते हुए प्रभु को धन्यवाद दिया कि मेरी ज़िन्दगी में एक नया दिन कुछ नया करने के लिए दिया है | दैनिक कार्यो से निवृत्त होकर प्रात: भ्रमण के लिए निकल गया | लौटकर आते समय 7:00 बज गया | सुबह 8:00 बजे तक तैयार होकर पूजा-पाठ किया और नास्ता कर विद्यालय के लिए चला गया | लगभग 3 घन्टे बाद एक मित्र ने फोन कॉल कर बताया कि उसके गाड़ी से एक्सीडेंट हो गया है, मैं तत्काल विद्यालय से छुट्टी लेकर ईलाज पानी के लिए निकल गया | समय पर ईलाज होने से किसी का अहित नहीं हुआ, पर आज दोपहर के खाना भी याद नहीं रहा |
पर मन में संतुष्टि रही कि आज के दिन किसी का भला हुआ | रात्रि 9:00 बजे तक घर आया और खाना खाकर आराम किया साथ ही सभी शुभचिंतक मित्रों को संदेश देने और हालचाल लेते रात्रि 10:00 बज गया |
अब मैं सोने जा रहा हूँ...
प्रभु को धन्यवाद देते हुए सो गया.... |
धनेश्वर प्रसाद देवांगन.......
डायरी लेखन
प्रतिध्वनि साहित्य प्रतियोगिता
दिनांक 20/09/2020
बिलाईगढ़
दिनांक 05/09/2019
समय 9:00 pm
आज का दिन बहुत ही अच्छा रहा l स्कूल मे शिक्षक दिवस का कार्यक्रम मनाने के बाद विकासखंड मुख्यालय बिलाईगढ़ जाने का मौका मिला जहाँ विधान सभा स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था l समारोह मे एस डी एम,जिला शिक्षा अधिकारी,जिला मिशन समन्वयक, स्थानीय विधायक,बी ई ओ,बी आर सी सी उपस्थित थे l सेवा निवृत्त शिक्षकों को सम्मान करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए विधान सभा स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए मेरा नाम पुकारा गया l मैं अपना नाम सुनकर आश्चर्यचकित हो गया क्योंकि पहले से इस संबंध में कोई जानकारी या सूचना नहीं दी गई थी l जब सम्मान पत्र पुरस्कार लेकर के घर गया तब मेरे पिताजी मेरी पत्नी मेरे बच्चे बहुत खुश हुए हैं l मेरे पिताजी की आंखों में आंसू आ गए उन्होंने कहा यह दिन देखने के लिए काश तुम्हारी मां जिंदा रहती l
महेत्तर लाल देवांगन
बिलाईगढ़ छत्तीसगढ़
डायरी लेखन*
जबलपुर
19 सितम्बर , 2020, शनिवार
रात्रि 9 : 30 बजे
आज सुबह टहलने के लिए निकला ही था कि बहुत से छात्र रास्ते में मिलते ही पूछने लगे कि हम लोगों को विद्यालय कब आने मिलेगा ? मैं पहली बार शिक्षक जीवन में निरुत्तर था । टहलने के पश्चात घर आकर दैनिक क्रिया के उपरांत विद्यालय पहुँचा परन्तु छात्रों द्वारा पूछा गया प्रश्न मन मस्तिष्क को झकझोर गया ।
दिन भर मैं इसी प्रश्न के उत्तर की खोज में लगा रहा कि क्या होगा छात्रों का भविष्य , कब खुलेंगे विद्यालय , कब पुनः विद्यालय कि घंटी बजेगी ? परन्तु सार्थक उत्तर नही मिला । आज किसी काम मन नही लगा । घर पहुँचकर बहुत थका सा महसूस कर रहा था । आज भोजन भी अच्छे से नही किया । भोजन के पश्चात टहलकर वापस आया औऱ इस उम्मीद से टेलीविजन खोला की कोई सकारात्मक समाचार देखने को मिलेगा परन्तु आज भी कोरोना का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा था ।
विशाल चतुर्वेदी " उमेश "
डायरी लेखन
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दिनांक 19.09.2020
वार शनिवार
समय 9.30 रात्रि
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मेरी मन की बात मेरी डायरी के साथ,
