पन्नों पर शब्द सम्मेलन...

हमारा लक्ष्य लेखकों को प्रकाशन की समस्याओं से छुटकारा दिलाना है। सत्य तो ये है लेखक पन्नों पर शब्दों से ऐसा संसार रच सकता है जो कल्पना से भी परे हो सकता है और उसे वो ही काम करना चाहिए। इसीलिए हमारी टैग लाइन है—
पन्नों पर शब्द सम्मेलन...

देश में अभी हजारों प्रकाशक आ गए हैं सभी बहुत सस्ते में पुस्तक प्रकाशन का सपना लेखकों को दिखाते हैं। बहुत से लोग अच्छा काम भी कर रहे हैं। बहुत से लोग अच्छा काम कर सकते हैं लेकिन उनको इसका अनुभव नहीं फिर भी करते हैं, और बहुत से अनुभव होने पर भी लेखकों की समस्याओं से अवगत नहीं हो पाते क्योंकि उनको अपने लाभ से ज्यादा मतलब है किसी के सपनों से नहीं।

लेखकों की कुछ समस्याएं जो हमें मालूम है क्योंकि हमारे संस्थापक स्वयं लेखक है और वो प्रोफेशनली 23 सालों से स्कूल की पुस्तकों के निर्माण का काम अपनी जॉब के अंतर्गत विश्व के सभी टॉप पब्लिशर का काम किया है। Pearson, कैंब्रिज, और ऐसे ही अनेक पब्लिशर की पुस्तकें बनाने का कार्य वो भी 23 साल से अधिक करना मतलब अनुभव का अभाव हो ही नहीं सकता। हमारे संस्थापक स्वयं स्कूल समय से लिखते रहे हैं और उसी के प्रकाशन के लिए अनेकों प्रकाशकों से जूझने के बाद 3 वर्ष पूर्व कुछ मित्रों के साथ एक पब्लिकेशन की स्थापना की जिसमें अनेक सपनों को पूरा करने में योगदान दिया। कार्यपद्धति और लक्ष्य तथा अन्य मतभेदों के बाद उस प्रकाशन को उन्हीं लोगों के हाथ सौंप कर अब एक प्रकाशन प्रतिध्वनि प्रकाशन Pratidhwani Publication  की स्थापना की है और साथ ही Ultramarine Studio की स्थापना भी की है जो छोटे बच्चों के शिक्षा सामग्री पर काम करेगी। 

हमारी टीम के सभी सदस्य लेखक और साहित्यप्रेमी हैं। इसलिए हम लेखकों की सभी समस्याओं को समझ भी सकते हैं और उनका निदान अपने अनुभव के आधार पर कर भी सकते हैं। 

प्रकाशकों की तथा लेखकों की मुख्य समस्याएं निम्न प्रतीत होती हैं—

1. आजकल कोई भी प्रकाशक बन जाता है और सोचता है कि बाहर से काम करवा कर कमाई करेंगे। उनको अनुभव नहीं होता।

2. किसी भी तरह से पैसे निकलवा कर जैसे तैसे प्रिंट करवा कर दे देना पुस्तक फोटोस्टेट की तरह दिखती है

3. बहुत से लोग लेखकों से पैसे लेकर गायब हो जाते हैं 

4. हजारों गलतियों के साथ पुस्तकें प्रकाशित कर देना।

5. प्रकाशक 32,000, 40,000 , 1लाख 90 हजार  और इससे भी अधिक के प्लान लेकर बैठे है और उनकी कमाई भी मोटी है। 

6. रॉयल्टी के नाम पर कुछ नहीं देते।

7. प्लान बहुत महंगे हैं

8. सस्ते प्लान में वो सिर्फ प्रिंट करके पुस्तकें देते हैं उसके बाद कुछ नहीं।

9. जो कुछ अच्छे प्रकाशक आते भी हैं जिनके संस्थापकों के पास अनुभव भी होता है लेकिन फिर उनमें से कुछ में अहंकार आ जाता है कि सिर्फ वो ही सही है और कोई न सही सोच सकता है और न सही कर सकता है। इस वजह से उनका लक्ष्य और सोच अच्छी होने के बाद वो अपने अनुभवी साथियों को अपने से दूर कर देते हैं और कमाई में लग जाते हैं।

ऐसी और भी हजारों समस्याएं हैं और हो सकती हैं।

हमारा मानना है कि आप पब्लिकेशन कहीं से भी किसी से भी करवा सकते हैं या करवा रहे है या करवाने जा रहे हैं और आपकी समस्याएं हैं या प्रश्न है जो अनुतरित हैं, कुछ जानकारी चाहिए जो नहीं मिल रही या ऐसी ही कोई बात जो मन में आ रही है उसे प्रकाशक से पूछे और एक बार हमसे भी जानकारी लें। 

यदि आप नहीं मांगेंगे तो हम अपनी किसी भी प्लान या ऑफर की जानकारी आपको नहीं देंगे। आप जिन सवाल का जवाब चाहें वो लीजिए बिना किसी हिचक के साथ। आप अपनी पुस्तक कहीं से भी पब्लिश करवाएं लेकिन हर शंका का समाधान करने के बाद। पुस्तक लेखक के लिए सपना होती हैं और उसमें बाद में कोई मलाल नहीं रहना चाहिए।

चूंकि हमारे सभी सदस्य लेखक है इसलिए हमने ये फैसला लिया कि शंका के समाधान का कार्य को हम सिर्फ लेखकों की सहायता के लिए करेंगे। कृपया अपना नंबर इनबॉक्स में दें ताकि हमारी टीम आपसे संपर्क कर सके, अन्यथा आप स्वयं भी दिए नंबर पर अपनी सुविधानुसार कॉल करके जानकारी ले सकते हैं।

हमारे मैसेंजर पर....
हमारे व्हाट्सएप पर : 9718546120
हमसे कॉल पर: 9718546120
हमें मेल करके : info.ultramarine1@gmail.com

धन्यवाद
प्रतिध्वनि प्रकाशन

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