प्रतियोगिता #08: मेहंदी पिया के नाम की
प्रतियोगिता #08 दिनांक -26 जुलाई 20 दिन --रविवार विषय- मेहंदी पिया के नाम की मेंहदी पिया के नाम की आज सजन मोहे अंग लगा लो, अंग लगा के मनतरंग जगा लो! आया सावन तीज का त्योहार, मितवा आओ गायें गीत मल्हार! रुनझुन बाजै मोरी पायलिया, कूके बाग में काली कोयलिया ! हरे-भरे उपवन चमन हरियाली, बहके मन, बहे पवन मतवाली ! मेंहदी पिया के नाम की रचाई, अनुरागी सजना के मन भायी! सोलह सिंगार सजा रुप अनूप, साजन का मन डोले रम्य मधुप! दिपदिप दमके कंगना झुमके, नाचे मन मोरनी लगाये ठुमके! रुप नशीला लोंग मारे लश्कारे, मेरी बिंदिया के भीने-भीने इशारे ! आओ चले आओ मन प्राण हमारे , मेंहदी रचाई है नाम की तुम्हारे ! पावन उत्सव मीठी-मीठी फुहारें, घेवर गुंजिया पीहर सेआये सिंदारे, झूलें सखियाँ रिमझिम पड़े फुहारें ! बरसों-बरस बरसे खुशियाँ ठहाके, हिलमिल सखियों संग झूला झूले! खिलखिलायें घर अंगना बहारें, तीजोत्सव की धूम हुये तुम हमारे!! सीमा गर्ग मंजरी मेरठ मेहंदी पिया के नाम की विधा - काव्य लाल रंग की मेहंदी में दुल्हन कितनी सुन्दर लगती है उसके हाथों की मेंहदी ना जाने कितने ख्वाब बुनती है मेहंदी रचाई है पिया के नाम की मेह...
"प्रतिध्वनि" साहित्यिक पत्रिका हिंदी जगत् में वह मशाल है जिससे ज्ञान की ज्योति हर क्षण प्रवाहित हो रही है ।इस पत्रिका द्वारा की जाने वाली साहित्यिक सेवा से हमारा देश और समाज रोशन हो रहा है।इसमें प्रकाशित रचनाएं कविता ,कहानी,लधुकथा,आलेख, आदि विद्याएं साकारात्मक गुणों से युक्त और युग की संवेदना को प्रकट करती हैं ।साहित्यिक जगत् में ऐसी पत्रिका का प्रकाशन बेहद सराहनीय है।"प्रतिध्वनि" की गूंज सभीके हृदय में गूंजती रहे और साहित्यिक सेवा में यह पत्रिका नित्य नये मानदंड के साथ कामयाबी हासिल करे।इन्हीं शुभकामनाओं के साथ प्रतिध्वनि पत्रिका से जुड़े सभी साहित्य सेवियों और सम्पादक मंडल को हार्दिक बधाई।मेरी रचना को पत्रिका में प्रकाशित करने हेतु
ReplyDeleteसादर धन्यवाद।
.....डॉक्टर सुनीता मंडल
अध्यक्ष ,हिंदी विभाग
काँचरापाड़ा कॉलेज
कल्याणी विश्वविद्यालय
कोलकाता, पश्चिम बंगाल।
धन्यवाद
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