कल का दिन बहुत ही दुख में बीता किंतु ज्ञानवर्धक भी रहा | कुछ समाजसेवी संस्थाएं जिन्हें सिर्फ अपना नाम करना है समाज सेवा से उनका कोई मतलब नहीं, ऐसे ही कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने आज एक प्रोग्राम रखा जहां करोना काल के समय में जिन जिन व्यक्तियों ने गरीब और पीड़ितों की सहायता की है उन्हें सम्मान पत्र दिया जाना था | आप यकीन मानिए गिने-चुने व्यक्तियों को ही सम्मान पत्र दिया जिन्होंने कोरोनाकाल में गरीब और पीड़ितों की सहायता की थी | बाकी सम्मान पत्र उन्हें दे दिए गए जिन्होंने कोरोना काल में रत्ती भर भी काम और सहायता नहीं की, सिर्फ और सिर्फ दिखावा और झूठ परोसा जा रहा है | यह देख कर बहुत दुख हुआ किंतु एक ज्ञान भी प्राप्त हुआ कि मैं, ऐसे लोगों का सदैव विरोध करूंगा जो झूठ का सहारा लेकर, समाज में दूसरों की सहायता और दुख दूर करने के नाम पर झूठ फैला रहे हैं |ईश्वर ऐसे लोगों को सद्बुद्धि दे|
स्वतंत्र लेखक
अमित राजपूत
उत्तर प्रदेश गाजियाबाद
डायरी लेखन
भरतपुर
20.05.2019
दिन- सोमवार
समय- शाम 8.00 बजे
ग्रीष्मकालीन छुट्टियां ! सुबह चाय- नाश्ते का समय ! परिवार के सदस्य चाय की चुस्कियां ले रहे थे! बेटी चंचल अचानक बोली- पापा! अबकी बार तो मथुरा वृन्दावन भ्रमण का मूड़ है ! मैंने कहा- फिर देर किस बात की ? दिन में पूरी योजना तैयार कर ली गई !
मथुरा
21.05.2019
दिन- मंगल वार
समय- रात्रि 9.00 बजे
पूरा परिवार हर्षोल्लास के साथ प्रातः 4.30 पर पर जाग गया! स्नानादि से निवृत्त होकर तैयारी होने लगी ! आलू के परांठे, हलवा, दाल के पकौड़े एवं मावा तैयार किया गया ! मेरा बेटा गाड़ी ( बलेनो) साफ करने में जुट गया!
प्रातः 8.00 बजे हम मथुरा के लिए रवाना हो गये! भरतपुर से मथुरा की दूरी 40 किमी है! हम लगभग प्रातः 8.45 बजे मथुरा पहुँच गए! बाबा जयगुरुदेव आश्रम में विश्राम किया! नाश्ते का आनंद लिया! बच्चे खुशी में मग्न थे! वहाँ पर हमने रात्रि को ठहरने की जानकारी की और बृजवासी होटल एन्ड रैस्टोरेन्ट के लिए रवाना हो गये! वहाँ मैनेजर से बात करके 2000 रुपये में एक कमरा मय टायलेट (4 बैड) बुक कराया! कुछ समय होटल में आराम किया! दोपहर को खुद के बने खाने का आनंद लिया!
शाम 5.00 बजे प्रेम मन्दिर वृन्दावन के लिए रवाना हो गए! जिसकी दूरी लगभग 15 किमी है! प्रेम मन्दिर के दर्शन किये! वहाँ कुछ अंग्रेज लोग भक्ति रस में डूबते नजर आए! वहाँ से हम रंगीली महल पहुंचे! राधा रानी के दर्शन किये! बच्चे थक चुके थे लेकिन आनंद अनुभूति के कारण उनका जोश कम न था! देर शाम हम लोग वापस बृजवासी होटल पहुँच गए! थोड़ा आराम किया और, बच्चे खुशी से दिनभर के भ्रमण की चर्चा करते रहे! देर रात वार्तालाप होती रही ! बच्चों ने होटल में गानों, भजनों का आनंद लिया और रात को खाना खा कर सो गए !
भरतपुर
22.05.2019
दिन- बुधवार
समय- रात्रि 10.00 बजे
प्रातः 5.00 बजे सभी जागे! स्नानादि से निवृत्त होकर नाश्ता किया! प्रातः 8.00 बजे हम लोग श्री कृष्ण बलराम मन्दिर के लिए रवाना हुए, प्रसाद भोग लगाने के बाद दर्शन किये! मन्दिर को निहार कर बच्चे आनंदित थे! थकान तो खुशी के सामने कोसों दूर थी! फिर हम निधि वन पहुंचे जिस की दूरी 13 किमी है! भ्रमण के बाद खाने का आनंद लिया! दोपहरी हो चुकी थी, सो हम लोग वापस होटल ( मथुरा) पहुंचे ! आराम किया! शाम 5.00 बजे होटल का बिल चुका कर भरतपुर के लिए रवाना हो गये! बीच में भूतेश्वर के दर्शन करने के बाद रमन रेती ( गोकुल) पहुँचे! जिसकी दूरी 13 किमी थी! शाम को बच्चों ने रमन रेती कि लुत्फ़ लिया और देर रात 8.46 बजे अपने घर पहुंचे?
जगदीश बेजान ब्याख्याता
भरतपुर ( राजस्थान)
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चंद्रिका हम सब को छोड़ कर चली गईं......
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अलीगढ़
दिनांक 10 अगस्त 2020
समय रात्रि 2 बजे
आज तो शायद नींद आयेगी ही नहीं मुझे। आज तो पूरा दिन भी रोते हुऐ निकला मेरा।
पूरे दिन बस चंद्रिका के बारे में ही सोचती रही। चाचा ने कितनी मेहनत की थी,चंद्रिका को एम.बी.बी.एस डॉक्टर बनाने के लिए। कितनी सारी उम्मीदें लगा रखी थी चाचा ने चंद्रिका से। अपने जीवनभर की कमाई लगा दी, चंद्रिका को बचाने के लिए, लेकिन फिर भी चाचा उसे बचा ना पाए।
कितनी मनहूस साल आई है ये 2020।
7 जनवरी 2020 को चंद्रिका को पता चला कि उसे ब्लड कैंसर है। आठ महीने मौत से जूझने के बाद, वह हमे छोड़ कर चली गईं। क्या हाल हो रहा होगा चाचा और चाची का।
आज मुझे जीवन की परिभाषा बदली सी लग रही है। कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या है जीवन?
आज पूरे दिन बस यहीं सोचती रही कि क्या है अच्छे कर्म और बुरे कर्म? यहाँ कभी भी किसी के साथ कुछ भी हो सकता है। कोई भी पल हमारा आखिरी पल हो सकता है। कभी भी खुशियाँ दु:ख मे बदल सकती है।
जाने क्या क्या सपने सजाये थे चाचा जी ने अपनी डॉक्टर बेटी को लेकर, लेकिन सब टूट गये। कभी कभी मेरा दिल दिमाग़ से पूछता है क्या सच्च में चंद्रिका हमें छोड़ कर चली गईं? आज पूरे दिन उसका खूबसूरत हँसता हुआ चेहरा आँखों के सामने से हटा ही नहीं।
आज मुझे समझ आगया कि जो नियति में लिखा है वह हर हाल में होके रहता है। रुपया- पैसा, महनत, दुआँ, समझदारी और खुद ईश्वर भी नियति को बदल नहीं सकते।
अब थोड़ा सोने की कोशिश करती हूँ, शायद नींद आजाये। 4 बजे मुझे अपनी छोटी बहन चंद्रिका के अंतिम दर्शन के लिए निकलना है।
कामिनी वार्ष्णेय
अलीगढ़
प्रतियोगिता 13
दिनांक-19.09.2020
दिन- शनिवार
विधा- डायरी लेखन
गौचार
समय 10:00 अपराहन
आज का दिन शनिवार हमेशा की तरह सामान्य रहा।
प्रातः जगने के बाद नित्य क्रिया से निवृत होकर योगासन और ध्यान से प्रारम्भ हुआ। ततपश्चात सुबह के सभी घरेलू कार्य सम्पादित किये। और ठीक 10 बजे इस कोरोना काल मे बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए ऑनलाइन शिक्षण कार्य कर अपने दायित्वों का निर्वहन किया।तदुपरांत पुनः घरेलू कार्यों को सम्पादित किया जिसमें दिन का भोजन और अन्य कार्य सम्मिलित थे।
शाम को विद्यार्थियों द्वारा भेजे गए कार्य का ऑनलाइन
जांच की।रात्रि भोजन के पश्चात कल रविवार हेतु विद्यार्थियों के लिए वर्कशीट तैयार की।
अंत में, डायरी की अंतिम पंक्ति लिखने के पश्चात मैं सोने जा रही हूँ।पुनः नई उम्मीद और नई आशा के साथ।
प्रतिध्वनि निश्चित रूप से सही रूप में अपने साहित्य सेवा कार्य को निभा रही है ।प्रतिध्वनि परिवार द्वारा यह प्रतियोगिता करवाना और साहित्यकारों को नवोदित साहित्यकारों को विभिन्न विधाओं से परिचय कराते हुए उस पर अपनी कलम चलाने के लिए प्रेरित करने का सुकर्म प्रशंसनीय है। ऐसा करना बहुत जरूरी भी है। निस्वार्थ किया गया यह कार्य तारीफ करने योग्य तो है ही लेकिन देश में और बुद्धिजीवियों लिए प्रेरणास्पद भी है। साहित्यकारों ने बहुत उम्दा लेखन कार्य किया है सबको बधाई।
ReplyDeleteआपका धन्यवाद
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